व्यापमं पीएमटी घोटाला: सीबीआई कोर्ट ने 10 दोषियों को सुनाई 3 साल की कैद, 16 हजार जुर्माना भी लगाया


भोपाल
की
विशेष
सीबीआई
अदालत
ने
शुक्रवार
को
बहुचर्चित
व्यापमं
पीएमटी
(मेडिकल
प्रवेश
परीक्षा)
घोटाले
में
बड़ा
फैसला
सुनाते
हुए
10
दोषियों
को
तीन-तीन
साल
की
कठोर
कैद
की
सजा
सुनाई
है।
साथ
ही
अदालत
ने
इन
सभी
दोषियों
पर
कुल
16,000
रुपए
का
जुर्माना
भी
लगाया
है।
यह
मामला
गांधी
मेडिकल
कॉलेज,
भोपाल
में
वर्ष
2009
की
एमबीबीएस
प्रवेश
परीक्षा
से
जुड़ा
है,
जिसमें
फर्जी
अभ्यर्थियों
और
सॉल्वरों
की
मदद
से
एडमिशन
दिलाने
का
षड्यंत्र
रचा
गया
था। 


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इनमें
चार
 उम्मीदवार
विकास
सिंह,
कपिल
पारटे,
दिलीप
चौहान,
प्रवीण
कुमार
थे,
जिन्होंने
मेडिकल
प्रवेश
के
लिए
सॉल्वर
के
माध्यम
से
परीक्षा
दी
थी।
पांच
सॉल्वर
नागेन्द्र
कुमार,
दिनेश
शर्मा,
संजीव
पांडे,
राकेश
शर्मा,
दीपक
ठाकुर
ऐसे
थे,
जिन्होंने
असली
परीक्षार्थियों
की
जगह
परीक्षा
दी,
जबकि
एक
बिचौलिया
सत्येन्द्र
सिंह
इस
पूरे
नेटवर्क
को
संचालित
कर
रहा
था।


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विशेष
सीबीआई
न्यायाधीश
(व्यापमं
प्रकरण)
की
अदालत
ने
सभी
आरोपियों
को
आईपीसी
की
धारा
419,
420,
467,
468,
471
और
भ्रष्टाचार
निवारण
अधिनियम
के
प्रावधानों
के
तहत
दोषी
ठहराया।
अदालत
ने
टिप्पणी
की
कि
शिक्षा
और
चिकित्सा
जैसे
गंभीर
क्षेत्र
में
इस
तरह
की
धोखाधड़ी
समाज
के
लिए
खतरनाक
है
और
इसे
किसी
भी
रूप
में
बर्दाश्त
नहीं
किया
जा
सकता। इस
मामले
की
जांच
पहले
एसटीएफ
के
पास
थी,
जिसे
बाद
में
सुप्रीम
कोर्ट
के
आदेश
पर
केंद्रीय
अन्वेषण
ब्यूरो
(CBI)
को
सौंपा
गया
था।