

नई
दिल्ली.
रिलायंस
इंडस्ट्रीज
लिमिटेड
(RIL)
की
फाइनेंशियल
सर्विसेज
आर्म
जियो
फाइनेंशियल
सर्विसेज
(Jio
Financial
Services)
को
नॉन-बैंकिंग
फाइनेंशियल
कंपनी
(NBFC)
से
कोर
इनवेस्टमेंट
कंपनी
(CIC)
में
बदलने
के
लिए
भारतीय
रिजर्व
बैंक
(RBI)
से
मंजूरी
मिल
गई
है.
कंपनी
ने
स्टॉक
एक्सचेंज
की
फाइलिंग
में
इसकी
जानकारी
दी
है.
नवंबर
में
जियो
फाइनेंशियल
ने
सीआईसी
बनने
के
लिए
आवेदन
किया
था.
यह
कदम
तब
उठाया
गया
था,
जब
रिजर्व
बैंक
ने
जियो
फाइनेंशियल
के
रिलायंस
इंडस्ट्रीज
से
अलग
होने
और
इसके
शेयरहोल्डिंग
पैटर्न
में
बदलाव
के
बाद
कनवर्जन
का
निर्देश
दिया
था.
क्या
होती
है
कोर
इनवेस्टमेंट
कंपनी
CIC
एक
ऐसी
होल्डिंग
एंटिटी
के
रूप
में
कार्य
करती
है,
जो
मुख्य
रूप
से
अपने
ग्रुप
की
कंपनियों
के
शेयरों
और
सिक्योरिटी
को
मैनेज
करती
है.
इस
बदलाव
के
साथ
जियो
फाइनेंशियल
सर्विसेज
अपने
अलग-अलग
बिजनेस
वर्टिकल
को
स्ट्रीमलाइन
कर
सकती
है,
जिनमें
अलग-अलग
एंटिटीज
के
तहत
लेंडिंग,
एसेट
मैनेजमेंट,
इंश्योरेंस
आदि
शामिल
हैं.
ट्रेडिशनल
एनबीएफसी
के
विपरीत,
जियो
फाइनेंशियल
सर्विसेज
की
सहायक
कंपनियां
पेरोल
और
इंश्योरेंस
से
लेकर
एसेट
मैनेजमेंट
और
लेंडिंग
तक
अलग-अलग
काम
करती
हैं.
यह
विविधता
प्योर-प्ले
एनबीएफसी
के
लिए
परिभाषित
कैटेगरीज
के
अनुरूप
नहीं
है.
100
करोड़
रुपये
से
ज्यादा
का
एसेट
साइज
रेगुलेटरी
परिभाषा
के
अनुसार,
एक
सीआईसी
के
पास
100
करोड़
रुपये
से
ज्यादा
का
एसेट
साइज
होना
चाहिए.
साथ
ही
उसे
अपने
नेट
एसेट्स
का
कम
से
कम
90
फीसदी
इक्विटी
शेयर,
प्रिफरेंस
शेयर,
बॉन्ड,
डिबेंचर
या
ग्रुप
कंपनियों
में
लोन
जैसे
निवेशों
में
रखना
चाहिए.
सीआईसी
मॉडल
रेगुलेटरी
फ्रेमवर्क
के
साथ
बेहतर
तरीके
से
अलाइन
होता
है,
जो
ज्यादा
कंप्लायंट
और
सुव्यवस्थित
ऑपरेशनल
स्ट्रक्चर
प्रदान
करता
है.
एक
सीआईसी
के
रूप
में
जियो
फाइनेंशियल
सर्विसेज
अपनी
सहायक
कंपनियों
को
कुशलतापूर्वक
कैपिटल
आवंटित
करने
पर
फोकस
कर
सकती
है.
कंपनी
के
शेयरों
में
तेजी
रिलायंस
इंडस्ट्रीज
से
अलग
होने
के
बाद
जियो
फाइनेंशियल
सर्विसेज
को
स्टॉक
एक्सचेंजेस
पर
अगस्त
2023
में
लिस्ट
कराया
गया
था.
12
जुलाई
को
यह
शेयर
सुबह
बॉम्बे
स्टॉक
एक्सचेंज
पर
बढ़त
के
साथ
353.55
रुपये
पर
खुला
और
फिर
पिछले
बंद
भाव
से
2.4
फीसदी
तक
चढ़कर
356.50
रुपये
के
हाई
तक
गया.
कारोबार
के
अंत
में
यह
350.35
रुपये
के
भाव
पर
बंद
हुआ.
(डिस्क्लेमर
–
नेटवर्क18
और
टीवी18
कंपनियां
चैनल/वेबसाइट
का
संचालन
करती
हैं,
जिनका
नियंत्रण
इंडिपेंडेट
मीडिया
ट्रस्ट
करता
है,
जिसमें
रिलायंस
इंडस्ट्रीज
एकमात्र
लाभार्थी
है.)
Tags:
Reliance
industries,
Reliance
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Reserve
bank
of
india
FIRST
PUBLISHED
:
July
12,
2024,
16:28
IST