5
घंटे
पहलेलेखक:
शिवेंद्र
गौरव,
शुभांक
शुक्ला
-
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ये
BJP
के
साल
2019
के
वादों
की
पड़ताल
की
दूसरी
कड़ी
है…
BJP
ने
2019
के
50
पेज
के
घोषणापत्र
में
राष्ट्रीय
सुरक्षा
और
विदेश
नीति
से
जुड़े
9
प्रमुख
वादे
किए
थे,
जिनमें
से
6
वादे
पूरे
हुए
हैं,
जबकि
3
अधूरे
हैं।
इस
तरह
BJP
का
स्ट्राइक
रेट
करीब
66%
है।
अधूरे
वादों
में
से
दो
वादे
सीमा
सुरक्षा
से
जुड़े
हुए
हैं।
इससे
साफ
है
कि
घुसपैठ
और
सीमा
सुरक्षा
से
जुड़ी
चुनौतियां
अभी
भी
हैं।
इस
रिपोर्ट
में
राष्ट्रीय
सुरक्षा
और
विदेश
नीति
से
जुड़े
सभी
प्रमुख
वादों
की
हालिया
स्थिति
जानेंगे…
वादा-1:
आतंकवाद
पर
जीरो
टॉलरेंस
की
नीति
जारी
रखेंगे
देश
से
आतंकवाद
को
खत्म
करने
के
लिए
जीरो
टॉलरेंस
के
अपने
वादे
पर
BJP
खरी
उतरी
है।
-
गृह
मंत्रालय
ने
19
दिसंबर
2023
को
जम्मू-कश्मीर
से
जुड़ा
डेटा
जारी
करके
बताया
था
कि
आतंकवाद
पर
जीरो
टॉलरेंस
की
नीति
से
आतंकी
घटनाएं
कम
हुई
हैं।
साल
2018
में
228
आतंकी
घटनाएं
हुई
थीं,
जो
2023
में
घटकर
43
हो
गईं। -
इसी
तरह
जम्मू-कश्मीर
में
आतंकियों
के
साथ
होने
वाले
एनकाउंटर
में
कमी
आई
है।
साल
2018
में
इनकी
संख्या
189
थी,
जो
2023
में
घटकर
48
हो
गई। -
हालांकि,
अभी
भी
जम्मू-कश्मीर
में
आतंकी
घटनाओं
या
आतंकवादियों
से
मुठभेड़
की
खबरें
आती
रहती
हैं,
लेकिन
BJP
ने
देश
और
देश
के
बाहर
आतंकवाद
से
जुड़ी
किसी
भी
तरह
की
घटना
पर
अपना
रुख
जीरो
टॉलरेंस
का
रखा
है।
वादा-2:
रक्षा
उपकरणों
की
खरीद
तेज
करेंगे
BJP
ने
हथियारों
की
खरीद
तेज
करने
का
अपना
वादा
पूरा
किया
है।
मेक
इन
इंडिया
पॉलिसी
के
तहत
निगेटिव
इम्पोर्ट
(विदेशों
से
हथियारों
की
खरीद
कम
करना)
की
लिस्ट
में
इजाफा
हुआ
है,
लेकिन
आंकड़े
बताते
हैं
कि
भारत
अभी
भी
बड़ी
तादाद
में
विदेशी
हथियारों
की
खरीद
करता
है।
-
केंद्र
ने
साल
2014-17
और
2017-22
के
बीच
सैन्य
उपकरणों
की
खरीद
को
लेकर
दो
डेटा
जारी
किए
हैं। -
फरवरी
2023
में
लोकसभा
में
रक्षा
राज्य
मंत्री
अजय
भट्ट
ने
बताया
कि
साल
2017
से
2022
के
बीच
1.93
लाख
करोड़
रुपए
के
सैन्य
उपकरण
विदेशों
से
खरीदे
गए।
भारत
की
कंपनियों
से
कितने
रुपए
के
उपकरण
खरीदे
गए,
इसकी
जानकारी
नहीं
दी
गई। -
वहीं,
साल
2014
से
2017
के
बीच
देश
और
विदेश
से
2.42
लाख
करोड़
रुपए
के
सैन्य
उपकरण
खरीदे
गए
थे। -
सरकार
ने
डिफेंस
सेक्टर
का
बजट
भी
बढ़ाया
है।
साल
2024-25
के
लिए
6.21
लाख
करोड़
रुपए
का
बजट
रखा
गया
है,
जबकि
साल
2019-20
में
यह
बजट
3.18
लाख
करोड़
रुपए
का
था।
वादा-
3:
सभी
सीमाओं
पर
अवैध
घुसपैठ
रोकने
के
लिए
स्मार्ट
फेंसिंग
करेंगे
BJP
का
यह
वादा
अभी
अधूरा
है।
-
भारत
की
जमीनी
सीमाएं
7
देशों
से
लगती
हैं।
इनमें
अफगानिस्तान,
पाकिस्तान,
भूटान
,नेपाल,
चीन,
म्यांमार
और
बांग्लादेश
शामिल
हैं।
भारत
इन
देशों
के
साथ
कुल
15,106.7
किलोमीटर
की
जमीनी
सीमा
साझा
करता
है। -
केंद्र
सरकार
ने
पहली
बार
साल
2018
में
भारत-पाकिस्तान
सीमा
पर
स्मार्ट
फेंसिंग
का
काम
शुरू
किया
था। -
इसके
बाद
जनवरी
2024
में
भारत-म्यांमार
सीमा
पर
भी
स्मार्ट
फेंसिंग
का
काम
शुरू
हुआ,
लेकिन
कुल
जमीनी
सीमा
में
से
अब
तक
केवल
5223
किलोमीटर
पर
ही
बाड़ेबंदी
का
काम
पूरा
हुआ
है।
वादा-
4:
वामपंथी
उग्रवाद
को
कम
करने
के
लिए
सख्त
कदम
देश
में
वामपंथी
उग्रवाद
प्रभावित
जिलों
की
संख्या
घटी
है।
आंकड़े
बताते
हैं
कि
BJP
ने
अपना
ये
वादा
पूरा
किया
है।
-
गृह
मंत्रालय
के
मुताबिक,
वामपंथी
उग्रवाद
से
प्रभावित
राज्यों
में
विकास
के
लिए
साल
2018
से
2023
के
बीच
4,931
करोड़
रुपए
जारी
किए
गए।
इस
राशि
से
राज्यों
में
13,620
किलोमीटर
की
सड़कों
का
निर्माण
किया
गया। -
टेलिकॉम
कनेक्टिविटी
में
सुधार
के
लिए
13,823
टावरों
की
मंजूरी
दी
गई,
जिनमें
से
3700
से
ज्यादा
टावर
चालू
हो
चुके
हैं। -
वामपंथी
उग्रवाद
से
प्रभावित
जिलों
में
4,903
नए
डाकघर
खोले
गए। -
30
सबसे
ज्यादा
वामपंथी
उग्रवाद
प्रभावित
जिलों
में
अप्रैल
2015
से
2023
के
बीच
955
बैंक
और
839
ATM
खोले
गए। -
23
फरवरी
2024
को
गृहमंत्री
अमित
शाह
ने
दावा
किया
कि
देश
में
2004-14
और
2014-23
के
बीच
वामपंथी
उग्रवाद
से
जुड़ी
हिंसा
में
52%
और
मौतों
की
संख्या
में
69%
की
गिरावट
आई
है।
गृह
मंत्रालय
के
मुताबिक,
उग्रवादी
घटनाएं
14,862
से
घटकर
7,128
हो
गईं।
इनसे
होने
वाली
मौतें
6,035
से
घटकर
1,868
हो
गईं। -
देश
में
वामपंथी
उग्रवाद
प्रभावित
जिलों
की
संख्या
घट
गई
है।
10
राज्यों
के
72
जिलों
से
घटकर
ये
संख्या
58
रह
गई
है।
वादा-
5:
2024
तक
14
नए
इंटीग्रेटेड
चेक
पोस्ट
का
निर्माण
इंटीग्रेटेड
चेक
पोस्ट
(ICP)
का
उद्देश्य
अंतरराष्ट्रीय
सीमाओं
पर
बेहतर
सुरक्षा
सुधार
के
साथ-साथ
पड़ोसी
देशों
के
साथ
द्विपक्षीय
व्यापार
और
संबंध
बेहतर
करना
होता
है।
2024
तक
नए
14
ICP
का
BJP
का
वादा
अभी
अधूरा
है।
-
6
फरवरी
2019
को
गृह
मंत्रालय
ने
एक
प्रेस
रिलीज
जारी
कर
कहा
कि
उत्तर
प्रदेश
और
असम
में
ICP
स्थापित
करने
को
मंजूरी
दे
दी
गई
है।
इसके
अलावा
10
और
जगहों
पर
ICP
बनाने
के
लिए
‘सैद्धांतिक
रूप
से’
मंजूरी
दी
गई
है। -
27
जुलाई
2022
को
गृह
मंत्रालय
ने
एक
प्रेस
रिलीज
जारी
कर
बताया
कि
देश
में
साल
2012
से
2020
तक
9
इंटीग्रेटेड
चेक
पोस्ट
बनाए
गए
और
ये
अभी
सक्रिय
हैं। -
नवंबर
2023
में
इंडियन
एक्सप्रेस
की
एक
रिपोर्ट
के
मुताबिक,
साल
2022-23
के
लिए
गृह
मंत्रालय
की
सालाना
रिपोर्ट
में
बताया
गया
कि
ICP
शुरू
करने
के
लिए
केंद्र
सरकार
ने
बांग्लादेश,
नेपाल
और
भूटान
के
साथ
भारत
की
जमीनी
सीमाओं
पर
कुल
14
जगहों
की
पहचान
की
है।
ये
जगहें
उत्तर-प्रदेश,
उत्तराखंड,
बिहार
और
पश्चिम
बंगाल
के
सीमाई
इलाकों
में
हैं।
इनमें
से
कई
चेक
पोस्ट्स
पर
काम
लगभग
पूरा
हो
गया
है,
वहीं
कुछ
चेक
पोस्ट्स
का
काम
संतोषजनक
नहीं
है।
गृह
मंत्रालय
ने
अपनी
रिपोर्ट
में
ये
भी
कहा
कि
पश्चिम
बंगाल
सरकार
ने
अभी
तक
सात
ICP
के
लिए
भूमि
अधिग्रहण
की
प्रक्रिया
शुरू
नहीं
की
है। -
ICP
का
संचालन
लैंड
पोर्ट्स
अथॉरिटी
ऑफ
इंडिया
(LPAI)
द्वारा
किया
जाता
है।
ये
ऑर्गनाइजेशन
गृह
मंत्रालय
के
तहत
आता
है।
साल
2021
में
LPAI
ने
कहा
था
कि
साल
2025
तक
भारत
की
जमीनी
सीमाओं
पर
24
ICP
होंगे।
वादा-
6:
बहुपक्षीय
सहयोग
को
बढ़ावा
BJP
ने
अपना
यह
वादा
पूरा
किया
है।
-
संयुक्त
राष्ट्र,
G20,
ब्रिक्स,
SCO
जैसे
मंचों
पर
भारत
ने
मजबूती
से
आतंकवाद
जैसी
वैश्विक
समस्याओं
को
लेकर
आपसी
सहयोग
की
वकालत
की
है। -
नेबरहुड
फर्स्ट
जैसी
पॉलिसी
के
तहत
भारत
ने
पड़ोसी
देशों
से
संबंध
बेहतर
करने
की
कोशिश
की
है। -
साल
2023
में
भारत
ने
G-20
और
SCO
(शंघाई
कॉर्पोरेशन
ऑर्गनाइजेशन)
जैसे
वैश्विक
मंचों
की
अध्यक्षता
की।
दिसंबर
2022
में
भारत
ने
दूसरी
बार
USNC
की
मासिक
अध्यक्षता
की। -
बहुपक्षीय
सहयोग
को
बढ़ावा
देने
की
भारत
की
कोशिशों
की
सराहना
अंतर्राष्ट्रीय
मंचों
पर
भी
की
गई
है।
वादा-
7:
वैश्विक
मंचों
पर
आतंकवाद
के
खिलाफ
लड़ाई,
अंतर्राष्ट्रीय
आतंकवाद
विरोधी
मंच
बनाने
के
लिए
कार्य
आतंकवाद
के
मुद्दे
पर
दुनिया
भर
के
देशों
को
एक
मंच
पर
लाने
की
BJP
सरकार
की
कोशिश
का
वादा
संतोषजनक
कहा
जा
सकता
है।
-
अंतर्राष्ट्रीय
स्तर
पर
कोई
नया
आतंकवाद
विरोधी
मंच
नहीं
बना
है,
हालांकि
भारत
का
रवैया
वैश्विक
आतंकवाद
के
हर
स्वरूप
के
खिलाफ
रहा
है। -
2022
में
भारत
ने
संयुक्त
राष्ट्र
सुरक्षा
परिषद्
की
आतंकवाद
विरोधी
समिति
की
मेजबानी
की।
इस
बैठक
में
‘दिल्ली
घोषणा
पत्र’
के
दस्तावेज
को
सभी
सदस्य
देशों
ने
अपनाया।
इसमें
मुख्य
तौर
पर
ड्रोन,
सोशल
मीडिया
और
ऑनलाइन
माध्यमों
से
होने
वाले
आतंकवाद
को
रोकने
की
बात
कही
गई
थी। -
दुनिया
के
अलग-अलग
हिस्सों
में
हुई
आतंकवाद
की
किसी
भी
घटना
की
भारत
ने
सख्त
निंदा
की
है। -
बीते
कुछ
सालों
में
दुनिया
भर
में
हुई
आतंकवाद
की
घटनाओं
के
बीच
फंसे
भारतीयों
को
सुरक्षित
निकालकर
वापस
लाया
गया
है।
वादा-
8:
संयुक्त
राष्ट्र
सुरक्षा
परिषद
की
स्थायी
सदस्यता
प्राप्त
करने
का
प्रयास
BJP
का
संयुक्त
राष्ट्र
सुरक्षा
परिषद
(UNSC)
की
स्थायी
सदस्यता
पाने
के
प्रयास
का
यह
वादा
पूरा
हुआ
माना
जा
सकता
है।
-
भारत
अब
तक
UNSC
की
स्थायी
सदस्यता
नहीं
ले
पाया
है,
लेकिन
इसके
लिए
भारत
लगातार
प्रयास
करता
रहा
है।
अमेरिका
और
रूस
जैसे
देश
भी
कहते
रहे
हैं
कि
भारत
को
UNSC
की
स्थायी
सदस्यता
मिलनी
चाहिए। -
2
अप्रैल
2024
को
विदेश
मंत्री
एस
जयशंकर
ने
कहा,
‘भारत
को
UNSC
की
स्थायी
सदस्यता
जरूर
मिलेगी,
क्योंकि
दुनिया
में
यह
भाव
है
कि
उसे
सदस्यता
मिलनी
चाहिए,
लेकिन
देश
को
इसके
लिए
और
ज्यादा
मेहनत
करनी
होगी।’
वादा-
9:
अंतर्राष्ट्रीय
अंतरिक्ष
प्रौद्योगिकी
समूह
का
प्रयास
भारत
ने
कई
मंचों
पर
अंतरिक्ष
से
जुड़े
मामलों
पर
एकजुट
होकर
एक
समूह
बनाने
की
बात
कही
है,
लेकिन
अभी
यह
प्रयास
अधूरा
है।
-
भारत
पहले
से
ही
इंटरनेशनल
स्पेस
एक्सप्लोरेशन
कोआर्डिनेशन
ग्रुप
(ISECG)
का
सदस्य
है।
भारत
ने
कई
अंतर्राष्ट्रीय
मंचों
पर
स्पेस
रिसर्च
और
स्पेस
के
कॉमर्शियल
यूज
को
लेकर
एक
नियामक
संस्था
बनाने
की
बात
कही
है। -
भारतीय
स्पेस
एजेंसी
इसरो
के
बैनर
तले
भारत
की
अंतरिक्ष
अनुसंधान
के
क्षेत्र
में
उपलब्धियां
बढ़ी
हैं।
इसरो
ने
चंद्रयान-3
मिशन
की
सफलता
के
साथ
वैश्विक
स्तर
पर
एक
समृद्ध
स्पेस
एजेंसी
का
गौरव
हासिल
किया
है। -
भारत
ने
स्पेस
रिसर्च
के
क्षेत्र
में
अंतर्राष्ट्रीय
सहयोग
को
भी
बढ़ावा
दिया
है।
इसरो
कई
स्पेस
मिशन
के
लिए
विदेशी
एजेंसियों
के
साथ
तकनीक
का
आदान-प्रदान
करता
है।
विदेश
नीति
और
राष्ट्रीय
सुरक्षा
से
जुड़े
वादों
और
उनको
लेकर
BJP
सरकार
की
कोशिशों
को
समझने
के
लिए
हमने
आंतरिक
सुरक्षा
के
मामलों
के
जानकार
प्रोफेसर
हर्ष
पंत
से
बात
की।
उन्होंने
बताया
कि…
-
बीते
5-6
सालों
में
सरकार
आतंकवाद
पर
नियंत्रण
करने
में
सक्षम
रही
है।
पाकिस्तान
से
कोई
बातचीत
न
करके
उसने
आतंकवाद
पर
अपनी
जीरो
टॉलरेंस
की
नीति
कायम
रखी
है। -
रक्षा
क्षेत्र
में
हमारा
निर्यात
भी
बढ़ा
है।
डिफेंस
सेक्टर
का
बजट
और
बढ़ाए
जाने
की
जरूरत
है,
लेकिन
अगर
UPA
सरकार
से
तुलना
करेंगे
तो
बजट
में
काफी
सुधार
हुआ
है।
इस
समय
रक्षा
क्षेत्र
का
कोई
प्रोजेक्ट
नहीं
अटका
है।
सेना
को
जरूरत
के
हथियार
मुहैया
हो
रहे
हैं,
लेकिन
एक
पहलू
यह
भी
है
कि
हथियारों
की
खरीद
होने
के
बाद
सेना
को
हथियार
मिलने
की
प्रक्रिया
लंबी
होती
है। -
जमीनी
सीमाओं
पर
बाड़ेबंदी
आसान
नहीं
होती,
क्योंकि
दो
देशों
के
बीच
फेंसिंग
को
नकारात्मक
नजरिए
से
देखा
जाता
है।
इसके
लिए
पड़ोसी
देशों
को
भी
भरोसे
में
लेना
होता
है।
म्यांमार
और
बांग्लादेश
की
सीमा
पर
फेंसिंग
में
ऐसी
ही
रुकावटों
का
सामना
करना
पड़ा
है। -
वामपंथी
उग्रवाद
से
प्रभावित
इलाकों
में
विकास
के
लिए
कई
प्रोजेक्ट
शुरू
किए
गए
हैं।
सरकार
ने
नॉर्थ-ईस्ट
को
मुख्यधारा
से
जोड़ने
की
कोशिश
की
है।
इसका
सकारात्मक
नतीजा
भी
देखने
को
मिला
है।
हाल
ही
में
उल्फा
जैसे
कई
उग्रवादी
संगठनों
के
साथ
डील
की
गई
हैं।
विदेश
नीति
से
जुड़े
मामलों
के
जानकार
प्रोफेसर
राजन
कुमार
कहते
हैं
कि…
-
सरकार
ने
बहुत
सक्रियता
से
बहुपक्षीय
सहयोग
बढ़ाने
की
दिशा
में
काम
किया
है।
G-20
में
शामिल
देश,
इसकी
मेजबानी
को
उतनी
गंभीरता
से
नहीं
लेते
थे,
लेकिन
जिस
सफलता
से
BJP
सरकार
ने
इसकी
मेजबानी
की,
यह
कई
देशों
के
लिए
नई
बात
थी।
ब्रिक्स
के
कार्यक्रम,
संयुक्त
राष्ट्र
संघ
में
सुधार
की
आवश्यकता
पर
भारत
ने
मजबूती
से
अपना
पक्ष
रखा
है। -
आतंकवाद
को
लेकर
अंतर्राष्ट्रीय
स्तर
पर
कोई
एक
परिभाषा
नहीं
है।
आतंकवाद
को
लेकर
दुनिया
भर
के
देशों
में
आम
सहमति
नहीं
है।
इसलिए
आतंकवाद
को
लेकर
कोई
संस्थागत
फोरम
बना
पाना
बहुत
मुश्किल
है। -
BJP
की
सरकार
आने
से
पहले
भी
भारत
ने
लगातार
UNSC
की
स्थायी
सदस्यता
पाने
का
प्रयास
किया
है,
लेकिन
इन
प्रयासों
की
एक
सीमा
है।
चीन
भारत
की
सदस्यता
का
विरोध
करता
है।
जब
तक
UNSC
में
सुधार
नहीं
होते,
भारत
को
UNSC
की
स्थायी
सदस्यता
मिलना
मुश्किल
है। -
रिसर्च
के
अलावा
अब
स्पेस
व्यापार
का
अड्डा
भी
बन
गया
है।
इसलिए
स्पेस
वॉर,
स्पेस
का
कॉमर्शियलाइजेशन
और
स्पेस
का
कचरा
कुछ
ऐसे
मुद्दे
हैं
जिनके
चलते
अब
एक
अंतर्राष्ट्रीय
नियामक
संस्था
की
जरूरत
है।
संयुक्त
राष्ट्र
के
तहत
इन
मुद्दों
पर
चर्चा
के
फोरम
तो
हैं,
लेकिन
कोई
संस्थागत
फोरम
या
नियामक
अभी
तक
नहीं
बना
है।
****
ये
खबर
भी
पढ़ें-
BJP
के
वादों
का
स्टेटस,
पार्ट-1:
राजनीतिक
एजेंडे
और
हिंदुत्व
से
जुड़े
54%
वादे
पूरे;
भ्रष्टाचार
रोकने
और
गंगा
सफाई
जैसे
वादे
अधूरे
खबरें
और
भी
हैं…