13
मिनट
पहलेलेखक:
अनुराग
आनंद
-
कॉपी
लिंक
जनवरी
2013
की
बात
है।
तमिलनाडु
में
वेल्लोर
जिले
के
पट्टाली
मक्कल
में
DMK
कार्यकर्ताओं
की
एक
सभा
थी।
तब
के
पार्टी
चीफ
और
दक्षिण
की
राजनीति
के
दिग्गज
करुणानिधि
ने
एक
बड़ा
ऐलान
किया,
‘यह
सवाल
लाजिमी
है
कि
मेरे
बाद
DMK
चीफ
कौन
होगा?
आप
सभी
को
यह
नहीं
भूलना
चाहिए
कि
इसका
जवाब
स्टालिन
है,
लेकिन
अभी
मैं
पार्टी
को
संभालने
में
सक्षम
हूं,
इसलिए
स्टालिन
को
थोड़े
समय
तक
और
इंतजार
करना
होगा।’
करुणानिधि
का
ऐलान
उनके
बड़े
बेटे
एमके
अलागिरी
को
रास
नहीं
आया।
वे
पिता
से
बगावत
पर
उतर
आए।
2G
घोटाले
में
कनिमोझी
का
नाम
आने
के
बाद
स्टालिन
UPA
सरकार
से
गठबंधन
तोड़ना
चाहते
थे,
लेकिन
अलागिरी
इसके
खिलाफ
थे।
करुणानिधि
के
कहने
के
बावजूद
अलागिरी
ने
कई
दिनों
तक
मंत्री
पद
से
इस्तीफा
नहीं
दिया।
दोनों
भाइयों
में
तकरार
बढ़ती
जा
रही
थी।
आखिरकार
25
जनवरी
2014
को
करुणानिधि
ने
बड़े
बेटे
अलागिरी
को