कौन हैं वैभव कोकट? जिसने IAS पूजा खेडकर की खोल दी पोल पट्टी

कौन हैं वैभव कोकट? जिसने IAS पूजा खेडकर की खोल दी पोल पट्टी


मुंबई:

ट्रेनी
IAS
पूजा
खेडकर
मामले
(IAS
Pooja
Khedkar
Updates)
में
अब
तक
कई
चौंकाने
वाले
खुलासे
सामने
आए
हैं.
पूजा
खेडकर
पर
भी
अब
UPSC
ने
केस
दर्ज
किया
है.
उन्हें
परीक्षा
देने
से
रोक
दिया
गया
है,
आपकी
उम्मीदवारी
क्यों
रद्द
नहीं
की
जानी
चाहिए?
UPSC
की
ओर
से
उन्हें
ऐसे
कारण
बताओ
नोटिस
भेजा
गया
है.
इसी
बीच
एक
ट्वीट
से
ये
सारा
मामला
सामने
आया.
वैभव
कोकट
ने
6
जुलाई
को
अपने
ट्विटर
हैंडल
से
ये
ट्वीट
किया.

वैभव
कोकट
ने
ट्वीट
कर
लिखा
था
‘ट्रेनी
IAS
ऑडी
कारों
का
उपयोग
कर
रहे
हैं?
नियम
में
कहा
गया
है
कि
निजी
वाहन
पर
‘महाराष्ट्र
सरकार’
लिखा
साइनबोर्ड
लगाना
अनुचित
है.
लेकिन
पुणे
कलेक्टरेट
में
प्रोबेशन
पर
चल
रहे
2022
बैच
के
आईएएस
डॉ.
पूजा
खेडकर
ने
महाराष्ट्र
सरकार
की
वीआईपी
नंबर
वाली
निजी
ऑडी
कार
ली.
इसके
अलावा
इस
निजी
कार
में
लाल
और
नीली
बत्ती
भी
लगी
हुई
थी.’



पढ़ें-
कहानी
उस
दिलेर
महिला
की…
26
की
उम्र
में
चीर
दिया
था
बाघ
का
‘करेजा’,
शौर्य
चक्र
से
हुआ
था
सम्मान


लगाए
गए
थे
कई
आरोप

उन्होंने
आगे
लिखा
था
‘पुणे
कलेक्टर
ऑफिस
में
इस
बात
की
चर्चा
हमेशा
होती
रहती
है
कि
आखिर
ये
बड़े
अधिकारी
कौन
हैं
जो
ऑडी
कंपनी
की
लोगो
और
लैंप
वाली
लग्जरी
कार
लेकर
ऑफिस
आते
हैं.
खास
बात
यह
है
कि
ये
ऑफिसर
मैडम
दिन
में
भी
अपनी
कार
की
लाइटें
जलाए
रखती
हैं.
इन
अधिकारी
महोदया
के
‘कार’
नाम
केवल
कारों
तक
ही
सीमित
नहीं
हैं,
बल्कि
जब
वरिष्ठ
अधिकारी
सरकारी
काम
के
लिए
मुंबई
में
मंत्रालय
में
गए,
तो
इस
अधिकारी
महोदया
ने
उनके
बरामदे
पर
कब्ज़ा
कर
लिया
और
वरिष्ठों
के
बरामदे
का
सामान
बाहर
निकाल
लिया.
और
वहां
अपना
ऑफिस
बनाया
और
अपने
नाम
का
एक
बोर्ड
भी
लगाया.’


पिता
ऑफिस
आकर
लोगों
को
धमकाते
थे.

उन्होंने
आगे
लिखा
था
‘पुणे
के
कलेक्टर
सुहास
दिवसे
ने
अपने
व्यवहार
को
लेकर
अपर
मुख्य
सचिव
मंत्रालय
को
एक
रिपोर्ट
दायर
की
है
और
इस
रिपोर्ट
में
कलेक्टर
ने
अधिकारी
मैडम
की
जिद
का
जिक्र
किया
है
कि
‘मेरा
कार्यालय
कलेक्टर
के
कार्यालय
के
बगल
में
होना
चाहिए
और
मुझे
एक
कांस्टेबल
चाहिए
और
मुझे
यह
कार
चाहिए’
‘.
अधिकारी
मैडम
के
पिता
कलेक्टर
कार्यालय
आते
हैं
और
वहां
के
कर्मचारियों-अधिकारियों
से
कहते
हैं
कि,
तुम
सब
मेरी
बेटी
को
परेशान
कर
रहे
हो,
तुम्हें
जीवन
भर
उसे
ऐसा
पद
कभी
नहीं
मिलेगा.
धमकी
भी
देते
हैं
कि
अगर
तुम
मेरी
बेटी
को
परेशान
करोगे
तो
भविष्य
में
तुम्हें
भी
भुगतना
पड़ेगा.
यहां
तक
​​कि
अफसर
मैडम
को
भी
वह
दफ्तर
पसंद
नहीं
आया,
जिसकी
मरम्मत
बेहिसाब
जिद
से
की
गई
थी.’

ट्वीट
में
आगे
कहा
था
‘ट्रेनी
पर
रहने
वाले
अधिकारियों
को
कार,
सैनिक,
हॉल
आदि
सुविधाएं
उपलब्ध
कराने
का
कोई
सरकारी
प्रावधान
नहीं
है.
जिलाधिकारी
ने
उन्हें
अपर
जिलाधिकारी
का
पदभार
वापस
देने
का
संकेत
दिया.
इस
पर
पूजा
खेडकर
ने
वॉट्सऐप
मैसेज
भेजकर
कहा
कि
ये
मेरा
अपमान
है.
प्रोबेशन
पर
चल
रहे
इस
अधिकारी
का
आचरण
एक
प्रशासनिक
अधिकारी
के
अनुरूप
नहीं
है.
जिला
कलक्टर
ने
अपने
प्रतिवेदन
में
विस्तृत
सुझाव
दिया
है
कि
जिले
में
सरकारी
कामकाज
सुचारु
रूप
से
चलाने
के
लिए
प्रशिक्षण
हेतु
जिला
बदला
जाये.

ट्वीट
में
वैभव
कोकट
ने
आगे
कहा
कि
‘नए
अधिकारी
इतने
उत्साहित
क्यों
हैं?
10-15
साल
पहले
या
उससे
पहले
सरकारी
सेवा
में
आये
अधिकारियों
में
अपने
काम
के
प्रति
बहुत
जागरूकता
होती
है
और
स्वभाव
में
अधिकार
और
विनम्रता
होती
है,
लेकिन
पिछले
5-6
साल
में
सरकारी
सेवा
में
आये
कई
महाभागों
की
मंशा
केवल
सतही
नौकरी
की
होती
है.
मैं
तेजी
से
बड़ा
होना
चाहता
हूं,
मैं
अमीरी
भरी
जिंदगी
जीना
चाहता
हूं,
मैं
अमीर
बनना
चाहता
हूं.
मैं
पूरी
तरह
से
इंस्टाग्राम
पर
रहना
चाहता
हूं.
सोशल
मीडिया
पर
दर्शन
का
प्रसार
करना
है.
पिछले
कुछ
वर्षों
में
प्रशासनिक
सेवा
में
बहुत
चिंताजनक
लहर
आयी
है.
कुछ
अपवादों
के
साथ,
यह
कहने
का
समय

गया
है
कि
पुराने
अधिकारी
नए
अधिकारियों
से
बेहतर
हैं.
तब
ये
मामला
सामने
आया.

वहीं
इसके
बाद
उन्होंने
कहा,
‘एक
ट्वीट
में
बहुत
ताकत
होती
है,
हमें
निडर
होकर
लिखना
चाहिए.
भले
ही
समय
कठिन
हो,
आम
आदमी
को
केंद्र
में
रखकर
सच
बोलना
चाहिए.
सिस्टम
के
ख़िलाफ़
लिखें
और
बोलें.
उन्होंने
ट्वीट
भी
किया
है
कि
सिस्टम
को
झुकाने
की
ताकत
आपकी
लेखनी
में
है.

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