नई
दिल्ली.
चुनाव
आयोग
की
माने
तो
अभी
तक
का
चुनाव
हिंसा
मुक्त
रहा
है.
लोकसभा
चुनाव
में
हिंसा
को
रोकने
के
लिए
चुनाव
आयोग
सुरक्षाबलों
की
तैनाती
करता
है.
सोमवार
को
चौथे
चरण
के
लिए
वोटिंग
होनी
है
इसमें
पश्चिम
बंगाल
के
कई
इलाके
शामिल
हैं.
इसको
देखते
हुए
चुनाव
आयोग
ने
पांचवें
चरण
के
लिए
केन्द्रीय
सुरक्षा
बलों
(सीएपीएफ)
के
जवानों
की
लगभग
32
फीसदी
तैनाती
बढ़ाने
का
फैसला
लिया
है.
इस
फैसले
से
बंगाल
में
ही
एक
लाख
से
ज्यादा
जवानों
को
पांचवें
चरण
के
लिए
तैनात
किया
जाएगा.
आखिर
यह
फैसला
क्यों
लिया
गया
है
और
इस
फैसले
का
बंगालादेश
का
क्या
कनेक्शन
है?
इसके
लिए
पढ़ें
पूरी
रिपोर्ट…
पश्चिम
बंगाल
के
मुख्य
निर्वाचन
अधिकारी
(सीईओ)
ऑफिस
के
अनुसार,
अभी
तक
पश्चिम
बंगाल
में
सीएपीएफ
की
578
कंपनियां
तैनात
की
गईं
और
पांचवें
चरण
में
31.83
प्रतिशत
की
वृद्धि
के
साथ
यह
संख्या
762
हो
जाएगी.
एक
कंपनी
में
135
जवान
होते
हैं.
पहले
4
फेज
के
चुनाव
में
पश्चिम
बंगाल
में
सीएपीएफ
की
578
कंपनियां
बंगाल
में
तैनात
थी.
इसके
अनुसार,
करीब
78
हजार
30
जवान
बंगाल
में
शांतिपूर्ण
मतदान
करवा
रहे
थे.
पर
पांचवें
फेज
के
लिए
32
फीसदी
बढ़ोतरी
करने
के
बाद
अब
बंगाल
में
762
कंपनियां
तैनात
की
जाएंगी.
इसके
अनुसार,
करीब
30
हजार
और
जवानों
को
बंगाल
भेजा
जाएगा.
बांग्लादेश
से
क्या
है
कनेक्शन?
बंगाल
में
पांचवें
चरण
में
मतदान
के
लिए
वोटिंग
क्षेत्रों
की
संख्या
चौथे
चरण
की
तुलना
में
थोड़ी
कम
है.
इसके
बावजूद
यहां
सीएपीएफ
की
अतिरिक्त
तैनाती
की
जा
रही
है.
चौथे
चरण
में
जहां
आठ
निर्वाचन
क्षेत्रों
में
मतदान
हुआ,
वहीं
पांचवें
चरण
में
यह
संख्या
सात
है.
ये
सात
निर्वाचन
क्षेत्र
हुगली
जिले
में
सेरामपुर,
हुगली
और
आरामबाग,
उत्तर
24
परगना
जिले
में
बैरकपुर
और
बनगांव
और
हावड़ा
जिले
में
हावड़ा
और
उलुबेरिया
हैं.
इन
सात
निर्वाचन
क्षेत्रों
में
से
बैरकपुर
और
बनगांव
अलग-अलग
कारणों
से
चुनाव
आयोग
की
विशेष
निगरानी
में
होंगे.
जबकि
बनगांव
भारत-बांग्लादेश
सीमावर्ती
वोटिंग
एरिया
है.
वहीं,
बैरकपुर
में
चुनाव
संबंधी
हिंसा
और
तनाव
का
इतिहास
रहा
है.
सीईओ
कार्यालय
के
एक
सूत्र
ने
कहा
कि
यह
चरणबद्ध
तरीके
से
तैनात
की
जाने
वाली
सीएपीएफ
की
कंपनियों
की
संख्या
बढ़ाने
की
आयोग
की
योजना
के
अनुरूप
है.
पश्चिम
बंगाल
विधानसभा
में
विपक्ष
के
नेता
सुवेंदु
अधिकारी
ने
सोमवार
को
मतदान
के
अंत
में
कहा
कि
अगले
चरण
के
चुनाव
में
ईसीआई
द्वारा
सुरक्षा
घेरा
कड़ा
कर
दिया
जाएगा.
अधिकारी
ने
कहा
कि
अगर
चुनाव
आयोग
ने
इसी
तरह
की
सुरक्षा
व्यवस्था
बरकरार
रखी
तो
अगले
चरण
का
चुनाव
तृणमूल
कांग्रेस
के
लिए
और
ज्यादा
परेशानी
से
भरा
होगा.
बैरकपुर
सीट
का
हिंसा
का
इतिहास
–
2019
के
लोकसभा
चुनाव
के
बाद
बैरकपुर
के
बेहद
चर्चित
विधानसभा
क्षेत्र
भाटपारा
में
कई
महीनों
तक
हिंसा
हुई.
कुछ
हफ्तों
तक
चली
हिंसा
में
आठ
लोगों
की
मौत
हुई
थी
और
50
लोग
घायल
हुए
थे.
–
लोकसभा
चुनाव
ही
नहीं
2018
में
पश्चिम
बंगाल
में
पंचायत
चुनाव
के
दौरान
भी
राजनीतिक
हिंसा
देखने
को
मिली
थी.
हॉटस्पॉट
में
से
एक
अमदंगा
था,
जो
मुख्य
रूप
से
ग्रामीण
निर्वाचन
क्षेत्र
है
जो
बैरकपुर
शहर
के
पूर्व
में
स्थित
है.
–
4
अक्टूबर
2020
को
पार्षद
और
अर्जुन
सिंह
के
करीबी
मनीष
शुक्ला
जब
बैरकपुर
शहर
में
एक
एसयूवी
से
एक
चाय
की
दुकान
के
पास
उतरे
तो
वह
फोन
पर
बात
कर
रहे
थे.
तभी
टीटागढ़
पुलिस
स्टेशन
के
ठीक
सामने
मोटरसाइकिल
पर
सवार
दो
लोगों
ने
उनकी
गोली
मारकर
हत्या
कर
दी.
उनकी
पोस्टमॉर्टम
रिपोर्ट
में
22
गोलियों
के
घाव
बताए
गए
थे.
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FIRST
PUBLISHED
:
May
14,
2024,
17:17
IST