पहले घुटनों के बल आए… फ‍िर क‍िया दंडवत प्रणाम, 13 सेकेंड तक जमीन पर लेटे रहे

पहले घुटनों के बल आए… फ‍िर क‍िया दंडवत प्रणाम, 13 सेकेंड तक जमीन पर लेटे रहे


पुरी.

जय
जगन्नाथ
के
जयकारों
और
झांझ-मंजीरों
की
ध्वनि
के
बीच,
भगवान
बलभद्र,
देवी
सुभद्रा
और
भगवान
जगन्नाथ
की
‘बहुड़ा
यात्रा’
या
वापसी
उत्सव
सोमवार
को
पुरी
में
शुरू
हुआ.
इस
मौके
पर
बीजेपी
सांसद
और
पार्टी
के
राष्ट्रीय
प्रवक्ता
संबित
पात्रा
ने
भगवान
जगन्नाथ
मंदिर
में
पूजा-अर्चना
की.
उन्होंने
भगवान
जगन्नाथ
दंडवत
प्रणाम
किया.

लाखों
श्रद्धालुओं
की
मौजूदगी
में
एक
औपचारिक
‘धाडी
पहांडी’
(शोभायात्रा)
के
माध्यम
से
भगवान
बलभद्र,
देवी
सुभद्रा
और
भगवान
जगन्नाथ
को
‘चक्रराज
सुदर्शन’
के
साथ
श्री
गुंडिचा
मंदिर
से
उनके
रथों
तक
लाया
गया.
इसके
साथ
ही
भगवान
की
12वीं
शताब्दी
के
श्रीमंदिर
की
ओर
वापसी
यात्रा
या
‘बहुड़ा
यात्रा’
की
शुरुआत
हुई.

सात
जुलाई
को
रथ
यात्रा
के
दिन
देवताओं
को
मुख्य
मंदिर
से
लगभग
तीन
किलोमीटर
दूर
श्री
गुंडिचा
मंदिर
ले
जाया
गया
था.
भगवान
बलभद्र,
देवी
सुभद्रा
और
भगवान
जगन्नाथ
सात
दिनों
तक
गुंडिचा
मंदिर
में
रहे,
जिसे
उनका
जन्मस्थान
माना
जाता
है.

हालांकि
श्री
जगन्नाथ
मंदिर
प्रशासन
(एसजेटीए)
ने
पहले
पहांडी
का
समय
दोपहर
12
बजे
से
अपराह्न
ढाई
बजे
के
बीच
तय
किया
था,
लेकिन
भगवान
की
शोभायात्रा
निर्धारित
समय
से
पहले
पूर्वाह्न
10
बजकर
45
मिनट
पर
शुरू
हुई.

परंपरा
के
अनुसार,
पुरी
के
राजा
गजपति
महाराज
दिव्य
सिंह
देव
द्वारा
तीनों
रथों
के
आगे
‘छेरा
पहरा’
(रथों
के
आगे
झाड़ू
लगाना)
अनुष्ठान
किया
जाएगा.
एसजेटीए
के
अधिकारियों
ने
बताया
कि
रथ
खींचने
की
परंपरा
शाम
चार
बजे
से
शुरू
होगी.
अतिरिक्त
पुलिस
महानिदेशक
(कानून
व्यवस्था)
संजय
कुमार
ने
बताया
कि
‘बहुड़ा
यात्रा’
के
लिए
सुरक्षा
के
पुख्ता
इंतजाम
किए
गए
हैं,
पूरा
शहर
सीसीटीवी
की
निगरानी
में
है.

एक
अधिकारी
ने
बताया
कि
सोमवार
रात
को
भगवान
12वीं
सदी
के
मंदिर
के
सिंह
द्वार
के
सामने
रथों
पर
विराजमान
रहेंगे
और
17
जुलाई
को
रथों
पर
‘सुनाभेषा’
(स्वर्ण
पोशाक)
की
रस्म
निभायी
जाएगी.
अधिकारी
ने
बताया
कि
भगवान
के
‘सुनाभेष’
देखने
के
लिए
करीब
10
लाख
श्रद्धालुओं
के
पहुंचने
की
उम्मीद
है.

Tags:

Jagannath
Rath
Yatra
,

Jagannath
Temple
,

Sambit
Patra