मंडे मेगा स्टोरी- एलोपैथी को ‘स्टुपिड साइंस’ बताने वाले रामदेव: कोर्ट में हाथ बांधे डांट क्यों सुनते रहे; 10 साल में 70 गुना टर्नओवर बढ़ा

मंडे मेगा स्टोरी- एलोपैथी को ‘स्टुपिड साइंस’ बताने वाले रामदेव: कोर्ट में हाथ बांधे डांट क्यों सुनते रहे; 10 साल में 70 गुना टर्नओवर बढ़ा


9
मिनट
पहले
लेखक:
आदित्य
द्विवेदी

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सीन-1:

मई
2021
की
बात
है।
बड़े
से
हॉल
में
सैकड़ों
लोग
जमीन
पर
मास्क
लगाकर
बैठे
हैं।
सामने
मंच
लगा
हुआ
है।
मंच
पर
बैठे
बाबा
रामदेव
बोलना
शुरू
करते
हैं।

रामदेव कहते हैं, 'एलोपैथी एक ऐसी स्टुपिड और दिवालिया साइंस है। पहले क्लोरोक्वीन फेल हुई, फिर स्टेरॉयड फेल हो गए, प्लाज्मा थेरेपी पर बैन लग गया। बुखार की कोई दवाई कोरोना पर काम नहीं कर रही। लाखों लोगों की मौत एलोपैथी की दवा खाने से हुई है।'


रामदेव
कहते
हैं,
‘एलोपैथी
एक
ऐसी
स्टुपिड
और
दिवालिया
साइंस
है।
पहले
क्लोरोक्वीन
फेल
हुई,
फिर
स्टेरॉयड
फेल
हो
गए,
प्लाज्मा
थेरेपी
पर
बैन
लग
गया।
बुखार
की
कोई
दवाई
कोरोना
पर
काम
नहीं
कर
रही।
लाखों
लोगों
की
मौत
एलोपैथी
की
दवा
खाने
से
हुई
है।’


सीन-2:

21
नवंबर
2023
यानी
करीब
ढाई
साल
बाद।
सुप्रीम
कोर्ट
में
जस्टिस
अमानुल्लाह
और
जस्टिस
प्रशांत
कुमार
मिश्र
की
बेंच
ने
कहा
कि
पतंजलि
को
भ्रामक
दावों
वाले
विज्ञापन
तुरंत
बंद
करने
होंगे।
अन्यथा
हर
झूठे
विज्ञापन
पर
एक
करोड़
रुपए
का
जुर्माना
लगाया
जाएगा।
पतंजलि
के
वकील
ने
कोर्ट
में
आश्वासन
दिया
था
कि
अब
ऐसे
विज्ञापन
जारी
नहीं
किए
जाएंगे।

सीन-3:
सुप्रीम
कोर्ट
के
आदेश
के
अगले
ही
दिन
यानी
22
नवंबर