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Baba
Ramdev;
Patanjali
Misleading
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Case
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Acharya
Balkrishna
नई
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मिनट
पहले
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बाबा
रामदेव
और
बालकृष्ण
चौथी
बार
कोर्ट
के
सामने
पेश
हुए।
पतंजलि
विज्ञापन
केस
में
आज
सुप्रीम
कोर्ट
में
सुनवाई
चल
रही
है।
जस्टिस
हिमा
कोहली
और
जस्टिस
अमानतुल्लाह
की
बेंच
में
पतंजलि
की
ओर
से
एडवोकेट
मुकुल
रोहतगी
ने
कहा-
हमने
माफीनामा
फाइल
कर
दिया
है।
इसे
67
अखबारों
में
पब्लिश
किया
गया
है।
इस
पर
जस्टिस
हिमा
कोहली
ने
कहा-
आपके
विज्ञापन
जैसे
रहते
थे,
इस
ऐड
का
भी
साइज
वही
था?
कृपया
इन
विज्ञापनों
की
कटिंग
ले
लें
और
हमें
भेज
दें।
इन्हें
बड़ा
करने
की
जरूरत
नहीं
है।
हम
इसका
वास्तविक
साइज
देखना
चाहते
हैं।
ये
हमारा
निर्देश
है।
जस्टिस
कोहली
ने
कहा
कि
जब
आप
कोई
विज्ञापन
प्रकाशित
करते
हैं
तो
इसका
मतलब
यह
नहीं
कि
हम
उसे
माइक्रोस्कोप
से
देखेंगे।
सिर्फ
पन्ने
पर
न
हो
पढ़ा
भी
जाना
चाहिए।
कोर्ट
ने
रामदेव
और
बालकृष्ण
को
निर्देश
दिया
कि
अगले
दो
दिन
में
वे
ऑन
रिकॉर्ड
माफीनामा
जारी
करें,
जिसमें
लिखा
हो
कि
उन्होंने
गलती
की।
मामले
की
अगली
सुनवाई
अब
30
अप्रैल
को
होगी।
पतंजलि
ने
कहा-
भविष्य
में
कभी
ऐसी
गलती
नहीं
दोहराएंगे
पतंजलि
आयुर्वेद
ने
सोमवार
(22
अप्रैल)
को
कुछ
न्यूज
पेपर्स
में
माफीनामा
प्रकाशित
किया
है।
इसमें
कहा
कि
पतंजलि
आयुर्वेद
सुप्रीम
कोर्ट
का
पूरा
सम्मान
करता
है।
सुप्रीम
कोर्ट
में
हमारे
वकीलों
ने
हलफनामा
पेश
किया,
उसके
बाद
हमने
विज्ञापन
प्रकाशित
किया
और
प्रेस
कॉन्फ्रेंस
की।
हम
इसके
लिए
माफी
मांगते
हैं।
भविष्य
में
कभी
ऐसी
गलती
नहीं
दोहराएंगे।
पतंजलि
के
माफीनामे
का
अखबारों
में
छपा
विज्ञापन

पतंजलि
ने
22
अप्रैल
को
अखबारों
में
ये
विज्ञापन
छपवाया
है।
कंपनी
के
वकील
ने
कहा
कि
ये
विज्ञापन
67
अखबारों
में
छपवाया
गया
है।
कोर्ट
ने
इसके
साइज
को
लेकर
सवाल
किया
है।
पतंजलि
वेलनेस
का
वो
विज्ञापन
जिसे
IMA
ने
भ्रामक
बताया

10
जुलाई,
2022
को
पब्लिश
पतंजलि
वेलनेस
का
विज्ञापन।
एडवर्टाइजमेंट
में
एलोपैथी
पर
गलतफहमियां
फैलाने
का
आरोप
लगाया
गया
था।
इसी
विज्ञापन
को
लेकर
IMA
ने
17
अगस्त
2022
को
याचिका
लगाई
थी।
पिछली
5
सुनवाई
में
क्या
हुआ…
16
अप्रैल:
पतंजलि
ने
सुप्रीम
कोर्ट
में
फिर
माफी
मांगी,
बाबा
रामदेव
बोले-
काम
के
उत्साह
में
ऐसा
हो
गया
10
अप्रैल:
रामदेव-बालकृष्ण
का
माफीनामा
खारिज,
कोर्ट
ने
कहा-
जानबूझकर
आदेश
की
अवमानना
की
02
अप्रैल:
रामदेव
ने
सुप्रीम
कोर्ट
में
माफी
मांगी,
अदालत
ने
कहा-
सरकार
ने
आंखें
क्यों
मूंदे
रखीं
19
मार्च:
पतंजलि
विज्ञापन
केस
में
सुप्रीम
कोर्ट
बोला-
रामदेव
हाजिर
हों,अवमानना
का
केस
क्यों
न
लगे
27
फरवरी:
पतंजलि
को
सुप्रीम
कोर्ट
का
कंटेंप्ट
नोटिस,
बीमारी
ठीक
करने
का
दावा
करने
वाले
विज्ञापनों
पर
रोक


अपडेट्स
48
मिनट
पहले
-
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कोर्ट
रूम
LIVE
जस्टिस
हिमा
कोहली:
कृपया
इन
विज्ञापनों
की
कटिंग
ले
लें
और
हमें
भेज
दें।
इन्हें
बड़ा
करने
की
जरूरत
नहीं
है।
हम
इसका
वास्तविक
साइज
देखना
चाहते
हैं।
ये
हमारा
निर्देश
है।
जब
आप
कोई
विज्ञापन
प्रकाशित
करते
हैं
तो
इसका
मतलब
यह
नहीं
कि
हम
उसे
माइक्रोस्कोप
से
देखेंगे।
सिर्फ
पन्ने
पर
न
हो
पढ़ा
भी
जाना
चाहिए।
हम
यह
देखेंगे
कि
आपके
विज्ञापन
कैसे
हैं,
क्या
हमें
उन्हें
देखने
के
लिए
माइक्रोस्कोप
की
जरूरत
पड़ेगी।
50
मिनट
पहले
-
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कोर्ट
रूम
LIVE
जस्टिस
अमानतुल्लाह:
बहुत
ऊंचे
पद
पर
बैठे
व्यक्ति
ने
हमसे
कहा
कि
हम
फैसले
ले
रहे
हैं
और
नोटिफिकेशन
जारी
किया
जाएगा।
नोटिफिकेशन
नहीं
आया।
इसकी
जगह
आपने
कहा
कि
रूल
170
के
तहत
एक्शन
ना
लिया
जाए।
आप
ऐसा
कैसे
कर
सकते
हैं?
ये
पत्र
कैसे
भेजा
गया।
केंद्र
को
इसका
जवाब
देना
होगा।
तैयार
रहिए।
जस्टिस
हिमा
कोहली:
आपने
इस
रूल
170
का
जिक्र
कर
साफतौर
पर
हमारे
हाथ
बांध
दिए।
एएसजी
केएम
नटराज:
हम
निश्चित
ही
इसका
जवाब
देंगे।
54
मिनट
पहले
-
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कोर्ट
रूम
LIVE
सुप्रीम
कोर्ट:
महंगी
दवाओं
का
सुझाव
देते
वक्त
याचिकाकर्ता
ने
जब
कभी
भी
अपनी
पोजिशन
का
फायदा
उठाया
हो,
उसकी
बारीकी
से
जांच
की
जानी
चाहिए।
हम
यहां
किसी
एक
पार्टी
को
नुकसान
पहुंचाने
के
लिए
नहीं
हैं।
ये
कंज्यूमर्स
और
जनता
के
हित
के
लिए
है।
उन्हें
पता
होना
चाहिए
कि
उन्हें
किस
तरह
भ्रमित
किया
गया।
उन्हें
सच
जानने
का
हक
है
और
यह
भी
कि
वे
क्या
कदम
उठा
सकते
हैं।
55
मिनट
पहले
-
कॉपी
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कोर्ट
रूम
LIVE
सुप्रीम
कोर्ट:
दूसरी
कंपनियां
भी
भ्रामक
विज्ञापन
प्रकाशित
कर
रही
हैं।
इन
विज्ञापनों
के
चलते
लोग
दवा
ले
रहे
हैं,
बच्चों
और
बुजुर्गों
की
सेहत
पर
असर
पड़
रहा
है।
केंद्र
ने
ड्रग
कंट्रोलर
अथॉरिटी
और
राज्यों
को
पत्र
में
लिखा
था
कि
रूल
170
को
हटा
दिया
गया
है
और
सभी
अधिकारियों
को
निर्देश
दिए
गए
कि
इस
कानून
के
तहत
कोई
एक्शन
ना
लिया
जाए।
हमारा
मानना
है
कि
इन
विज्ञापनों
के
अलावा
हम
ड्र्ग्स
एंड
मैजिक
रेमेडीज
एक्ट
के
उल्लंघन
को
लेकर
कंज्यूमर
अफेयर्स,
इन्फर्मेशन
एंड
ब्रॉडकास्टिंग,
आईटी
मिनिस्ट्री
को
भी
पार्टी
बनाते
हैं।
सभी
राज्यों
और
केंद्र
शासित
प्रदेशों
को
भी
जवाब
देना
होगा।
जिन
मंत्रालयों
को
जिक्र
हमने
किया
है,
वो
हमें
बताएं
कि
कानूनों
के
गलत
इस्तेमाल
को
रोकने
के
लिए
पिछले
3
साल
में
उन्होंने
क्या
कदम
उठाए।
06:14
AM23
अप्रैल
2024
-
कॉपी
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कोर्ट
रूम
LIVE
सुप्रीम
कोर्ट:
हम
कंज्यूमर
अफेयर्स
मिनिस्ट्री,
सूचना
प्रसारण
मंत्रालय
से
जवाब
मांग
रहे
हैं।
पूरे
देश
के
लाइसेंसिंग
अधिकारियों
को
भी
इस
मामले
में
पार्टी
बनाया
जाए,
उन्हें
भी
कुछ
सवालों
के
जवाब
देने
होंगे।
आपके
वकील
कह
रहे
हैं
कि
माफीनामा
सिर्फ
अखबारों
में
कल
पब्लिश
किया
गया।
ये
माफीनामा
सही
नहीं
है।
ये
विज्ञापन
रिकॉर्ड
में
नहीं
है।
इन्हें
इकट्ठा
करो
और
दिन
में
याचिकाकर्ताओं
को
भेजिए।
इसके
अलावा
भी
विज्ञापन
प्रकाशित
किए
जाएं,
जिसमें
कहा
गया
हो
कि
उनकी
ओर
से
गलती
हुई
है।
06:06
AM23
अप्रैल
2024
-
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कोर्ट
रूम
LIVE
जस्टिस
हिमा
कोहली:
आपको
हमें
यह
बताना
होगा
कि
एडवर्टाइजिंग
काउंसिल
ने
ऐसे
विज्ञापन
रोकने
के
लिए
क्या
किया।
आपके
सदस्य
भी
ऐसे
प्रोडक्ट्स
का
प्रचार
कर
रहे
हैं।
आपके
सदस्य
दवाओं
की
सलाह
दे
रहे
हैं।
हमने
जिस
तरह
की
कवरेज
देखी
है,
उसके
बाद
हम
सिर्फ
आपको
नहीं
देख
रहे
हैं।
हम
महिलाओं,
बच्चों,
नवजातों
को
भी
देख
रहे
हैं।
किसी
के
साथ
भी
धोखा
नहीं
किया
जा
सकता
है।
इस
मसले
पर
केंद्र
नींद
से
जाग
जाए।
06:04
AM23
अप्रैल
2024
-
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कोर्ट
रूम
LIVE
जस्टिस
अमानतुल्लाह:
क्या
आप
किसी
कानून
पर
रोक
लगा
सकते
हैं,
जब
यह
लागू
हो।
ऐसे
में
यह
सत्ता
का
अच्छा
इस्तेमाल
नही
हैं।
ये
कानून
का
उल्लंघन
है।
जस्टिस
हिमा
कोहली:
आप
अपना
स्टैंड
बदलना
चाहते
हैं।
नियम
था
कि
विज्ञापन
आप
चलाएंगे
और
अब
आप
कह
रहे
हैं
कि
इन
विज्ञापनों
को
आपकी
ओर
से
क्रॉस
चेकिंग
की
जरूरत
नहीं
है।
मिस्टर
पटवालिया
आपको
कंज्यूमर
अफेयर्स
मिनिस्ट्री
को
आरोपी
बनाना
था।
हमें
लगता
है
कि
अधिकारी
मुनाफा
देखने
में
ही
बहुत
व्यस्त
थे।
जस्टिस
अमानतुल्लाह:
एक
टीवी
न्यूज
भी
होती
है।
जिसमें
एंकर
बता
रहा
होता
है
कि
आज
कोर्ट
में
क्या
हुआ।
साथ
ही
विज्ञापन
भी
चल
रहा
होता
है।
जस्टिस
हिमा
कोहली:
केंद्र
ने
खाली
गलतियां
ढूंढीं
और
राज्यों
को
बता
दीं।
केंद्र
ने
खुद
क्या
किया?
जस्टिस
अमानतुल्लाह:
केंद्र
हमें
बताए
कि
दूसरी
कंपनियों
को
लेकर
क्या
कदम
उठाए
हैं?
06:03
AM23
अप्रैल
2024
-
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कोर्ट
रूम
LIVE
सुप्रीम
कोर्ट:
आयुष
मंत्रालय
ने
सभी
राज्यों
को
रूल
170
के
संबंध
में
पत्र
भेजा
था
और
अब
आप
इस
रूल
को
वापस
लेना
चाहते
हैं।
मंत्री
ने
संसद
में
बताया
था
कि
इस
तरह
के
विज्ञापन
को
लेकर
कदम
उठाए
गए
हैं
और
अब
आप
कह
रहे
हैं
कि
रूल
170
को
लागू
नहीं
किया
गया।
05:55
AM23
अप्रैल
2024
-
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लिंक
कोर्ट
रूम
LIVE
वरिष्ठ
वकील
पीएस
पटवालिया:
इनमें
से
किसी
एक
ने
मुझे
अखबार
की
कटिंग
भेजी
है।
इसमें
इनका
माफीनामा
दिखाई
दे
रहा
है।
जस्टिस
हिमा
कोहली:
हमें
पहले
एप्लीकेशन
देखने
दीजिए।
भारत
सरकार
की
ओर
से
कौन
है?
मिस्टर
नटराज
प्लीज
अपना
कैमरा
ऑन
कर
लीजिए।
05:55
AM23
अप्रैल
2024
-
कॉपी
लिंक
कोर्ट
रूम
LIVE
जस्टिस
हिमा
कोहली:
एक
और
याचिका
है।
इसमें
कहा
जा
रहा
है
कि
हम
इंडियन
मेडिकल
एसोसिएशन
पर
ये
शिकायत
दाखिल
करने
के
लिए
1000
करोड़
जुर्माना
लगाएं।
ऐसा
लगता
है
कि
ये
आपकी
तरफ
से
लगाई
गई
है
मिस्टर
रोहतगी।
मुकुल
रोहतगी:
मेरा
इससे
कोई
लेना-देना
नहीं
है।
सुप्रीम
कोर्ट:
हम
इस
एप्लीकेशन
की
टाइमिंग
को
लेकर
चकित
हैं।
ये
इंटरवेंशन
की
जगह
इंटरलोपर
(अनाधिकार
प्रवेश
करने
वाला
व्यक्ति)
याचिका
लग
रही
है।
हमें
यह
याचिका
देखने
दीजिए
और
फिर
जुर्माने
पर
आएंगे।
05:48
AM23
अप्रैल
2024
-
कॉपी
लिंक
कोर्ट
रूम
LIVE
रामदेव
और
पतंजलि
की
ओर
से
एडवोकेट
मुकुल
रोहतगी:
हमने
माफीनामा
फाइल
कर
दिया
है।
जस्टिस
हिमा
कोहली:
इसे
कल
क्यों
दाखिल
किया।
हम
इस
वक्त
ये
बंडल
नहीं
देख
सकते
हैं।
इसे
बहुत
पहले
भेज
देना
था।
जस्टिस
अमानतुल्लाह:
इसे
पब्लिश
कहां
किया
है?
रोहतगी:
67
अखबारों
में
पब्लिश
किया।
जस्टिस
हिमा
कोहली:
आपके
विज्ञापन
जैसे
रहते
थे,
वही
साइज
था
इस
ऐड
का
भी?
रोहतगी:
नहीं,
इसमें
बहुत
पैसा
खर्च
होता
है।
लाखों
रुपए
खर्च
होते
हैं।
जस्टिस
हिमा
कोहली:
ठीक
है।
05:14
AM23
अप्रैल
2024
-
कॉपी
लिंक
इंडियन
मेडिकल
एसोसिएशन
ने
पतंजलि
के
खिलाफ
याचिका
लगाई
है
सुप्रीम
कोर्ट
इंडियन
मेडिकल
एसोसिएशन
(IMA)
की
ओर
से
17
अगस्त
2022
को
दायर
की
गई
याचिका
पर
सुनवाई
कर
रही
है।
इसमें
कहा
गया
है
कि
पतंजलि
ने
कोविड
वैक्सीनेशन
और
एलोपैथी
के
खिलाफ
निगेटिव
प्रचार
किया।
वहीं
खुद
की
आयुर्वेदिक
दवाओं
से
कुछ
बीमारियों
के
इलाज
का
झूठा
दावा
किया।
-
IMA
का
तर्क
था
कि
हर
कंपनी
को
अपने
प्रोडक्ट्स
का
प्रचार
करने
का
हक
है,
लेकिन
पतंजलि
के
दावे
‘ड्रग्स
एंड
अदर
मैजिक
रेमेडीज
एक्ट
1954’
और
‘कंज्यूमर
प्रोटेक्शन
एक्ट
2019’
का
सीधा
उल्लंघन
करते
हैं। -
IMA
ने
एलोपैथी
और
आधुनिक
चिकित्सा
प्रणाली
(मॉडर्न
सिस्टम
ऑफ
मेडिसिन)
के
बारे
में
फैलाई
जा
रहीं
गलत
सूचनाओं
पर
चिंता
जताई।
याचिका
में
कहा
गया
कि
पतंजलि
के
भ्रामक
विज्ञापन
एलोपैथी
की
निंदा
करते
हैं
और
कई
बीमारियों
के
इलाज
के
बारे
में
झूठे
दावे
करते
हैं। -
IMA
ने
केंद्र
सरकार,
ऐडवर्टाइजिंग
स्टैंडर्ड्स
काउंसिल
ऑफ
इंडिया
(ASCI)
और
सेंट्रल
कंज्यूमर
प्रोटेक्शन
अथॉरिटी
ऑफ
इंडिया
(CCPA)
से
मांग
की
थी
कि
आयुष
चिकित्सा
प्रणाली
को
बढ़ावा
देने
के
लिए
एलोपैथी
को
अपमानित
करने
वाले
विज्ञापनों
के
खिलाफ
कार्रवाई
की
जाए। -
याचिका
में
बाबा
रामदेव
के
दिए
कुछ
विवादास्पद
बयानों
का
भी
जिक्र
किया
गया।
मसलन,
एलोपैथी
को
‘बेवकूफ
और
दिवालिया
बनाने
वाला
विज्ञान’
बताना,
कोविड-19
की
दूसरी
लहर
के
दौरान
एलोपैथिक
दवाओं
के
इस्तेमाल
से
लोगों
की
मौत
का
दावा
करना
वगैरह। -
IMA
ने
यह
भी
आरोप
लगाए
कि
पतंजलि
ने
कोविड
की
वैक्सीन
के
बारे
में
अफवाह
फैलाई,
जिससे
लोगों
में
वैक्सीन
लगवाने
को
लेकर
डर
पैदा
हो
गया।
याचिका
में
ये
भी
कहा
गया
कि
पतंजलि
ने
कोरोना
के
दौरान
ऑक्सीजन
सिलेंडर
की
तलाश
कर
रहे
युवाओं
का
उपहास
उड़ाया।
आयुष
मंत्रालय
ने
ASCI
के
साथ
एक
समझौता
किया
है,
इसके
बावजूद
पतंजलि
ने
निर्देशों
का
उल्लंघन
किया।
05:12
AM23
अप्रैल
2024
-
कॉपी
लिंक
पतंजलि
ने
2
और
9
अप्रैल
को
भी
माफी
मांगी,
कोर्ट
ने
कहा-
ये
सिर्फ
खानापूर्ति
है
बाबा
रामदेव
की
तरफ
से
2
अप्रैल
को
जस्टिस
हिमा
कोहली
और
जस्टिस
अमानतुल्लाह
की
बेंच
में
माफीनामा
दिया
गया
था।
बेंच
ने
पतंजलि
को
फटकार
लगाते
हुए
कहा
था
कि
ये
माफीनामा
सिर्फ
खानापूर्ति
के
लिए
है।
आपके
अंदर
माफी
का
भाव
नहीं
दिख
रहा।
इसके
बाद
कोर्ट
ने
10
अप्रैल
को
सुनवाई
की
तारीख
तय
की
थी।
10
अप्रैल
की
सुनवाई
से
ठीक
एक
दिन
पहले
(9
अप्रैल
को)
बाबा
रामदेव
और
पतंजलि
आयुर्वेद
के
मैनेजिंग
डायरेक्टर
आचार्य
बालकृष्ण
ने
नया
एफिडेविट
फाइल
किया।
इसमें
पतंजलि
ने
बिना
शर्त
माफी
मांगते
हुए
कहा
कि
इस
गलती
पर
उन्हें
खेद
है
और
ऐसा
दोबारा
नहीं
होगा।

05:10
AM23
अप्रैल
2024
-
कॉपी
लिंक
पतंजलि
पर
दो
आरोप

05:10
AM23
अप्रैल
2024
-
कॉपी
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पतंजलि
से
जुड़े
अन्य
विवाद…
-
कोरोना
के
अलावा
रामदेव
बाबा
कई
बार
योग
और
पतंजलि
के
प्रोडक्ट्स
से
कैंसर,
एड्स
और
होमोसेक्सुअलिटी
तक
ठीक
करने
के
दावे
को
लेकर
विवादों
में
रहे
हैं। -
2018
में
भी
FSSAI
ने
पतंजलि
को
मेडिसिनल
प्रोडक्ट
गिलोय
घनवटी
पर
एक
महीने
आगे
की
मैन्युफैक्चरिंग
डेट
लिखने
के
लिए
फटकार
लगाई
थी। -
2015
में
कंपनी
ने
इंस्टेंट
आटा
नूडल्स
लॉन्च
करने
से
पहले
फूड
सेफ्टी
एंड
रेगुलेरिटी
अथॉरिटी
ऑफ
इंडिया
(FSSAI)
से
लाइसेंस
नहीं
लिया
था।
इसके
बाद
पतंजलि
को
फूड
सेफ्टी
के
नियम
तोड़ने
के
लिए
लीगल
नोटिस
का
सामना
करना
पड़ा
था। -
2015
में
कैन्टीन
स्टोर्स
डिपार्टमेंट
ने
पतंजलि
के
आंवला
जूस
को
पीने
के
लिए
अनफिट
बताया
था।
इसके
बाद
CSD
ने
अपने
सारे
स्टोर्स
से
आंवला
जूस
हटा
दिया
था।
2015
में
ही
हरिद्वार
में
लोगों
ने
पतंजलि
घी
में
फंगस
और
अशुद्धियां
मिलने
की
शिकायत
की
थी।
खबरें
और
भी
हैं…