
युवक
ने
बाइक
से
तैयार
किया
खास
वाहन
आंध्र
प्रदेश
के
पार्वतीपुरम
मान्यम
जिले
में
एक
अनोखी
गाड़ी
चर्चा
का
विषय
बनी
हुई
है.
इस
गाड़ी
को
लोग
गरीबों
की
रोल्स
रॉयस
से
तुलना
कर
रहे
हैं.
इसकी
वजह
भी
काफी
दिल
को
छू
लेने
वाली
है.
गिरिशिखारा
गांव
का
एक
युवक
अपनी
दादी
की
दयनीय
हालत
देख
कर
अपनी
बाइक
को
मोडिफाइड
किया
है.
युवक
अपनी
दादी
को
परेशानी
की
हालत
में
नहीं
देख
सकता
था.
इसलिए
उसने
दादी
के
आने-जाने
के
लिए
अपनी
बाइक
के
पीछे
एक
छोटी
सी
ट्रॉली
जोड़
ली
है.
इसी
बाइक
की
ट्रॉली
में
वह
अपनी
दादी
को
बैठाकर
बाजार
और
बैंक
के
कामकाज
के
लिए
ले
जाता
है.
जो
भी
इस
दृश्य
को
देखता
है
तो
वह
इस
गाड़ी
की
तुलना
रोल्स
रॉयस
जैसी
आलीशान
गाड़ी
से
करता
है.
मंदांगी
चिन्नम्मी
नाम
की
75
वर्षीय
महिला
पार्वतीपुरम
मान्यम
जिले
के
गुम्मलक्ष्मिपुरम
मंडल
के
निचले
चोरुपल्ली
के
गिरिशिखारा
गांव
में
रहती
हैं.
उनकी
आंखें
ठीक
से
देख
भी
नहीं
पातीं
हैं.
बुढ़ापे
के
कारण
ठीक
से
चलने
में
असमर्थ
भी
हैं.
पहाड़ी
गांव
होने
के
कारण
गांव
की
कोई
भी
छोटी-मोटी
जरूरत
मैदानी
इलाके
के
बाजार
में
आने
से
ही
पूरी
होती
है.
कस्बे
के
बैंक
से
बुजुर्ग
को
निकालनी
होती
है
पेंशन
गांव
की
पत्थरों
और
बजरी
वाली
सड़क
पर
बाइक
चलाना
बहुत
मुश्किल
है.
ऐसे
में
युवक
की
दादी
बाजार
आने-जाने
और
बैंक
से
पेंशन
उठाने
में
भी
उन्हें
बहुत
परेशान
होती
है.
75
वर्षीय
मंदांगी
चिन्नम्मिकी
का
कुरुपम
मंडल
केंद्र
में
एपी
विकास
ग्रामीण
बैंक
में
एक
बैंक
खाता
है.
उस
खाते
में
उन्हें
मिलने
वाली
पेंशन
के
पैसों
के
साथ-साथ
अपने
होने
वाले
खर्चों
का
भी
पैसा
जमा
है.
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बाइक
पर
बैठ
भी
नहीं
पाती
हैं
बुजुर्ग
महिला
उन्हें
अपने
बैंक
से
पैसा
निकालने
के
लिए
कस्बे
में
जाना
होता
है.
यह
उनके
लिए
किसी
कठोर
तपस्या
से
कम
नहीं
है.
उम्र
ज्यादा
होने
की
वजह
से
बुजुर्ग
महिला
बाइक
पर
भी
नहीं
बैठ
सकती
है.
उनकी
यह
हालत
देखकर
उनके
पोते
मंदांगी
शिवा
ने
अपनी
दादी
को
बैंक
ले
जाने
और
उनकी
जरूरतें
पूरी
करने
का
फैसला
किया
है.
पोते
ने
बाइक
से
बनाया
खास
वाहन
अपने
पास
मौजूद
औजारों
से
वह
अपनी
दादी
के
बैठने
के
लिए
एक
खास
वाहन
बनाने
के
लिए
निकल
पड़ा.
उसने
अपनी
पुरानी
मोटरसाइकिल
के
पहियों
को
एक
खाट
से
जोड़कर
और
उसे
रस्सियों
से
मजबूती
से
बांधकर
एक
ट्रॉली
बनाई.
उसने
ट्रॉली
के
ऊपर
लकड़ियों
की
मदद
से
एक
कंबल
की
व्यवस्था
की
ताकि
उसकी
दादी
को
उस
ट्रॉली
में
आसानी
से
बैठाया
जा
सके.
ट्रॉली
को
मोटरसाइकिल
के
पीछे
जोड़ा
और
अपनी
दादी
को
बैंक
और
कस्बे
की
मार्केट
में
ले
गया.
बाइक
के
पीछे
बांधी
ट्रॉली
बुजुर्ग
दादी
ने
बैंक
से
नकदी
निकाली
और
पोते
के
साथ
गाड़ी
के
पीछे
ट्रॉली
में
बैठकर
वापस
घर
आ
गईं.
पोते
मंदांगी
शिवा
का
कहना
है
कि
अपनी
दादी
के
प्रति
उनके
प्यार
ने
उन्हें
यह
वाहन
बनाने
के
लिए
प्रेरित
किया
है.
इस
ट्रॉली
की
मदद
से
वह
अपनी
दादी
की
जरूरतों
को
पूरा
करेंगे.
स्थानीय
लोग
इस
गाड़ी
किसी
रोल्स
रॉयस
से
कम
नहीं
समझ
रहे
हैं.