
आमतौर
पर
अफसरों
और
नेताओं
के
लिए
अलग
व्यवस्था
होती
है। लेकिन
मंगलवार
को
कुछ
अलग
ही
नजारा
देखने
को
मिला।
छिंदवाड़ा
जिला
पंचायत
अध्यक्ष
संजय
पुन्हार
खुद
एक
आम
नागरिक
की
तरह
जनसुनवाई
में
पहुंचे
और
कलेक्टर
के
सामने
अपनी
फरियाद
रखी।
उनका
कहना
था
कि
राजनीतिक
द्वेष
के
चलते
उनके
खिलाफ
फर्जी
शिकायतें
दर्ज
कराई
जा
रही
हैं,
जिससे
उनकी
छवि
खराब
करने
की
कोशिश
हो
रही
है।
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पूरा
मामला
उस
वक्त
तूल
पकड़
गया,
जब
26
मार्च
को
परासिया
के
कुछ
नेताओं
ने
पुन्हार
के
जाति
प्रमाण
पत्र
को
लेकर
सवाल
उठाए।
आरोप
लगाया
गया
कि
उन्होंने
गलत
जाति
प्रमाण
पत्र
के
आधार
पर
चुनाव
लड़ा।
शिकायतकर्ताओं
का
कहना
है
कि
उनके
पिता
उत्तर
प्रदेश
के
निवासी
थे
और
जाति
प्रमाण
पत्र
में
गलत
जानकारी
दी
गई।
इस
आरोप
के
बाद
राजनीतिक
हलकों
में
हलचल
मच
गई।
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यह
भी
पढ़ें: मध्यप्रदेश
में
‘मुख्यमंत्री
सुगम
परिवहन
सेवा’
को
कैबिनेट
की
मंजूरी,
हाइटेक
होगी
सेवा
मैं
भी
एक
आम
नागरिक
हूं
: पुन्हार
जनसुनवाई
में
संजय
पुन्हार
ने
अपनी
बात
रखते
हुए
कहा,
आज
मैं
यहां
नेता
या
पदाधिकारी
नहीं,
बल्कि
एक
आम
नागरिक
की
तरह
आया
हूं।
मेरे
खिलाफ
झूठी
शिकायतें
दर्ज
कराई
जा
रही
हैं,
जिससे
मेरी
प्रतिष्ठा
धूमिल
हो
रही
है।
अगर
मेरे
खिलाफ
कोई
सबूत
है,
तो
उसे
सामने
लाया
जाए।
कलेक्टर
से
निष्पक्ष
जांच
की
मांग
पुन्हार
ने
कलेक्टर
से
मांग
की
कि
शिकायतकर्ताओं
को
बुलाकर
उनके
आरोपों
के
प्रमाण
मांगे
जाएं।
उन्होंने
कहा
कि
यदि
जांच
में
कुछ
गलत
पाया
जाता
है तो
वे
हर
फैसले
को
स्वीकार
करेंगे। लेकिन
बिना
प्रमाण
के
झूठे
आरोप
लगाना
उचित
नहीं
है।
यह
भी
पढ़ें: कैबिनेट
बैठक
से
पहले
सीएम
यादव
का
संबोधन,
बोले-
इंदौर
में
27
अप्रैल
को
होगी
आईटी
कॉन्क्लेव
राजनीतिक
गलियारों
में
हलचल
इस
घटनाक्रम
के
बाद
जिले
में
राजनीतिक
सरगर्मियां
तेज
हो
गई
हैं।
समर्थकों
का
कहना
है
कि
पुन्हार
को
साजिशन
निशाना
बनाया
जा
रहा
है।
जबकि
विरोधियों
का
मानना
है
कि
जांच
के
बाद
सच्चाई
सामने
आ
जाएगी।
अब
सभी
की
नजरें
प्रशासन
पर
टिकी
हैं
कि
इस
पूरे
मामले
में
आगे
क्या
कदम
उठाए
जाते
हैं।