
अखिलेश
यादव
–
फोटो
:
अमर
उजाला
विस्तार
यूं
तो
एटा
लोकसभा
सीट
पर
मतदाताओं
के
बीच
मुख्य
मुकाबला
लोधी
और
यादवों
के
बीच
रहता
है।
यही
दोनों
जाति
वर्ग
सर्वाधिक
हैं।
जो
अपनी
एकजुटता
के
साथ
जीत-हार
का
फैसला
करते
हैं।
लेकिन
इस
बार
समीकरण
बदले
हुए
हैं।
परंपरागत
वोट
तो
दोनों
दलों
का
अपनी-अपनी
जगह
है,
जबकि
शाक्य
मतदाताओं
में
बिखराव
के
आसार
बन
गए
हैं।
भाजपा
के
बेस
वोटर
कहे
जाने
वाले
ये
मतदाता
सपा
से
शाक्य
आने
के
बाद
असमंजस
में
है।
ऐसे
में
शाक्य
मतदाता
जिस
ओर
एकजुटता
के
साथ
झुकते
हैं
तो
गेम
चेंबर
साबित
हो
सकते
हैं।
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