फंस गई इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदने वाली 1300 कंपनियां! चंदा दिखाकर उठाया था लाभ, अब मिल रहे नोटिस

फंस गई इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदने वाली 1300 कंपनियां! चंदा दिखाकर उठाया था लाभ, अब मिल रहे नोटिस


नई
दिल्ली.

इलेक्टोरल
बॉन्ड
खरीदकर
राजनीतिक
पार्टियों
को
चंदा
देने
वाली
कंपनियों
पर
टैक्स
अथॉरिटीज़
की
टेढ़ी
नजर
है.
सुनने
में
आया
है
कि
जिन
कंपनियों
ने
राजनीतिक
दलों
को
डोनेशन
दिया
था,
उन्हें
अब
टैक्स
अथॉरटीज़
से
नोटिस
मिलने
लगे
हैं.
इलेक्टोरल
बॉन्ड्स
(Electoral
bonds)
को
सुप्रीम
कोर्ट
ने
फरवरी
में
असंवैधानिक
करार
दिया
था.

इकॉनमिक्स
टाइम्स
की
एक
रिपोर्ट
के
मुताबिक,
कुछ
कंपनियों
को
इस
बाबत
नोटिस
मिले
हैं.
ये
वे
कंपनियां
हैं
जिन्होंने
चंदे
में
कंट्रीब्यूशन
के
लिए
टैक्स
छूट
के
लिए
क्लेम
किया
था.
इस
रिपोर्ट
के
मुताबिक
इन
कंपनियों
में
बड़े-बड़े
ग्रुप
शामिल
हैं,
जिनमें
कुछ
प्रमुख
नाम
हैं-
इंफोसिस,
एम्बैसी
ग्रुप,
मेघा
इंजिनियरिंग,
आदित्य
बिड़ला
ग्रुप,
जेएसडब्ल्यू
स्टील,
टोरेंट
फार्मा,
लूपिन,
इन्टास,
भारती
एयरटेल
और
अलेम्बिक
फार्मा.


अब
आगे
क्या?

जनवरी
2018
में
शुरुआत
के
बाद
से
इलेक्टोरल
बॉन्ड
स्कीम
के
माध्यम
से
राजनीतिक
दलों
को
16,518
करोड़
रुपये
का
चंदा
मिला
था.
हालांकि,
15
फरवरी
को
देश
के
सुप्रीम
कोर्ट
ने
इसे
असंवैधानिक
करार
दिया,
जिससे
चंदा
देने
वाले
कॉरपोरेट
के
बीच
उनके
योगदान
पर
टैक्स
के
प्रभाव
को
लेकर
चिंता
बढ़
गई.
ईटी
की
रिपोर्ट
में
कहा
गया
है
कि
इसके
जवाब
में,
कॉरपोरेट्स
ने
आगामी
बजट
में
हस्तक्षेप
और
संभावित
राहत
की
मांग
करते
हुए
वित्त
मंत्रालय
से
संपर्क
किया
है.

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