Varanasi Lok Sabha Seat: सपा-कांग्रेस नहीं बसपा से भाजपा को मिली कड़ी टक्कर, देखें क्या कहते हैं आंकड़े

Varanasi Lok Sabha Seat:                                    सपा-कांग्रेस नहीं बसपा से भाजपा को मिली कड़ी टक्कर, देखें क्या कहते हैं आंकड़े
BJP faces competition from BSP not SP-Congress in Varanasi Lok Sabha Seat

वाराणसी
संसदीय
सीट


फोटो
:
अमर
उजाला

विस्तार

भाजपा
के
चुनावी
रणनीतिकार
अब
भले
ही
वाराणसी
संसदीय
सीट
को
अपनी
परंपरागत
सीट
मानते
हों
लेकिन
एक
समय
ऐसा
भी
था
जब
इस
सीट
को
जीतने
में
पार्टी
प्रत्याशी
के
पसीने
छूट
गए
थे।
राष्ट्रीय
राजनीति
में
कद्दावर
छवि
रखने
वाले
डॉ.
मुरली
मनोहर
जोशी
को
यहां
माफिया
मुख्तार
अंसारी
से
कड़ी
टक्कर
मिली
थी।
मतदान
के
दिन
अंतिम
दौर
में
हिंदू
मतों
के
ध्रुवीकरण
के
चलते
जोशी
की
नैया
पार
लगी
थी।
वर्ष
2009
का
लोकसभा
चुनाव
कई
मायने
में
अहम
था।

पहली
बार
यहां
बसपा
ने
अपनी
मजबूत
उपस्थिति
दर्ज
कराई
थी।
बसपा
के
टिकट
पर
माफिया
मुख्तार
अंसारी
मैदान
में
थे।
जबकि
उनके
धुर
विरोधी
अजय
राय
सपा
के
सिंबल
पर
मैदान
में
थे।
चुनाव
में
डॉ.
जोशी
को
2,03,122
मत
मिले
थे
जबकि
जेल
में
रहते
हुए
चुनाव
लड़ने
वाले
मुख्तार
अंसारी
1,85,911
मत
हासिल
करने
में
सफल
रहे।
इस
चुनाव
में
भाजपा
छोड़कर
समाजवादी
पार्टी
का
दामन
थामने
वाले
अजय
राय
को
1,23,874
मत
मिले
थे। 

डॉ.
जोशी
ने
यह
मुकाबला
महज
17,211
मतों
से
जीता
था।
2004
में
यहां
से
जीत
चुके
कांग्रेस
के
राजेश
मिश्रा
66,386
मतों
के
साथ
चौथे
स्थान
पर
रहे।
अपना
दल
के
विजयप्रकाश
को
65,912
मत
मिले
थे।

समीकरण
की
बात
करें
तो
कांग्रेस
के
डॉ.
राजेश
मिश्रा
ने
मुस्लिम
मतों
में
सेंध
लगाकर
मुख्तार
का
नुकसान
किया
और
अजय
राय
ने
स्थानीय
होने
के
कारण
जोशी
के
वोट
बैंक
में
सेंधमारी
की,
लेकिन
भाजपा
का
पुराना
गढ़
होने
के
कारण
जोशी
को
जीत
हासिल
हुई।
हालांकि
12वें
से
16वें
चक्र
की
मतगणना
के
दौरान
जोशी
और
मुख्तार
के
बीच
मतों
का
फासला
4000
का
ही
रह
गया
था,
लेकिन
उसके
बाद
जोशी
ने
जो
बढ़त
हासिल
की
वह
अंत
तक
बनी
रही।

2004
के
लोकसभा
चुनाव
में
इलाहाबाद
में
हार
झेलने
के
बाद
जोशी
ने
जीत
की
उम्मीद
के
साथ
वाराणसी
का
रुख
किया
था।
जोशी
की
जीत
में
उनकी
साफ-सुथरी
राजनीति
छवि
ने
निश्चित
तौर
पर
बड़ा
योगदान
दिया
लेकिन
स्थानीय
लोगों
का
मानना
है
कि
जोशी
को
जीत
सिर्फ
इसलिए
मिली
क्योंकि
वह
एक
ऐसे
क्षेत्र
से
चुनाव
लड़
रहे
थे,
जो
हमेशा
से
भाजपा
के
प्रत्याशियों
लिए
सुरक्षित
रहा
है।