घबराहट में ट्रेन से कूदी महिला, हुई मौत, कोर्ट ने रेलवे से कहा- मुआवजा दीजिए

घबराहट में ट्रेन से कूदी महिला, हुई मौत, कोर्ट ने रेलवे से कहा- मुआवजा दीजिए


नई
दिल्ली.

कर्नाटक
हाई
कोर्ट
ने
रेलवे
को
ट्रेन
से
गिरकर
मरने
वाली
एक
वृद्ध
महिला
के
परिजनों
को
8
लाख
मुआवजा
देने
का
आदेश
दिया
है.
महिला
कर्नाटक
के
चन्नापटना
रेलवे
स्टेशन
पर
गलत
ट्रेन
में
चढ़
गई
थी,
गलती
का
अहसास
होने
पर
वह
घबराकर
चलती
ट्रेन
से
कूद
गई
जिससे
उसकी
मौत
हो
गई.
न्यायमूर्ति
एच.पी.
संदेश
ने
यह
आदेश
जयम्मा
के
परिजनों
द्वारा
दायर
एक
याचिका
को
स्वीकार
करते
हुए
रेलवे
को
मुआवजा
देने
का
आदेश
पारित
किया
है,
जिसकी
22
फरवरी,
2014
को
रेलवे
स्टेशन
पर
मृत्यु
हो
गई
थी.

जयम्मा
ने
अपनी
बहन
रथनम्मा
के
साथ
तिरूपति-मैसूर
पैसेंजर
ट्रेन
से
मैसूर
जाने
के
लिए
टिकट
खरीदे
थे.
हालांकि,
गलती
से
दोनों
तूतीकोरिन
एक्सप्रेस
ट्रेन
में
चढ़
गईं.
ट्रेन
के
शुरू
होने
पर
उन्हें
अपनी
गलती
का
अहसास
हुआ
लेकिन
काफी
देर
हो
चुकी
थी
और
ट्रैन
स्पीड
पकड़
चुकि
थी.
इससे
घबराकर
दोनों
ने
उतरने
की
कोशिश
में
ट्रेन
छलांग
लगा
दी
और
प्लेटफार्म
पर
ही
गिर
गईं.
प्लेटफॉर्म
पर
गिरने
से
जयम्मा
की
मौके
पर
ही
मौत
हो
गई
जबकि
रथनम्मा
को
चोटें
आयीं
लेकिन
उनकी
जान
बच
गई.


कोर्ट
ने
क्या
कहा?

2016
में
रेलवे
क्लेम
ट्रिब्यूनल
ने
यह
कहते
हुए
दावे
को
खारिज
कर
दिया
था
कि
मौत
का
कारण
भारतीय
रेलवे
अधिनियम,
1989
की
धारा
124

के
तहत
“खुद
को
पहुंचाई
गई
चोटें”
थी.
हालांकि,
ट्रिब्यूनल
ने
स्वीकार
किया
था
कि
जयम्मा
ने
ट्रेन
की
टिकट
खरीदी
थी.
ट्रिब्यूनल
ने
कहा
था
कि
यह
घटना
अगले
स्टॉप
पर
उतरने
या
ट्रेन
के
आपातकालीन
ठहराव
के
लिए
बनी
चेन
खींचने
के
सुरक्षित
विकल्प
अपनाने
के
बजाय
”जानबूझकर
चलती
ट्रेन
से
कूदने
के
कृत्य”
के
कारण
हुई.

हालांकि,
दावेदारों
की
ओर
से
कर्नाटक
हाई
कोर्ट
के
समक्ष
यह
तर्क
दिया
गया
कि
जब
बहनों
को
पता
चला
कि
वे
गलत
ट्रेन
में
चढ़
गई
हैं,
तो
वे
ट्रेन
से
उतर
गईं,
और
उस
समय
ट्रेन
बस
चल
रही
होगी,
जिसके
कारण
महिला
की
जान
चली
गई.
संतुलन
बिगड़ने
से
वह
दुर्घटनावश
ट्रेन
से
नीचे
गिर
गईं
और
उसे
गंभीर
चोटें
आईं.


कोर्ट
ने
परिजनों
के
पक्ष
में
दिया
फैसला

इस
तथ्य
पर
ध्यान
देते
हुए
कि
जयम्मा
की
बहन
सुरक्षित
रूप
से
ट्रेन
से
उतर
गई
थी,
हाई
कोर्ट
ने
कहा
कि
ट्रिब्यूनल
ने
गलती
से
निष्कर्ष
निकाला
कि
यह
चलती
ट्रेन
से
कूदने
और
खुद
को
चोट
पहुंचाने
का
एक
जानबूझकर
किया
गया
कार्य
था.

हाई
कोर्ट
ने
कहा
कि
जयम्मा
के
घातक
रूप
से
गिरने
की
घटना
आईआर
अधिनियम
की
धारा
123
के
तहत
परिभाषित
“यात्रियों
को
ले
जा
रही
ट्रेन
से
किसी
यात्री
के
आकस्मिक
रूप
से
गिरने”
की
“अप्रिय
घटना”
है
और
रेलवे
प्रशासन
मुआवजा
देने
के
लिए
उत्तरदायी
है.
कोर्ट
ने
अपनी
सुनवाई
में
अधिनियम
की
धारा
124ए
का
हवाला
देते
हुए
फैसला
सुनाया.

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