
मध्य
प्रदेश
हाईकोर्ट
के
जस्टिस
संजय
द्विवेदी
और
जस्टिस
ए.के.
पालीवाल
की
युगलपीठ
ने
राज्य
सरकार
को
निर्देश
दिया
है
कि
अपात्र
नर्सिंग
कॉलेजों
को
अनुमति
देने
वाले
तत्कालीन
अधिकारियों
की
सूची
प्रस्तुत
की
जाए,
ताकि
उन
पर
व्यक्तिगत
जिम्मेदारी
तय
की
जा
सके।
अदालत
ने
यह
आदेश
लॉ
स्टूडेंट्स
एसोसिएशन
के
अध्यक्ष
विशाल
बघेल
द्वारा
दायर
याचिका
पर
सुनवाई
के
दौरान
दिया,
जिसमें
प्रदेश
में
फर्जी
नर्सिंग
कॉलेजों
के
संचालन
को
चुनौती
दी
गई
थी।
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याचिका
में
आरोप
लगाया
गया
था
कि
एमपीएनआरसी
कार्यालय
से
13
से
19
दिसंबर
के
बीच
की
सीसीटीवी
फुटेज
डिलीट
हो
गई
थी।
इसके
मद्देनजर,
अदालत
ने
पुलिस
आयुक्त
भोपाल
और
साइबर
सेल
प्रभारी
को
डिलीटेड
सीसीटीवी
फुटेज
की
रिकवरी
के
प्रयास
करने
और
तत्कालीन
रजिस्ट्रार
की
फोन
लोकेशन
की
जांच
करने
का
आदेश
दिया
था,
ताकि
उनकी
भौतिक
उपस्थिति
की
पुष्टि
हो
सके।
साथ
ही,
आसपास
लगे
सीसीटीवी
कैमरों
की
भी
जांच
के
निर्देश
दिए
गए
थे।
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सोमवार
को
हुई
सुनवाई
में
साइबर
क्राइम
भोपाल
ने
अदालत
को
सूचित
किया
कि
डिलीटेड
फुटेज
को
पुनः
प्राप्त
करने
के
लिए
सामग्री
केंद्रीय
विधि
विज्ञान
प्रयोगशाला,
बरखेड़ा
बोदर,
भोपाल
को
दी
गई
है।
हालांकि,
प्रयोगशाला
के
निदेशक
ने
लिखित
में
सूचित
किया
कि
जांच
की
समाप्ति
की
कोई
निश्चित
तिथि
नहीं
है।
अदालत
ने
इस
पर
नाराजगी
जताते
हुए
कहा
कि
निदेशक
का
रवैया
अत्यंत
लापरवाहीपूर्ण
है
और
उन्हें
अगली
सुनवाई
में
व्यक्तिगत
रूप
से
उपस्थित
होकर
स्पष्टीकरण
प्रस्तुत
करने
का
आदेश
दिया।
इसके
अलावा,
सीबीआई
की
रिपोर्ट
के
आधार
पर
हाईकोर्ट
द्वारा
अयोग्य
घोषित
किए
गए
कॉलेजों
को
2018
से
मान्यता
देने
वाले
अधिकारियों
की
सूची
भी
प्रस्तुत
करने
के
निर्देश
दिए
गए
हैं।
अदालत
ने
स्पष्ट
किया
है
कि
यदि
आदेश
का
पालन
नहीं
हुआ
तो
संबंधित
अधिकारियों
के
खिलाफ
सख्त
कार्रवाई
की
जाएगी।
याचिकाकर्ता
की
ओर
से
अधिवक्ता
आलोक
बागरेचा
ने
पैरवी
की।