
लोकसभा
चुनाव
के
सातवें
और
आखिरी
चरण
का
मतदान
आज
(1
जून
को)
संपन्न
हो
जाएगा.
वोटिंग
के
ठीक
बाद
एग्जिट
पोल
के
रिजल्ट
जारी
होंगे.
भारत
में
साल
1957
यानी
दूसरे
लोकसभा
चुनाव
से
एग्जिट
पोल
की
शुरुआत
हुई.
पहली
बार
इंडियन
इंस्टीट्यूट
ऑफ
पब्लिक
ओपिनियन
(Indian
Institute
of
Public
Opinion)
ने
सर्वे
किया
था.
उसके
बाद
से
लगभग
हर
चुनाव
में
एग्जिट
पोल
होते
हैं.
हालांकि
एग्जि
पोल
रिजल्ट
कई
बार
बिल्कुल
सटीक
होते
हैं
तो
कई
बार
वास्तविक
रिजल्ट
से
बिल्कुल
उलट.
आइये
एक
नजर
डालते
हैं
पिछले
तीन
लोकसभा
चुनाव-
2009,
2014
और
2019
के
एग्जिट
पोल
पर
और
जानते
हैं
ये
कितने
सही
साबित
हुए
थे…
2009
का
एग्जिट
पोल
पहले
बात
करते
हैं
साल
2009
की.
इस
लोकसभा
चुनाव
में
कांग्रेस
की
अगुवाई
वाली
यूपीए
सरकार
दूसरी
बार
सत्ता
में
लौटी
थी.
2009
में
चार
बड़ी
पोल
एजेंसी
के
रिजल्ट
में
यूपीए
को
औसत
195
सीटें
मिली
थीं,
जबकि
एनडीए
को
185.
हालांकि
चुनाव
नतीजे
एग्जिट
पोल
के
रिजल्ट
से
बिल्कुल
अलग
थे.

यूपीए
के
खाते
में
262
सीटें
आई
थीं.
जबकि
एनडीए
को
158
सीटें
मिली
थीं.
एग्जिट
पोल
से
इतर
यूपीए
को
54
सीटें
ज्यादा
मिली
थीं.
जबकि
एनडीए
को
औसत
से
22
सीटें
कम
मिली
थीं.
2014
का
एग्जिट
पोल
साल
2014
के
एग्जिट
पोल
में
बीजेपी
की
अगुवाई
वाले
एनडीए
को
औसत
283
सीटें
मिलने
का
अनुमान
था.
जबकि
कांग्रेस
की
अगुवाई
वाली
यूपीए
को
105
सीटें
मिलने
का
आकलन
था.
लेकिन
एक्चुअल
नतीजे
इससे
बिल्कुल
रहे
थे.
ज्यादातर
एग्जिट
पोल
नरेंद्र
मोदी
की
लहर
भांप
नहीं
पाए.

एनडीए
ने
रिकॉर्ड
336
सीटें
जीती
थीं.
जिसमें
से
बीजेपी
को
अकेले
282
सीटें
मिलीं.
यूपीए
कुल
60
सीटों
पर
सिमट
गई
थी.
जिसमें
कांग्रेस
के
पास
44
सीटें
थीं.

2019
का
एग्जिट
पोल
अब
बात
करते
हैं
आखिरी
लोकसभा
चुनाव
यानी
साल
2019
की.
पिछले
लोकसभा
चुनाव
में
13
एग्जिट
पोल
के
औसत
पर
नजर
डालें
तो
306
सीटें
दी
थीं.
जबकि
यूपीए
के
खाते
में
120
सीटें
गई
थीं.
पर
एग्जिट
पोल
के
नतीजे
इस
बार
भी
गलत
साबित
हुए
थे.
एनडीए
की
सीटों
का
सही
आकलन
नहीं
कर
पाए
थे.

2019
में
एनडीए
को
353
सीटें
मिलीं.
जिसमें
अकेले
बीजेपी
को
300
सीटें
मिली
थीं.
यूपीए
के
खाते
में
बस
93
सीटें
आई
थीं.
इसमें
कांग्रेस
को
सिर्फ
52
सीटें
मिली
थीं.

आखिरी
वोट
के
आधे
घंटे
बाद
ही
दिखा
सकते
हैं
एग्जिट
पोल
चुनाव
आयोग
के
नियमानुसार
आखिरी
वोट
पड़ने
के
आधे
घंटे
बाद
एग्जिट
पोल
के
रिजल्ट
का
प्रसारण
किया
जा
सकता
है.
भारत
में
कुछ
साल
पहले
तक
चुनाव
के
बीच
एग्जिट
पोल
दिखाया
जाता
था.
इसके
बाद
चुनाव
आयोग
के
पास
चुनाव
को
प्रभावित
करने
की
शिकायतें
पहुंचीं.
तब
आयोग
ने
इस
पर
नियम
कड़े
करके
गाइडलाइंस
जारी
कीं
कि
एक्जिट
पोल
का
टेलीकास्ट
अंतिम
चरण
के
बाद
ही
होगा,
चाहे
वो
लोकसभा
के
चुनाव
हों
या
फिर
विधानसभा
के.
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PUBLISHED
:
June
1,
2024,
14:16
IST