नई
दिल्ली.
प्रधानमंत्री
नरेंद्र
मोदी
ने
खुलासा
किया
कि
भारत
ने
इजराइल
में
एक
दूत
भेजकर
रमजान
के
दौरान
गाजा
में
हवाई
हमले
रोकने
का
रिक्वेस्ट
की
थी.
पीएम
मोदी
ने
एक
टीवी
चैनल
को
दिए
इंटरव्यू
दौरान
कहा
था
कि
रमजान
के
पवित्र
महीने
के
दौरान
इजराइल
से
युद्ध
में
शामिल
होने
के
बजाय
शांति
बनाए
रखने
का
आग्रह
किया
गया
था.
उन्होंने
कहा
कि
उनके
दूत
ने
इजराइल
से
कहा
था
कि
उन्हें
कम
से
कम
रमजान
के
पवित्र
महीने
के
दौरान
गाजा
पर
बमबारी
नहीं
करनी
चाहिए.
पीएम
मोदी
के
इस
जिक्र
के
बाद
सबके
मन
में
यहीं
सवाल
उठ
रहा
था
कि
आखिर
वह
दूत
कौन
था
जिसन
इजरायल
जाकर
युद्ध
रुकवाया
था.
यह
दूत
कौन
था.
इसका
खुलासा
शुक्रवार
को
विदेश
मंत्रालय
ने
किया
है.
विदेश
मंत्रालय
ने
बताया
है
पीएम
मोदी
ने
नेशनल
सिक्योरिटी
एडवाइजर
अजित
डोभाल
को
शांति
वार्ता
के
लिए
इजरायल
भेजा
था.
आपको
बता
दें
कि
अजीत
डोभाल
प्रधानमंत्री
मोदी
के
राष्ट्रीय
सुरक्षा
सलाहकार
(एनएसए)
हैं.
वह
केरल
कैडर
के
एक
सेवानिवृत्त
भारतीय
पुलिस
सेवा
(आईपीएस)
अधिकारी
और
पूर्व
भारतीय
खुफिया
और
कानून
प्रवर्तन
अधिकारी
हैं.
वह
1945
में
उत्तराखंड
में
जन्मे
और
कीर्ति
चक्र,
सैन्य
कर्मियों
के
लिए
वीरता
पुरस्कार
से
सम्मानित
होने
वाले
भारत
के
सबसे
कम
उम्र
के
पुलिस
अधिकारी
रह
चुके
हैं.
क्या
कहा
था
पीएम
मोदी
ने?
पीएम
मोदी
ने
कहा
था
कि
रमजान
के
महीने
के
दौरान
मैंने
अपने
विशेष
दूत
को
प्रधानमंत्री
(बेंजामिन
नेतन्याहू)
से
मिलने
और
समझाने
के
लिए
इजराइल
भेजा
था
कि
उन्हें
रमजान
के
दौरान
गाजा
में
बमबारी
नहीं
करनी
चाहिए.
उन्होंने
इसका
पालन
करने
के
लिए
हर
संभव
प्रयास
किया,
लेकिन
अंत
में
2-3
दिनों
तक
युद्ध
हुआ
था.
प्रधानमंत्री
ने
कहा
कि
वह
ऐसी
चीजों
का
प्रचार
नहीं
करते
हैं,
भले
ही
भारत
में
लोग
‘मुसलमानों’
के
मुद्दे
पर
उन्हें
घेरते
रहते
हैं.
पीएम
मोदी
ने
कहा
कि
कुछ
अन्य
देशों
ने
भी
बमबारी
रोकने
के
लिए
इजराइल
से
बात
करने
की
कोशिश
की
और
शायद
परिणाम
भी
मिले.
उन्होंने
कहा
कि
उन्हें
परिणाम
भी
मिल
गए
होंगे.
मैंने
भी
कोशिश
की.
कब
शुरू
हुआ
था
इजरायल
और
गाजा
के
बीच
युद्ध?
पिछले
साल
7
अक्टूबर
को
दक्षिणी
इजराइल
पर
हमास
आतंकवादियों
के
हमले
के
बाद
गाजा
के
साथ
युद्ध
छिड़
गया.
बताया
जाता
कि
इजरायल
में
हुए
आतंकी
हमले
में
करीब
1170
से
अधिक
लोग
मारे
गए,
जिनमें
ज्यादातर
नागरिक
थे.
हमास
शासित
गाजा
में
स्वास्थ्य
मंत्रालय
के
अनुसार,
इजरायल
की
सैन्य
जवाबी
कार्रवाई
में
कम
से
कम
35233
लोग
मारे
गए
हैं,
जिनमें
ज्यादातर
नागरिक
हैं.
बेंजामिन
नेतन्याहू
का
कहना
है
कि
जब
तक
हमास
खत्म
नहीं
हो
जाता
तब
तक
हमला
जारी
रहेगा.
जब
पीएम
मोदी
ने
सुनाया
एक
किस्सा
एक
चैनल
को
दिए
इंटरव्यू
में
पीएम
मोदी
ने
कहा
कि
उन्होंने
पहले
की
सरकारों
के
विपरीत,
जो
प्रतीकात्मक
धर्मनिरपेक्षता
का
प्रदर्शन
करती
थीं.
इसके
चलते
कोई
भी
प्रधानमंत्री
इजरायल
और
फिलिस्तीन
दोनों
का
अकेले
दौरा
किया
करता
था.
उन्होंने
कहा
कि
पहले
एक
फैशन
था
कि
अगर
किसी
को
इजरायल
जाना
है
तो
फिलिस्तीन
का
दौरा
करना
जरूरी
है.
धर्मनिरपेक्षता
करो
और
वापस
आ
जाओ,
लेकिन
मैंने
ऐसा
करने
से
इनकार
कर
दिया.
प्रधानमंत्री
ने
एक
किस्सा
भी
सुनाया
जब
उन्हें
जॉर्डन
के
रास्ते
फिलिस्तीन
की
यात्रा
करनी
थी.
उन्होंने
कहा
है
कि
जब
जॉर्डन
के
राष्ट्रपति,
जो
पैगंबर
मुहम्मद
के
प्रत्यक्ष
वंशज
हैं
को
पता
चला
कि
मैं
(जॉर्डन
के
हवाई
क्षेत्र)
फिलिस्तीन
जा
रहा
हूं,
तो
उन्होंने
मुझसे
कहा,
मोदी
जी,
आप
इस
तरह
नहीं
जा
सकते.
आप
मेरे
मेहमान
हैं.
उन्होंने
कहा
कि
इसके
बाद
मैं
डिनर
के
लिए
उनके
घर
गया
था,
लेकिन
हेलीकॉप्टर
जॉर्डन
का
था,
गंतव्य
फिलिस्तीन
था
और
मेरे
साथ
इजरायली
फ्लाइट
अटेंडेंट
थे.
तीनों
अलग-अलग
हैं,
लेकिन
मोदी
के
लिए
सभी
साथ
आए
थे.
कौन
हैं
अजित
डोभाल?
सितंबर
2016
की
सर्जिकल
स्ट्राइक
और
फरवरी
2019
में
पाकिस्तान
की
सीमा
पार
बालाकोट
हवाई
हमले
अजीत
डोभाल
के
सुपरविजन
में
किए
गए
थे.
उन्होंने
डोकलाम
गतिरोध
को
समाप्त
करने
में
भी
मदद
की
और
पूर्वोत्तर
में
उग्रवाद
से
निपटने
के
लिए
निर्णायक
कदम
उठाए.
डोभाल
ने
1968
में
एक
आईपीएस
अधिकारी
के
रूप
में
अपना
पुलिस
करियर
शुरू
किया
और
मिजोरम
और
पंजाब
में
उग्रवाद
विरोधी
अभियानों
में
सक्रिय
रूप
से
शामिल
रहे.
उन्होंने
1999
में
कंधार
में
हाईजैक
IC-814
से
यात्रियों
की
रिहाई
में
तीन
वार्ताकारों
में
से
एक
के
रूप
में
महत्वपूर्ण
भूमिका
निभाई
थी.
उन्होंने
1971
और
1999
के
बीच
इंडियन
एयरलाइंस
के
विमानों
के
कम
से
कम
15
हाईजैक्स
को
सफलतापूर्वक
समाप्त
किया.
कहा
जाता
है
कि
डोभाल
ने
पाकिस्तान
में
सक्रिय
आतंकवादी
समूहों
के
बारे
में
खुफिया
जानकारी
इकट्ठा
करने
में
एक
अंडरकवर
ऑपरेटिव
के
रूप
में
सात
साल
बिताए
हैं.
गुप्त
एजेंट
के
रूप
में
एक
साल
के
कार्यकाल
के
बाद
उन्होंने
इस्लामाबाद
में
भारतीय
उच्चायोग
में
छह
साल
तक
काम
किया.
डोभाल
ने
1984
में
खालिस्तानी
उग्रवाद
को
दबाने
के
लिए
‘ऑपरेशन
ब्लू
स्टार’
के
लिए
खुफिया
जानकारी
इकट्ठा
करने
में
भी
महत्वपूर्ण
भूमिका
निभाई
थी.
डोभाल
1990
में
कश्मीर
गए
और
कट्टर
आतंकवादियों
और
सैनिकों
को
विद्रोही
बनने
के
लिए
मना
लिया,
जिससे
1996
में
जम्मू
और
कश्मीर
चुनाव
का
रास्ता
साफ
हो
गया.
अजीत
डोभाल
ने
अपने
करियर
का
बड़ा
हिस्सा
इंटेलिजेंस
ब्यूरो
(आईबी)
में
एक
सक्रिय
फील्ड
इंटेलिजेंस
अधिकारी
के
रूप
में
बिताया.
कई
प्रसिद्ध
पुरस्कारों,
सम्मानों
और
रिकॉर्डों
के
साथ
डोभाल
ने
उग्रवाद
और
आतंकवाद
के
खिलाफ
सख्त
रुख
अपनाने
के
लिए
एक
प्रतिष्ठा
बनाई
है.
2009
में
अपनी
सेवानिवृत्ति
के
बाद
डोभाल
विवेकानन्द
इंटरनेशनल
फाउंडेशन
के
संस्थापक
निदेशक
बने.
2014
में
अजीत
डोभाल
ने
इराक
के
तिकरित
के
एक
अस्पताल
में
फंसी
46
भारतीय
नर्सों
की
रिहाई
सुनिश्चित
करवाई.
वह
एक
शीर्ष-गुप्त
मिशन
पर
गए
और
जमीनी
स्थिति
को
समझने
के
लिए
25
जून
2014
को
इराक
के
लिए
उड़ान
भरी
और
इराक
सरकार
में
उच्च-स्तरीय
संबंध
बनाए.

5
जुलाई
2014
को
नर्सों
को
भारत
वापस
लाया
गया
और
बाद
में
डोभाल
ने
म्यांमार
से
बाहर
सक्रिय
नेशनल
सोशलिस्ट
काउंसिल
ऑफ
नागालैंड
के
उग्रवादियों
के
खिलाफ
सेना
प्रमुख
जनरल
दलबीर
सिंह
सुहाग
के
साथ
म्यांमार
में
एक
सफल
सैन्य
अभियान
का
भी
नेतृत्व
किया.
2019
में
डोभाल
को
पांच
और
वर्षों
के
लिए
राष्ट्रीय
सुरक्षा
सलाहकार
के
रूप
में
फिर
से
नियुक्त
किया
गया
और
नरेंद्र
मोदी
के
नेतृत्व
वाली
राष्ट्रीय
जनतांत्रिक
गठबंधन
(एनडीए)
सरकार
के
दूसरे
कार्यकाल
में
कैबिनेट
रैंक
दी
गई.
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:
May
17,
2024,
19:01
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