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AM16
अप्रैल
2024
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इराक
से
जंग
के
दौरान
शुरू
हुआ
ईरान
का
मिसाइल
प्रोग्राम
ईरान
ने
1980-88
के
दौरान
इराक
के
साथ
जंग
के
समय
बैलिस्टिक
मिसाइलें
बनाना
शुरू
कर
दिया
था।
दरअसल,
इस
जंग
में
इराक
के
एयरक्राफ्ट
और
लंबी
दूरी
वाली
मिसाइलों
ने
ईरान
में
भारी
तबाही
मचाई
थी।
1979
में
इस्लामिक
रिवॉल्यूशन
के
बाद
ईरान
के
अमेरिका
और
पश्चिमी
देशों
से
रिश्ते
बिगड़
गए।
ऐसे
में
उसे
एयरक्राफ्ट
के
पार्ट्स
मिलना
भी
बंद
हो
गया।
ऐसे
में
ईरान
ने
लीबिया
का
रुख
किया।
साल
1984
में
लीबिया
ने
ईरान
को
20
स्कड-B
मिसाइलें
सप्लाई
कीं।
इसके
बाद
ईरान
ने
नॉर्थ
कोरिया
से
भी
कई
मिसाइलें
खरीदीं।
इनके
जरिए
ईरान
को
इराक
के
खिलाफ
खुद
को
मजबूत
करने
में
मदद
मिली।
हालांकि,
इन
मिसाइलों
की
अधिकतम
रेंज
500
किमी
ही
थी।
खाड़ी
देशों
और
इजराइल
का
सामना
करने
के
लिए
ईरान
को
ज्यादा
रेंज
वाली
मिसाइलों
की
जरूरत
थी।
तस्वीर
ईरान
की
शहाब-1
मिसाइल
की
है।
माना
जाता
है
कि
यह
मिसाइल
उसे
नॉर्थ
कोरिया
ने
दी
थी।
(फाइल)
1998-2003
के
बीच
ईरान
ने
शहाब-3
मिसाइल
की
टेस्टिंग
की।
माना
जाता
है
कि
यह
मिसाइल
नॉर्थ
कोरिया
की
नोदोंग
मिसाइल
पर
बेस्ड
थी।
इसके
बाद
इस
मिसाइल
में
कई
बदलाव
कर
गदर-1
मिसाइल
बनाई
गई।
इसकी
रेंज
1600
किमी
थी।
इसके
बाद
से
ईरान
लगातार
नई
बैलिस्टिक
मिसाइलों
की
टेस्टिंग
करता
रहा
है।
3
जनवरी
2020
को
ईरानी
जनरल
कासिम
सुलेमानी
की
हत्या
के
बाद
7
जनवरी
2020
को
ईरान
ने
इराक
में
मौजूद
अमेरिका
की
सेना
पर
10
से
ज्यादा
बैलिस्टिक
मिसाइलों
से
हमला
किया
था।