कुछ
ही
क्षण
पहले
-
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अमेरिकी
अखबार
की
रिपोर्ट
के
मुताबिक,
ईरानी
सुप्रीम
लीडर
इजराइल
पर
हमले
के
बाद
इसकी
वजह
से
होने
वाले
राजनीतिक
असर
का
मुआयना
कर
रहे
हैं।
(फाइल)
ईरान
अगले
दो
दिन
में
इजराइल
पर
हमला
कर
सकता
है।
अमेरिकी
अखबार
वॉल
स्ट्रीट
जर्नल
(WSJ)
ने
शुक्रवार
को
अपनी
रिपोर्ट
में
अमेरिकी
इंटेलिजेंस
के
हवाले
से
ये
जानकारी
दी
है।
रिपोर्ट
में
ईरानी
अधिकारी
के
हवाले
से
बताया
है
कि
ईरान
के
सुप्रीम
लीडर
आयतुल्लाह
खामेनेई
से
हमले
का
प्लान
साझा
किया
गया
है।
वो
इसके
मुमकिन
असर
का
मुआयना
कर
रहे
हैं।
हालांकि,
अधिकारी
ने
ये
भी
कहा
है
कि
अभी
फैसला
फाइनल
नहीं
किया
है।
वहीं,
इजराइल
अपने
उत्तर
और
पश्चिम
दोनों
हिस्सों
में
ईरान
के
हमले
से
निपटने
की
तैयारी
कर
रहा
है।
अमेरिका
के
विदेश
मंत्री
एंटनी
ब्लिंकन
ने
चीन,
सऊदी
अरब,
तुर्किये
और
कई
यूरोपीय
देशों
के
विदेश
मंत्रियों
से
फोन
पर
बात
की।
(फाइल)
ईरान
का
हमला
रोकने
के
लिए
अमेरिका
ने
चीन-सऊदी
से
मदद
मांगी
ईरान
की
तरफ
से
इजराइल
पर
हमले
के
खतरे
के
बीच
अमेरिका
के
विदेश
मंत्री
एंटनी
ब्लिंकन
ने
सऊदी
अरब,
चीन,
तुर्किये
और
कई
यूरोपीय
देशों
के
विदेश
मंत्रियों
से
फोन
पर
बात
की।
ब्लिंकन
ने
सभी
देशों
से
ईरान
को
हमला
न
करने
के
लिए
मनाने
को
कहा
है।
अमेरिका
के
विदेश
मंत्रालय
के
प्रवक्ता
मैथ्यू
मिलर
ने
कहा-
विवाद
को
बढ़ावा
देना
किसी
के
भी
हित
में
नहीं
है।
इससे
पहले
गुरुवार
को
अमेरिका
ने
इजराइल
में
काम
करने
वाले
अपने
नागरिकों
और
खासकर
डिप्लोमैट्स
के
लिए
एडवाइजरी
जारी
की।
अमेरिका
ने
अपनी
एम्बेसी
के
स्टाफ
को
यरुशलम,
तेल
अवीव
या
बीरशेबा
शहर
से
बिना
सावधानी
के
बाहर
न
जाने
को
कहा
है।
न्यूयॉर्क
टाइम्स
के
मुताबिक,
इजराइल-हमास
जंग
के
6
महीनों
में
ऐसा
पहली
बार
है,
जब
अमेरिका
ने
अपने
नागरिकों
के
लिए
इस
तरह
की
एडवाइजरी
जारी
की।
वहीं,
हमले
के
खतरों
को
देखते
हुए
गुरुवार
को
अमेरिका
के
सेंट्रल
कमांड
(CENTCOM)
के
जनरल
माइकल
कुरिला
इजराइल
पहुंचे।
वो
खतरे
की
परिस्थिति
में
इजराइल
को
गाइड़
करेंगे।
उन्होंने
इजराइल
के
रक्षा
मंत्री
योव
गैलेंट
और
इजराइल
डिफेंस
फोर्स
(IDF)
के
अधिकारियों
से
मुलाकात
की।
इजराइल
ने
सीरिया
में
ईरान
के
दूतावास
के
पास
हमला
किया
था
दरअसल,
1
अप्रैल
को
इजराइल
ने
सीरिया
में
ईरानी
एम्बेसी
के
पास
एयरस्ट्राइक
की
थी।
इसमें
ईरान
के
दो
आर्मी
कमांडर्स
समेत
13
लोग
मारे
गए
थे।
इसके
बाद
ईरान
ने
इजराइल
को
बदला
लेने
की
धमकी
दी
थी।
इस
हमले
के
बाद
व्हाइट
हाउस
की
प्रेस
सेक्रेटरी
कैरीन
जीन-पियरे
ने
बताया
था-
सीरिया
में
ईरानी
दूतावास
पर
हमले
के
बाद
अमेरिका
ने
ईरान
से
संपर्क
किया
था।
हमने
उन्हें
बताया
कि
इस
हमले
में
अमेरिका
का
कोई
हाथ
नहीं
था।
ईरान
इसका
सहारा
लेकर
अमेरिकी
ठिकानों
या
नागरिकों
को
निशाना
बनाने
की
कोशिश
न
करे।
इजराइल
ने
सीरिया
में
ईरान
के
दूतावास
के
पास
वाली
बिल्डिंग
को
निशाना
बनाया
था।
इस
हमले
में
13
लोग
मारे
गए
थे।
‘इजराइल
को
हमले
की
सजा
देंगे’
अमेरिका
की
इंटेलिजेंस
एजेंसी
ने
भी
आशंका
जताई
थी
कि
1
अप्रैल
के
हमले
के
बाद
ईरान
इजराइल
पर
जवाबी
अटैक
कर
सकता
है।
ईरान
के
सुप्रीम
लीडर
आयतुल्लाह
खामेनेई
ने
बुधवार
(10
अप्रैल)
को
कहा
था-इजराइल
को
इस
हमले
की
सजा
जरूरी
दी
जाएगी।
उन्होंने
सीरिया
में
हमारे
दूतावास
पर
हमला
किया।
यह
ईरान
की
धरती
पर
हमला
करने
जैसा
ही
था।
दूसरी
तरफ,
ब्रिटेन
के
विदेश
मंत्री
लॉर्ड
कैमरन
ने
भी
ईरानी
विदेश
मंत्री
को
फोन
करके
उन्हें
विवाद
को
आगे
न
बढ़ाने
की
सलाह
दी।
इससे
पहले
गुरुवार
को
इजराइल
के
प्रधानमंत्री
बेंजामिन
नेतन्याहू
ने
ईरान
का
नाम
लिए
बिना
कहा
था
कि
इजराइल
गाजा
के
अलावा
दूसरे
मोर्चों
पर
भी
जंग
की
तैयारी
कर
रहा
है।
नेतन्याहू
ने
ईरान
का
नाम
लिए
बिना
कहा
था-
अगर
किसी
ने
भी
हम
पर
हमला
किया,
तो
हम
इसका
जवाब
जरूर
करेंगे।
अरबी
भाषा
में
छपी
ईरानी
न्यूज
एजेंसी
की
एक
रिपोर्ट
के
मुताबिक,
ईरान
ने
राजधानी
तेहरान
के
ऊपर
अपने
एयरस्पेस
को
बंद
कर
दिया,
जिससे
वो
सैन्य
अभ्यास
कर
सकें।
हालांकि,
ईरानी
मीडिया
ने
बाद
में
इस
रिपोर्ट
को
हटा
दिया।
इजराइल
की
एयरस्ट्राइक
में
मारे
गए
ईरानी
की
रिवॉल्यूशनरी
गार्ड
के
सदस्यों
के
फ्यूनरल
सेरेमनी
में
ईरानी
सुप्रीम
लीडर
खामेनेई
भी
पहुंचे
थे।
इजराइल
ने
GPS
सिस्टम
बंद
किया,
सैनिकों
की
छुट्टी
कैंसिल
वहीं
कुछ
दिन
पहले
इजराइल
ने
अपने
GPS
नेविगेशन
सिस्टम
को
बंद
कर
दिया
था।
माना
जाता
है
कि
गाइडेड
मिसाइलों
के
हमलों
को
रोकने
के
लिए
GPS
को
बंद
किया
जाता
है।
इसके
अलावा
सभी
सैनिकों
की
छुट्टियां
भी
रद्द
कर
दी
गई
थीं।
ईरान
से
हमले
की
आशंका
के
बीच
इजराइली
सेना
ने
कहा
था-
हमारे
सैनिक
पहले
से
युद्ध
में
हैं।
स्थिति
को
देखते
हुए
अस्थायी
लड़ाकू
इकाइयों
की
छुट्टी
रद्द
की
गई
है।
एयर
डिफेंस
कमांड
को
अलर्ट
पर
रखा
गया
है।
कई
शहरों
में
एंटी
बॉम्ब
शेल्टर
शुरू
कर
दिए
गए
हैं।
पूरे
मिडिल
ईस्ट
में
जंग
फैल
सकती
है
ईरान
और
इजराइल
के
बीच
दुश्मनी
जगजाहिर
है,
हालांकि
दोनों
देश
कभी
सीधे
तौर
पर
एक-दूसरे
से
टकराने
की
हिम्मत
नहीं
जुटा
पाए।
ईरान
ने
हमेश
हमास
और
हिजबुल्लाह
जैसे
संगठनों
का
सहारा
लिया।
वहीं,
इजराइल
सीधे
तौर
पर
ईरानी
ठिकानों
पर
हमला
करता
है।
अब
अगर
ईरान
सीधे
इजराइल
को
निशाना
बनाता
है
तो
सबसे
बड़ा
खतरा
इस
बात
का
है
कि
पूरे
मिडिल
ईस्ट
में
यह
जंग
फैल
जाएगी
और
इसके
नतीजे
खतरनाक
होंगे।
खबरें
और
भी
हैं…