
पाकबड़ा
में
चुनावी
चर्चा…
–
फोटो
:
अमर
उजाला
विस्तार
पीतलनगरी
की
अपनी
ही
दुश्वारियां
हैं।
चीन
से
आने
वाला
सस्ता
सामान
यहां
की
हैंडीक्राफ्ट
इंडस्ट्री
के
लिए
चुनौती
बना
हुआ
है,
तो
स्थानीय
मुद्दे
भी
कम
नहीं।
पर,
जब
लोकसभा
प्रत्याशी
की
बात
आती
है,
तो
आम
मतदाता
यही
कहते
हुए
मिलते
हैं
कि
हमारे
यहां
सबसे
बड़ा
कोई
मुद्दा
है
तो
सिर्फ
और
सिर्फ
चुनाव
है।
छोटे-बड़े
किसी
भी
मुद्दे
पर
हावी
है-अस्मिता
का
सवाल।
इसलिए
खालिस
राजनीति
के
आधार
पर
ही
पक्षधरता
तय
होगी।
पेश
है
रिपोर्ट…
अलसुबह
हम
कांठ
क्षेत्र
के
पाकबड़ा
में
स्थित
साधन
सहकारी
समिति
के
परिसर
पहुंचे।
यहां
अलग-अलग
राजनीतिक
मिजाज
के
मतदाता
पहले
से
ही
मौजूद
थे।
हमें
परिचर्चा
के
लिए
उन्हें
एक
साथ
लाने
के
लिए
सिर्फ
शुरुआत
ही
करनी
पड़ी।
यहां
मिले
देवेंद्र
कुमार
जाटव
कहते
हैं,
अरसे
से
बसपा
को
वोट
करते
आ
रहे
हैं।
पर,
अब
बसपा
का
प्रत्याशी
मुख्य
मुकाबले
में
आता
हुआ
मालूम
नहीं
पड़
रहा
है।
फिर
किधर
जाएंगे?
इस
सवाल
पर
देवेंद्र
कुमार
कहते
हैं,
इस
बार
भाजपा
को
आजमाना
चाहते
हैं।
अलबत्ता
उन्हीं
के
साथी
प्रमोद
कुमार
और
भीष्मपाल
कहते
हैं,
हम
कहीं
और
वोट
देंगे
तो
गिना
नहीं
जाएगा।
इसलिए
बसपा
के
साथ
ही
रहना
ठीक
लग
रहा
है।
हिंदू-मुस्लिम
फैक्टर
प्रभावी
ब्रजपाल
सिंह
जाट
और
एके
त्रिपाठी
मानते
हैं
कि
यह
चुनाव
सीधे-सीधे
हिंदू
और
मुसलमान
फैक्टर
पर
हो
रहा
है।
हम
किधर
हैं,
इसमें
किसी
तरह
का
कोई
संशय
होना
ही
नहीं
चाहिए।
भाड़ला
के
इरफान
और
रियासत
हुसैन
भी
उतनी
ही
साफगोई
से
अपनी
बात
रखते
हुए
कहते
हैं
कि
समाजवादी
पार्टी
की
प्रत्याशी
रुचिवीरा
मजबूत
टक्कर
देंगी।
सांसद
डॉ.
एसटी
हसन
का
टिकट
काटे
जाने
से
क्या
कोई
फर्क
पड़ेगा?
इस
सवाल
पर
इरफान
कहते
हैं-हमें
ऐसा
नहीं
लगता।
अलबत्ता
मुस्लिम
मतदाताओं
का
बेहद
छोटा-सा
हिस्सा
बसपा
प्रत्याशी
इरफान
सैफी
की
ओर
जरूर
जा
सकता
है।
अब्दुल
उनकी
बातों
को
और
मजबूती
देते
हुए
कहते
हैं,
इतना
वोट
तो
हर
चुनाव
में
ही
इधर
से
उधर
हो
जाता
है।
संप्रदाय
के
आधार
पर
कभी
वोट
नहीं
देता
मुस्लिम
हम
जब
मुरादाबाद
देहात
क्षेत्र
में
पहुंचे
तो
कपड़ों
के
एक
शोरूम
में
रोजेदार
इबादत
कर
रहे
थे।
बहुत
मना
करने
पर
भी
उन्होंने
हमें
चाय
पिलाई
और
फिर
अपनी
व्यथा
भी
सामने
रखी।
पीपलसाना
के
असरार
हुसैन
बताते
हैं,
चौराहे
पर
आदमी
देखकर
वाहनों
की
चेकिंग
होती
है।
टोपी
लगी
हो
तो
चालान
कटना
तय
मानो।
आखिर
ऐसा
फर्क
क्यों
है?
-
मोहल्ला
जामा
मस्जिद
के
मो.
खालिद
हैंडीक्राफ्ट
के
एक्सपोर्टर
हैं।
उनके
परिवार
के
लोग
यूरोप
में
भी
बसे
हुए
हैं।
वह
कहते
हैं,
मुरादाबाद
की
ही
नहीं,
बल्कि
फिरोजाबाद
और
अलीगढ़
की
भी
स्थानीय
इंडस्ट्री
चीन
के
कारण
संकट
में
है।
पर,
जाति-धर्म
के
सवाल
लोगों
पर
इतने
हावी
हैं
कि
अर्थव्यवस्था
की
ओर
किसी
का
ध्यान
ही
नहीं
जाता। -
मो.
खालिद
बिना
झिझके
कहते
हैं,
हम
अब
कांग्रेस
की
ओर
देख
रहे
हैं।
गठबंधन
के
तहत
यहां
सपा
का
प्रत्याशी
मैदान
में
है,
तो
मेरी
भी
पसंद
वही
है।
हमें
इससे
फर्क
नहीं
पड़ता
कि
वो
प्रत्याशी
हिंदू
है
या
मुसलमान।
संप्रदाय
देखकर
मुस्लिम
कभी
वोट
नहीं
करता।
हम
तो
समानता
का
अधिकार
चाहते
हैं।
गोधी
के
रहने
वाले
हाजी
कदीर
कहते
हैं,
भाजपा
इस
देश
में
80
:
20
की
बात
करती
है,
जो
ठीक
नहीं।
सिरसवां
मोड़
के
रहने
वाले
भूरा
खां
कहते
हैं,
हम
तो
सपा
प्रत्याशी
की
जीत
के
प्रति
पूरी
तरह
से
आश्वस्त
हैं।
विज्ञापन
अब
दिखता
है
भारत
में
असली
लोकतंत्र
हरपाल
सिंह
जाटव
बसपा
की
ओर
देख
रहे
हैं।
वहीं,
मोदी-योगी
की
नीतियों
को
राहुल
गुप्ता
सबसे
अच्छा
मानते
हैं।
वे
कहते
हैं
कि
भाजपा
ने
कानून-व्यवस्था
में
बड़े
सुधार
किए
हैं।
कोई
किसी
को
अब
दबा
नहीं
सकता।
असली
लोकतंत्र
तो
भारत
में
अब
दिखता
है।
देवेश
शर्मा
कहते
हैं,
मुरादाबाद
में
प्रत्याशी
नहीं,
कमल
का
फूल
सबको
पछाड़ता
हुआ
दिख
रहा
है।
अविरल
श्रीवास्तव
आश्वस्त
हैं
कि
अगले
10
बरस
तक
भाजपा
ही
राज
करेगी।
मंदिर
निर्माण
के
संदेश
अहम
मुरादाबाद
नगर
क्षेत्र
के
लाकड़ी
फाजिलपुर
के
रहने
वाले
भूपेंद्र
चौहान
और
सतीश
शर्मा
बताते
हैं
कि
स्थानीय
स्तर
पर
बेरोजगारी,
खराब
सड़कें,
जलभराव
और
सरकारी
दफ्तरों
का
भ्रष्टाचार
बड़ी
मुश्किलें
खड़ी
करते
हैं।
पर,
इस
चुनाव
का
मुद्दा
है-हमारी
अस्मिता।
राममंदिर
के
निर्माण
से
भी
यही
संदेश
मिला
है।
भोपाल
सिंह
और
दीपक
चौहान
भी
उनसे
सहमत
दिखे।
जिसको
जो
दल
पसंद उसी
के
पक्ष
में
गढ़
रहा
तर्क
-
ठाकुरद्वारा
क्षेत्र
के
मंजूर
अहमद
कहते
हैं
कि
मुफ्त
राशन
से
मजदूरी
के
रेट
चढ़
गए
हैं।
इस
योजना
से
किसी
का
भला
नहीं
हो
रहा
है।
आम
लोगों
को
काम
मिलना
चाहिए।
खाने-पीने
की
चीजें
तो
वे
खुद
ही
खरीद
लेंगे। -
ठाकुरद्वारा
क्षेत्र
के
ही
प्रदीप
जायसवाल
कहते
हैं,
आम
लोगों
की
दुश्वारियां
तो
किसी
भी
पार्टी
के
राज
में
कम
नहीं
हुईं।
कम
से
कम
इस
सरकार
में
चैन
से
सो
तो
पा
रहे
हैं। -
अर्जुन
शर्मा
कहते
हैं,
मोदी
के
चेहरे
पर
ही
लोग
निर्णय
ले
रहे
हैं।
स्थानीय
मुद्दे
गौड़
हैं।
राममंदिर
के
निर्माण
से
स्वाभिमान
जगा
है।
मुरादाबाद
के
रण
में
ये
हैं
योद्धा
कुंवर
सर्वेश
कुमार,
भाजपा
पूर्व
सांसद
कुंवर
सर्वेश
कुमार
को
राजनीति
विरासत
में
मिली
है।
वे
2014
में
लोकसभा
का
चुनाव
जीते
थे।
अपने
वोट
बैंक
को
समेटने
की
चुनौती
है।
रुचि
वीरा,
सपा
बिजनौर
से
विधायक
भी
रह
चुकी
हैं।
सांसद
एसटी
हसन
के
समर्थक
टिकट
कटने
के
कारण
उनके
खिलाफ
हैं।
वे
बाहरी
होने
का
आरोप
भी
लगा
रहे
हैं।
इरफान
सैफी,
बसपा
सैफी
ठाकुरद्वारा
नगर
पंचायत
के
अध्यक्ष
हैं।
इरफान
के
सामने
शहर
के
मतदाताओं
से
नजदीकी
बढ़ाने
और
उनको
साधने
की
बड़ी
चुनौती
है।