
दिल्ली
हाईकोर्ट
ने
7
जनवरी
को
कहा
कि
अगर
दुष्यंत
गौतम
के
खिलाफ
पोस्ट
डालने
वाले
खुद
इन्हें
नहीं
हटाते
हैं,
तो
गूगल,
मेटा
और
एक्स
जैसे
सोशल
मीडिया
प्लेटफॉर्म
इन्हें
हटाएंगे.

बीजेपी
के
राष्ट्रीय
महासचिव
दुष्यंत
कुमार
गौतम.
(Aaj
Tak)
अंकिता
भंडारी
केस
में
दिल्ली
हाई
कोर्ट
ने
बड़ा
आदेश
दिया
है.
कोर्ट
ने
7
जनवरी
को
कांग्रेस,
आम
आदमी
पार्टी
समेत
अन्य
लोगों
को
आदेश
दिया
कि
वे
सोशल
मीडिया
पर
डाले
गए
उन
पोस्ट्स
को
24
घंटे
के
भीतर
हटाएं,
जिनमें
बीजेपी
के
राष्ट्रीय
महासचिव
दुष्यंत
कुमार
गौतम
को
अंकिता
भंडारी
हत्याकांड
से
जोड़ा
गया
है.
बार
एंड
बेंच
की
रिपोर्ट
के
मुताबिक
जस्टिस
मिनी
पुष्कर्णा
ने
कहा
कि
अगर
पोस्ट
डालने
वाले
खुद
इन्हें
नहीं
हटाते
हैं,
तो
गूगल,
मेटा
और
एक्स
जैसे
सोशल
मीडिया
प्लेटफॉर्म
इन्हें
हटाएंगे.
अदालत
ने
यह
भी
आदेश
दिया
कि
कांग्रेस,
आम
आदमी
पार्टी
या
अन्य
प्रतिवादी
आगे
कोई
भी
ऐसा
कॉन्टेंट
पोस्ट
नहीं
करेंगे,
जिसमें
दुष्यंत
कुमार
गौतम
को
अंकिता
भंडारी
की
हत्या
से
जोड़ा
जाए.
यह
रोक
तब
तक
लागू
रहेगी,
जब
तक
गौतम
की
मानहानि
याचिका
पर
अदालत
का
अंतिम
फैसला
नहीं
आ
जाता.
कोर्ट
ने
कहा
कि
गौतम
के
खिलाफ
लगाए
गए
आरोप
प्रथम
दृष्टया
मानहानिकारक
हैं
और
उन्होंने
अंतरिम
निषेधाज्ञा
दिए
जाने
का
पर्याप्त
आधार
दिखाया
है.
अदालत
ने
यह
भी
कहा
कि
अगर
यह
कॉन्टेंट
नहीं
हटाया
गया,
तो
गौतम
की
छवि
को
नुकसान
होगा.
19
साल
की
रिसॉर्ट
रिसेप्शनिस्ट
अंकिता
भंडारी
की
हत्या
2022
में
की
गई
थी.
आरोप
था
कि
अंकिता
पर
एक
रिसॉर्ट
में
मेहमानों
को
सेक्शुअल
फेवर
देने
का
दबाव
बनाया
जा
रहा
था.
यह
रिसॉर्ट
पुलकित
आर्य
द्वारा
चलाया
जा
रहा
था,
जो
एक
पूर्व
बीजेपी
नेता
का
बेटा
है.
बाद
में
अंकिता
का
शव
नहर
से
बरामद
हुआ
था.
अदालत
ने
पुलकित
आर्य
और
दो
अन्य
आरोपियों
को
हत्या
का
दोषी
ठहराते
हुए
उम्रकैद
की
सजा
सुनाई
थी.
हाल
ही
में
इस
मामले
में
नया
विवाद
तब
खड़ा
हुआ,
जब
पूर्व
बीजेपी
विधायक
सुरेश
राठौड़
की
पत्नी
उर्मिला
सनावर
ने
आरोप
लगाया
कि
अंकिता
से
सेक्शुअल
फेवर
मांगने
वाला
“VIP”
कोई
वरिष्ठ
नेता
था.
सनावर
ने
एक
ऑडियो
क्लिप
जारी
की,
जिसमें
राठौड़
कथित
तौर
पर
उस
VIP
के
रूप
में
दुष्यंत
कुमार
गौतम
और
पार्टी
के
एक
अन्य
वरिष्ठ
नेता
का
नाम
लेते
सुनाई
दे
रहे
हैं.
इसके
बाद
सुरेश
राठौड़
ने
दावा
किया
कि
यह
ऑडियो
क्लिप
AI
से
बनाई
गई
है
और
उन्होंने
सनावर
पर
पार्टी
को
बदनाम
करने
का
आरोप
लगाया.
दुष्यंत
कुमार
गौतम
ने
भी
इन
आरोपों
को
सिरे
से
खारिज
किया.
अपनी
याचिका
में
गौतम
ने
कहा
कि
वीडियो
और
पोस्ट
24
दिसंबर
2025
से
सोशल
मीडिया
पर
फैलने
लगे
और
देखते
ही
देखते
वायरल
हो
गए.
याचिका
के
अनुसार,
यह
सामग्री
जानबूझकर
गढ़ी
गई
और
फैलाई
गई
ताकि
उन्हें
एक
ऐसे
आपराधिक
मामले
से
जोड़ा
जा
सके,
जिसमें
न
तो
उन्हें
आरोपी
बनाया
गया
है
और
न
ही
किसी
जांच
एजेंसी
ने
उनका
नाम
लिया
है.
गौतम
ने
अपनी
याचिका
में
कहा
कि
यह
पूरा
अभियान
फर्जी
खबरों
पर
आधारित
है,
जिसका
मकसद
राजनीतिक
फायदा
उठाना
और
उनकी
सार्वजनिक
छवि
को
गंभीर
नुकसान
पहुंचाना
है.
याचिका
में
यह
भी
बताया
गया
कि
उत्तराखंड
पुलिस
ने
अंकिता
भंडारी
मामले
से
जुड़ी
गलत
जानकारी
फैलाने
के
आरोप
में
उर्मिला
सनावर
और
सुरेश
राठौड़
के
खिलाफ
कई
FIR
दर्ज
की
हैं.
बीजेपी
नेता
के
मुताबिक,
विस्तृत
जांच
के
बावजूद
उनके
खिलाफ
इस
मामले
में
कोई
भी
सबूत
सामने
नहीं
आया
है.
गौतम
की
ओर
से
वरिष्ठ
अधिवक्ता
गौरव
भाटिया
अदालत
में
पेश
हुए.
उन्होंने
दलील
दी
कि
कांग्रेस
पार्टी
ने
प्रेस
कॉन्फ्रेंस
कर
गौतम
के
खिलाफ
आरोप
लगाए,
जिससे
उनकी
मानहानि
हुई.
उन्होंने
कहा
कि
कुछ
लोग
गौतम
को
“बलात्कारी”
तक
कह
रहे
हैं.
इन
आरोपों
को
सोशल
मीडिया
पर
बड़े
पैमाने
पर
फैलाया
गया,
जिससे
लाखों
लोगों
तक
यह
सामग्री
पहुंची.
भाटिया
ने
कहा
कि
यह
पोस्ट
और
वीडियो
इंटरनेट
पर
बने
रहने
से
बिना
किसी
आधार
के
गौतम
की
छवि
को
हर
सेकंड
नुकसान
पहुंच
रहा
है.
अगर
आरोप
लगाने
वालों
के
पास
कोई
ठोस
सबूत
होता,
तो
वे
संबंधित
एजेंसियों
में
शिकायत
दर्ज
करा
सकते
थे.
उन्होंने
यह
भी
कहा
कि
एक
राष्ट्रीय
राजनीतिक
पार्टी
को
किसी
की
प्रतिष्ठा
को
नुकसान
पहुंचाने
वाले
आरोप
लगाने
से
पहले
बेहद
सावधान
रहना
चाहिए.
वीडियो:
अंकिता
भंडारी
हत्याकांड
में
ऑडियो
क्लिप
में
किस
VIP
का
नाम,
CBI
जांच
में
BJP
नेता
क्या
बोले?

