
चुनाव
आते
ही
नेताओं
का
पाला
बदलने
का
खेल
भी
शुरू
जाता
है.
यह
रिवाज
पुराना
है.
‘मौसम
वैज्ञानिकों’
की
फेहरिस्त
लंबी
हो
जाती
है.
किसी
को
करियर
की
चिंता
सताने
लगती
है
तो
किसी
को
अचानक
ही
मान
अपमान
का
ख्याल
आने
लगता
है.
लिहाजा
नेता
कांग्रेस
से
बीजेपी
में
तो
बीजेपी
से
कांग्रेस
में
जाने
लगते
हैं.
2024
के
लोकसभा
चुनाव
में
भी
ये
इलेक्शन
इवेंट
अभी
जारी
है.
सबसे
ज्यादा
जिस
पार्टी
से
नेता
निकले
हैं
वो
हैं
कांग्रेस.
महाराष्ट्र
से
मिलिंद
देवड़ा,
बाबा
सिद्दीकी,
प्रमोद
कृष्णम,
बॉक्सर
बिजेंद्र
सिंह,
अशोक
चव्हाण,
संजय
निरुपम,
सुरेश
पचौरी,
रोहन
गुप्ता…
आदि
अब
कांग्रेस
के
भूतपूर्व
नेता
हो
चुके
हैं.
बॉक्सर
बिजेंद्र
सिंह
ने
जिस
तरह
से
कांग्रेस
को
चौंकाया,
उससे
तो
सभी
दंग
रह
गए.
तो
वहीं
टिकट
नहीं
मिलने
से
संजय
निरुपम
जिस
तरह
से
बिफर
गए,
वह
भी
हैरान
करने
वाला
था.हालांकि
संजय
निरुपम
ने
इस
रिपोर्ट
के
लिखे
जाने
तक
किसी
पार्टी
का
रुख
नहीं
किया
है.
लेकिन
अहम
सवाल
ये
हो
जाता
है
कि
जिस
वजह
से
उन्होंने
कांग्रेस
छोड़ी,
आखिर
वह
इच्छा
उन्हें
किस
पार्टी
से
पूरी
होने
वाली
है.
उधर
गुजरात
में
रोहन
गुप्ता
भी
कांग्रेस
को
झटका
दे
चुके
हैं.
हालांकि
रोहन
गुप्ता
को
कांग्रेस
ने
अहमदाबाद
पूर्व
से
टिकट
दिया
था,
लेकिन
रोहन
गुप्ता
के
मुताबिक
वह
पार्टी
के
अंदर
अपने
और
अपने
पिता
का
अपमान
सहन
नहीं
कर
सकते
थे.उन्होंने
पार्टी
को
आज
से
समय
के
मुताबिक
दिशाहीन
बताया.
क्योंकि
वो
सीएए
का
विरोध,
राम
मंदिर
प्राण
प्रतिष्ठा
में
शामिल
न
होना
और
आम
आदमी
पार्टी
से
गठबंधन
को
लेकर
खासे
नाराज
थे.
रोहन
गुप्ता
की
तरह
की
कांग्रेस
के
एक
और
प्रखर
प्रवक्ता
रहे
गौरव
वल्लभ
ने
भी
भाजपा
का
दामन
था,
जिन्होंने
भी
सनातन
और
राम
मंदिर
प्राण
प्रतिष्ठा
पर
कांग्रेस
के
रुख
से
नाराज
होकर
कांग्रेस
से
मुक्ति
ले
ली.
लेकिन
बीजेपी
में
रोहन
गुप्ता
हो
या
गौरव
वल्लभ-इनकी
भूमिका
क्या
होगी,
ये
अभी
साफ
नहीं
है.
क्या
बीजेपी
में
इनके
मन
की
मुराद
पूरी
होगी?
या
400
पार
के
लिए
बीजेपी
का
विपक्ष
तोड़ो
अभियान
बीजेपी
ने
इस
चुनाव
में
विपक्षी
दल
के
जिताऊ
और
कद्दावर
नेताओं
को
अपने
पाले
में
लाने
का
बड़ा
अभियान
चला
रखा
है.
पिछले
दिनों
पश्चिमी
उत्तर
प्रदेश
के
जिलों
में
चुनाव
प्रचार
के
दौरान
केंद्रीय
गृहमंत्री
अमित
शाह
ने
अपनी
पार्टी
के
पदाधिकारियों
को
इस
बाबत
संदेश
भी
दिया.
उन्होंने
कहा
था
विपक्ष
को
जितना
तोड़ना
संभव
हो
सके,
तोड़ा
जाए
और
अपना
पाला
मजबूत
किया.
क्योंकि
पार्टी
का
लक्ष्य
मिशन
400
पार
का
है,
जिसे
हासिल
करना
है.
इस
अभियान
के
तहत
बीजेपी
ने
पंजाब
में
कांग्रेस
और
आम
आदमी
पार्टी
को
बड़ा
नुकसान
पहुंचाने
का
प्रयास
किया.
आम
आदमी
पार्टी
से
सुशील
कुमार
रिंकू
और
शीतल
अंगुराल
तो
कांग्रेस
से
रवणीत
सिंह
बि्टटू
कांग्रेस
छोड़कर
बीजेपी
में
आए.
सुशील
कुमार
रिंकू
जालंधर
से
तो
लुधियाना
से
रवणीत
सिंह
बि्टटू
को
टिकट
दिया
गया
है.
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भी
पढ़ें
कांग्रेस
छोड़कर
भाजपा
में
शामिल
होने
वालों
में
सुरेश
पचौरी,
ज्योति
मिर्धा,
अर्जुन
मोढवाडिया
भी
हैं.
इनमें
ज्योति
मिर्धा
को
बीजेपी
ने
राजस्थान
के
नागौर
लोकसभा
निर्वाचन
क्षेत्र
से
अपना
उम्मीदवार
बनाया
है
तो
वहीं
अर्जुन
मोढवाडिया
जो
कभी
गुजरात
में
प्रधानमंत्री
नरेंद्र
मोदी
के
खिलाफ
कांग्रेस
का
चेहरा
थे
वो
अब
गुजरात
में
पोरबंदर
से
विधानसभा
उपचुनाव
में
बीजेपी
के
उम्मीदवार
हैं.
इस
फेहरिस्त
में
जेएमएम
छोड़कर
आने
वाली
सीता
सोरेन
को
बीजेपी
ने
दुमका
से
तो
कांग्रेस
छोड़कर
आने
वाली
गीता
कोड़ा
को
सिंहभूम
सीट
से
अपना
उम्मीदवार
बनाया
है.
इस
सिलसिले
में
बिहार
में
कुछ
अलग
ही
खेल
देखने
को
मिला
है.
नीतीश
कुमार
के
एनडीए
के
साथ
जाने
के
बाद
बिहार
में
उथल
पुथल
का
दौर
शुरू
हो
गया.
जेडीयू
छोड़कर
बीमा
भारती
आरजेडी
में
आ
गईं,
जिनको
पूर्णिया
से
टिकट
दिया
गया.
पप्पू
यादव
की
तमाम
मुहिम
के
बावजूद
लालू
प्रसाद
यादव
टस
से
मस
नहीं
हुए
और
बीमा
को
पूर्णिया
से
टिकाये
रखा.
दूसरी
तरफ
शिवहर
के
पूर्व
सांसद
आनंद
मोहन
की
पत्नी
लवली
आनंद
ने
जब
आरजेडी
छोड़कर
जेडीयू
का
दामन
थामा
तो
उन्हें
भी
शिवहर
का
टिकट
थमा
दिया
गया.
पप्पू
को
कांग्रेस
में
विलीन
कर
दिया
गया
लेकिन
अब
स्पेस
बनाने
के
लिए
छटपटा
रहे
हैं.
चुनाव
से
पहले
बीजेपी
को
भी
लगा
झटका
हां,
ये
सच
है
कि
आज
की
चुनावी
बेला
में
बीजेपी
ज्वाइन
करने
वाले
नेताओं
की
संख्या
ज्यादा
है
लेकिन
बीजेपी
को
झटका
देने
वाले
भी
कम
नहीं
हैं.
हरियाणा
में
बीजेपी
सांसद
बृजेंद्र
सिंह
ने
कांग्रेस
का
दामन
थामा
है.
ऐसा
बताया
जा
रहा
था
कि
बृजेंद्र
सिंह
का
भाजपा
से
टिकट
कटना
तय
था.
बृजेंद्र
सिंह
पूर्व
केंद्रीय
मंत्री
चौ.
बीरेंद्र
सिंह
के
बेटे
हैं.
ये
वही
बृजेंद्र
सिंह
हैं
जिन्होंने
2019
का
लोकसभा
चुनाव
आईएएस
की
नौकरी
छोड़कर
चुनाव
लड़ा
था.
वहीं
हिमाचल
प्रदेश
से
हमीरपुर
के
नगर
परिषद
अध्यक्ष
ने
भाजपा
छोड़कर
कांग्रेस
ज्वाइन
कर
लिया
तो
बीडीएस
के
मनजीत
ने
भी
कांग्रेस
ज्वाइन
ली
है.हजारीबाग
के
बीजेपी
विधायक
जयप्रकाश
भाई
पटेल
ने
भी
कांग्रेस
का
दामन
थामा
है.
वहीं
बीजेपी
नेता
डॉ.सीता
राजपूत
और
आरएलडी
के
नेता
लतेश
बिधूड़ी
ने
जयंत
चौधरी
का
छोड़कर
सपा
का
दामन
थामा
है.
नेताओं
की
सूची
और
भी
लंबी
है
लेकिन
सवाल
अपनी
जगह
कायम
है
कि
जिन
नेताओं
को
पाला
बदलने
के
बाद
टिकट
मिल
गया
उनका
तो
करियर
बन
गया
लेकिन
जिनको
टिकट
नहीं
मिला
क्या
वो
केवल
इलेक्शन
इवेंट
के
टिमटिमाते
सितारे
भर
गए?