सरकार ने माना इस कंपनी के कुछ मसालों में तय मानक से ज्यादा ईटीओ, हेल्थ पर क्या है इसका असर

सरकार ने माना इस कंपनी के कुछ मसालों में तय मानक से ज्यादा ईटीओ, हेल्थ पर क्या है इसका असर


हाइलाइट्स


ईटीओ
को
कैंसरजनक
उत्पाद
माना
जाता
है.
यह
बायो
फ्यूल
का
बाय
प्रोडक्ट
होता
है.
इसका
इस्तेमाल
मसालों
के
फ्यूमिगेशन
में
होता
है.


नई
दिल्ली.

मसाला
ब्रांड
एवरेस्ट
के
कुछ
नमूनों
में
एथिलीन
ऑक्साइड
(ईटीओ)
रसायन
की
मौजूदगी
सख्त
मानकों
(0.1
मिलीग्राम
प्रति
किलोग्राम)
के
अनुरूप
नहीं
पाई
गई
है.
सरकार
ने
कंपनी
से
इस
दिशा
में
सुधार
करने
के
लिए
कहा
है.
सोमवार
को
एक
अधिकारी
ने
इस
बारे
में
जानकारी
दी.
याद
हो
कि
कुछ
मसाला
उत्पादों
में
ईटीओ
के
अंश
पाए
जाने
के
बाद
सिंगापुर
और
हॉन्गकॉन्ग
ने
दो
भारतीय
मसाला
ब्रांड-
एमडीएच
और
एवरेस्ट
के
उत्पादों
को
वापस
लौटा
दिया
था.

उसके
बाद
सरकार
ने
इन
उत्पादों
में
कैंसरजनक
रसायन
की
मौजूदगी
के
परीक्षण
के
लिए
नमूने
इकट्ठा
किए
थे.
अधिकारी
ने
कहा,
‘‘हमने
इन
दोनों
कंपनियों
से
लिए
गए
नमूनों
का
परीक्षण
किया
है.
हमने
पाया
है
कि
एमडीएच
के
सभी
18
नमूने
मानकों
के
अनुरूप
थे.
लेकिन
एवरेस्ट
के
12
में
से
कुछ
नमूने
मानकों
का
गैर-अनुपालन
कर
रहे
थे.
इसके
लिए
हमने
उन्हें
सुधारात्मक
कदम
उठाने
को
कहा
गया
है.
हम
इस
अनुपालन
को
सुनिश्चित
करने
के
लिए
उनके
साथ
काम
कर
रहे
हैं.”
हालांकि,
इस
संबंध
में
एवरेस्ट
की
ओर
से
कोई
जवाब
नहीं
आया
है.


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तो
उड़े
होश


अलग-अलग
है
लिमिट

विभिन्न
देश
ईटीओ
के
संबंध
में
अलग-अलग
अधिकतम
सीमा
तय
करते
हैं.
जहां
यूरोपीय
संघ
ने
यह
सीमा
0.02-0.1
मिलीग्राम
प्रति
किलोग्राम
तय
की
है,
वहीं
सिंगापुर
में
यह
50
मिलीग्राम
प्रति
किलोग्राम
और
जापान
में
0.01
मिलीग्राम
प्रति
किलोग्राम
है.
इन
नमूनों
का
परीक्षण
0.1
मिलीग्राम
प्रति
किलोग्राम
के
आधार
पर
किया
गया
था.
अप्रैल
में
मसालों
का
निर्यात
12.27
प्रतिशत
बढ़कर
40.56
करोड़
अमेरिकी
डॉलर
हो
गया.


क्या
है
ईटीओ,
कैसे
करता
है
असर?

ईटीओ
जीवाश्म
ईंधन
का
बाय
प्रोडक्ट
होता
है.
इसका
कई
उद्योगों
में
इस्तेमाल
होता
है.
इन्हीं
उपयोगों
में
से
एक
मसालों
में
फ्यूमिगेशन
भी
है.
फ्यूमिगेशन
से
मसालों
में
बैक्टीरिया,
फंगस

वायरस
का
संक्रमण
नहीं
होता
है.
हालांकि,
इसके
इस्तेमाल
के
लिए
भी
सीमा
तय
की
गई
है.
अगर
यह
तय
सीमा
से
ज्यादा
यूज
किया
जाए
तो
शरीर
में
कैंसर
का
कारण
बन
सकता
है.
कई
अंतरराष्ट्रीय
स्वास्थ्य
संस्थान
कैंसर
पैदा
करने
वाले
उत्पादों
के
रूप
में
इसे
वर्गीकृत
कर
चुके
हैं.
इनमें
इंटरनेशनल
एजेंसी
फोर
रिसर्च
ऑन
कैंसर
(IARC)
और
यूरोपीयन
यूनियन
शामिल
है.


(भाषा
के
इनपुट
के
साथ)

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