Damoh: शराब दुकान हटाने ग्रामीणों का धरना, महिलाएं बोलीं- लाड़ली बहना के पैसे भले न मिले, लेकिन दुकान हटाएं

दमोह
जिले
के
पथरिया
ब्लॉक
में
आने
वाले
केवलारी
गांव
के
ग्रामीणों
ने
मंगलवार
दोपहर
शराब
दुकान
हटाने
विरोध
प्रदर्शन
किया।
लोगों
ने
भजन
गाए
तो
वहीं
महिलाओं
ने
कहा,
लाड़ली
बहना
के
पैसे
भले
सरकार

दे,
लेकिन
उनके
गांव
से
शराब
दुकान
हटनी
चाहिए।
प्रशासन
के
अधिकारी
समझाइश
देने
पहुंचे,
लेकिन
ग्रामीण
नहीं
माने।

ग्रामीणों
ने
शराब
दुकान
के
सामने
ही
टेंट
लगाकर
धरना
शुरू
कर
दिया।
यहां
मौजूद
गांव
की
महिला
पुरुष
और
युवा
शराब
दुकान
के
सामने
धार्मिक
भजन
भी
गा
रहे
थे।
ग्रामीणों
की
मांग
है
कि
गांव
से
शराब
दुकान
हटाई
जाए।


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हटाई
जाए
शराब
दुकान,
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जगह
शिफ्ट
करने
की
मांग
को
लेकर
महिलाओं
का
प्रदर्शन

लोगों
का
आरोप
है
कि
शराब
दुकान
के
सामने
असामाजिक
तत्वों
का
डेरा
होता
है।
गांव
की
महिलाएं
और
बेटियां
इस
रास्ते
से
जब
भी
निकलती
हैं, शराबी
उन्हें
परेशान
करते
हैं।
ग्रामीणों
ने
यह
भी
कहा
कि
पहले
भी
उन्होंने
प्रशासन
को
ज्ञापन
दिए
थे
कि
यहां
पर
शराब
दुकान
न खोली
जाए,
लेकिन
उसके
बाद
भी
नए
टेंडर
के
बाद
इसी
जगह
दुकान
फिर
से
खुल
गई
और
इसलिए
हमने
विरोध
शुरू
कर
दिया। 


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रहे
आंसर

इसी
गांव
में
रहने
वाली
प्यारी
बाई
ने
कहा
कि
शराब
दुकान
से
हम
बहुत
परेशान
हैं।
गांव
में
दुकान
नहीं
खुलनी
चाहिए।
हम
चाहते
हैं
कि
सरकार
जो
हमें
लाड़ली
बहना
के
तौर
पर
1250
रुपये की
राशि
दे
रही
है,
वह
वापस
ले
ले। लेकिन
गांव
में
दुकान

खोले।
क्योंकि
जो
राशि
सरकार
हमें
देती
है,
घर
के
लोग
वह
छीन
लेते
हैं
और
शराब
पी
लेते
हैं।
अब
गांव
में
दुकान
नहीं
खुलेगी,
भले
ही
इसके
लिए
हमें
अपनी
जान
ही
क्यों
न देनी
पड़े।

ग्रामीणों
के
विरोध
की
खबर
मिली
तो
पथरिया
नायब
तहसीलदार
दीपमाला
सिंह
भी
गांव
पहुंच
गई।
उन्होंने
लोगों
से
कहा
कि
उनके
द्वारा
दिए
गए
ज्ञापन
को
वह
जिला
मुख्यालय
पहले
ही
भेज
चुके
हैं।
एक
बार
फिर
उनके
ज्ञापन
को
वह
कलेक्टर
तक
पहुंचाएंगे।
साथ
में
उन्होंने
यह
भी
कहा
कि
यदि
आप
लोग
कलेक्टर
के
पास
जाकर
अपनी
बात
रखना
चाहते
हैं
तो
वहां
भी
जा
सकते
हैं,
क्योंकि
अंतिम
निर्णय
वरिष्ठ
अधिकारियों
के
हाथ
में
होता
है।

इसी
बीच
आबकारी
विभाग
के
एक
अधिकारी
अनुराग
सिंह
ने
सरपंच
से
फोन
पर
बात
कर
उन्हें
भरोसा
दिलाया
कि
तीन
दिन
में
दुकान
शिफ्ट
कर
दी
जाएगी। लेकिन
गांव
के
लोगों
का
कहना
है
कि
वह
तीन
दिन
यहीं
पर
धरना
देकर
बैठेंगे।
जब
दुकान
हटेगी,
हम
भी
हट
जाएंगे।
दोपहर
दो
बजे
तक
ग्रामीणों
का
धरना
जारी
रहा।