Editor’s
Take:
घरेलू
शेयर
बाजार
एक
बेहद
नाजुक
मोड़
पर
खड़ा
है.
Nifty
50
एक
बार
फिर
अपनी
पुरानी
रेंज
के
बीच
में
लौट
आया
है
और
आने
वाले
कुछ
सेशन
यह
तय
करेंगे
कि
बाजार
संभलेगा
या
गिरावट
और
गहरी
होगी.
क्यों
25,700–25,750
सबसे
अहम?
अक्टूबर
में
24,611
के
स्तर
से
शुरू
हुई
रैली
निफ्टी
को
26,328
के
ऑल-टाइम
क्लोजिंग
हाई
तक
ले
गई.
यानी
क्लोज-टू-क्लोज
आधार
पर
करीब
1,717
अंकों
की
तेजी.
इस
रैली
का
33%
रिट्रेसमेंट
25,755
के
आसपास
बैठता
है,
वहीं
करीब
25,700
पर
निफ्टी
का
20-वीक
EMA
भी
है
और
यही
रेंज
का
निचला
सिरा
भी
माना
जा
रहा
है.
सीधा
मतलब,
अगर
यह
जोन
टूटता
है,
तो
25,470
और
उसके
बाद
25,250
तक
गिरावट
का
रास्ता
खुल
सकता
है.
ऐसे
माहौल
में
रणनीति
साफ
है:
इस
समय
फोकस
पैसा
बनाने
से
ज्यादा
पूंजी
बचाने
पर
रखें.
FIIs
की
भारी
बिकवाली
से
बढ़ी
चिंता
आज
बाजार
का
सबसे
बड़ा
संकेत
Foreign
Institutional
Investors
(FIIs)
की
जबरदस्त
बिकवाली
है.
कैश
और
डेरिवेटिव्स
मिलाकर
FIIs
ने
करीब
₹12,000
करोड़
के
शेयर
बेचे.
FII
सेगमेंट-वाइज
आंकड़े
(₹
करोड़):
-
कैश:
3,367 -
इंडेक्स
फ्यूचर्स:
5,285 -
स्टॉक
फ्यूचर्स:
3,270
एक
ही
दिन
में
FIIs
ने
31,000
शॉर्ट
कॉन्ट्रैक्ट्स
जोड़े,
भारतीय
बाजार
के
इतिहास
में
यह
दूसरा
सबसे
बड़ा
शॉर्ट
आंकड़ा
है.
ग्लोबल
मोर्चे
पर
भी
अनिश्चितता
बनी
हुई
है.
अमेरिका
में
United
States
Supreme
Court
में
टैरिफ
की
वैधता
पर
फैसला
आना
है.
बाजार
मान
रहा
है
कि
टैरिफ
को
आंशिक
राहत
मिल
सकती
है,
लेकिन
इसके
बाद
Donald
Trump
प्रशासन
वैकल्पिक
रास्ते
तलाश
सकता
है,
जो
आसान
नहीं
होंगे
और
समय
लेंगे.
एनर्जी
मार्केट
से
संकेत
मिला-जुला
है.
Brent
Crude
करीब
4.6%
चढ़कर
$62.69
पर
पहुंच
गया
है.
घरेलू
संकेतों
पर
रहेगी
नजर
एक
राहत
की
बात
यह
है
कि
आज
से
Q3
नतीजों
की
झड़ी
लगने
वाली
है.
इससे
बाजार
को
कुछ
घरेलू
संकेत
मिल
सकते
हैं.
Q3
रिजल्ट्स
कैलेंडर
(मुख्य):
-
9
जनवरी:
IREDA -
10
जनवरी:
Avenue
Supermarts -
12
जनवरी:
Tata
Consultancy
Services,
HCL
Technologies -
13
जनवरी:
ICICI
Lombard,
ICICI
Prudential -
14
जनवरी:
Infosys,
HDFC
AMC -
15
जनवरी:
LTTS,
HDFC
Life -
16
जनवरी:
Reliance
Industries,
Wipro,
Tech
Mahindra,
Tata
Technologies -
17
जनवरी:
HDFC
Bank,
ICICI
Bank
अगले
हफ्ते
के
नतीजे
बाजार
की
दिशा
तय
करने
में
निर्णायक
हो
सकते
हैं.
अब
क्या
करें?
रणनीति
में
बदलाव
जरूरी
तकनीकी
रूप
से
निफ्टी
ओवरसोल्ड
है
और
PCR
0.65
तक
आ
चुका
है.
इतिहास
बताता
है
कि
इस
स्तर
पर
अक्सर
बाउंसबैक
मिलता
है.
लेकिन
इस
बार
समस्या
ज्यादा
वोलैटिलिटी
की
है.
यह
मानना
जरूरी
है
कि
2020-2024
जैसी
एकतरफा
बुल
मार्केट
अब
पीछे
छूट
चुकी
है.
आज
का
बाजार
मौके
भी
देता
है
और
फंसाता
भी
है.
इंडेक्स
अभी
पूरा
दर्द
नहीं
दिखा
रहा,
सबसे
ज्यादा
मार
मिडकैप,
स्मॉलकैप
और
IPO
सेगमेंट
में
पड़ी
है.
इस
पूरे
परिदृश्य
से
सीख
साफ
है,
सिर्फ
रिलेटिव
स्ट्रेंथ
वाले
शेयरों
पर
फोकस
करें.
जो
शेयर
इस
माहौल
में
भी
टिके
रहे
हैं,
वही
रिकवरी
को
लीड
करेंगे.
जो
स्टॉक्स
निफ्टी
के
ऑल-टाइम
हाई
से
40-50%
नीचे
हैं,
उनमें
और
गिरावट
का
खतरा
बना
रहेगा.
पावर
सेक्टर:
जोखिम
का
नया
मोर्चा
पावर
कंपनियों
पर
नजर
जरूरी
है.
Bharat
Heavy
Electricals
(BHEL)
की
रिकवरी
का
बड़ा
कारण
चीनी
कंपनियों
की
गैर-मौजूदगी
रहा
है.
2007
में
जहां
शेयर
₹400
के
आसपास
था,
वहीं
2020
तक
यह
₹50
से
नीचे
आ
गया.
गलवान
के
बाद
चीनी
कंपनियों
पर
पाबंदी
से
BHEL
फिर
₹300
तक
संभला
है.
अगर
भविष्य
में
चीनी
कंपनियों
की
वापसी
होती
है,
तो
यह
सेक्टर
के
लिए
बड़ा
नेगेटिव
ट्रिगर
हो
सकता
है.
ट्रेडिंग
रणनीति:
अनुमान
नहीं,
सिर्फ
लेवल्स
निफ्टी
के
लिए
-
25,700–25,750:
मेक-ऑर-ब्रेक
जोन -
26,100
के
ऊपर
निकले
बिना
किसी
भी
रैली
पर
शक -
दोनों
तरफ
ट्रेड
लें,
सख्त
स्टॉप-लॉस
और
छोटे
टार्गेट
रखें -
इस
बाजार
में
1:1
से
ज्यादा
रिस्क-रिवॉर्ड
की
उम्मीद
न
करें
बैंक
निफ्टी
-
अभी
भी
रिलेटिव
स्ट्रेंथ -
59,500
(20
DEMA)
के
ऊपर
ट्रेंड
सुरक्षित -
59,500
टूटते
ही
कमजोरी -
ऊपर
की
ओर
59,800
और
60,000
पर
रेजिस्टेंस