
दिग्विजय
सिंह
एक
तरह
जहां
बीजेपी
मिशन
400
में
जुटी
है.
वहीं,
दूसरी
तरफ
राजगढ़
लोकसभा
सीट
से
चुनाव
लड़
रहे
मध्य
प्रदेश
के
पूर्व
सीएम
दिग्विजय
सिंह
भी
मिशन
400
में
जुट
गए
हैं.
आखिर
क्या
है
दिग्विजय
सिंह
का
मिशन
400?
इंडिया
गठबंधन
बीजेपी
को
चुनौती
दे
रहा
है,
मगर
दूसरी
तरफ
ईवीएम
का
मुद्दा
भी
गर्म
है.
पूर्व
मुख्यमंत्री
दिग्विजय
सिंह
लगातार
ईवीएम
पर
सवाल
उठाते
आए
हैं.
ऐसे
में
अब
वो
अपने
गढ़
यानि
राजगढ़
से
चुनाव
लड़
रहे
है.
दिग्विजय
सिंह
ने
ईवीएम
का
तोड़
निकाला
है.
दिग्विजय
सिंह
का
कहना
है
कि
नियम
के
अनुसार
अगर
384
उम्मीदवार
एक
सीट
पर
हो
जाते
हैं
तो
फिर
चुनाव
बैलेट
पेपर
से
होगा.
दिग्विजय
सिंह
अब
इस
पर
गंभीरता
से
काम
भी
कर
रहे
हैं.
दिग्विजय
सिंह
ने
कहा
पहले
ये
प्रक्रिया
आसान
थी.
महज
64
प्रत्याशी
पर
ही
बैलेट
पेपर
से
चुनाव
हो
जाता
था,
मगर
अब
इसे
भी
कठिन
बना
दिया
गया.
आखिर
बीजेपी
को
ईवीएम
से
इतना
प्रेम
क्यों
है?
राजगढ़
सीट
से
नामांकन
दाखिल
करने
तैयार
कई
नेता
दिग्विजय
सिंह
की
एक
अपील
पर
उनके
समर्थक
ही
नहीं,
बल्कि
भोपाल
में
बैठे
कांग्रेस
के
प्रवक्ता
भी
राजगढ़
से
नामांकन
दाखिल
करने
के
लिए
तैयार
हैं.
कोई
कह
रहा
है
की
राजा
साहब
के
लिए
तो
जान
दे
सकते
हैं,
नामांकन
दाखिल
करना
तो
छोटी
चीज
है
तो
किसी
ने
कहा
दिग्विजय
सिंह
ने
पार्टी
के
लिए
हम
कार्यकर्ताओं
के
लिए
इतना
सब
कुछ
किया
है.
अगर
आज
उन्हें
हमारी
जरूरत
है
तो
हम
इतना
नहीं
करेंगे.
हम
जरूर
नामांकन
दाखिल
करेंगे.
ये
भी
पढ़ें
कांग्रेस
के
प्रवक्ता
मिथुन
सिंह
अहिरवार,
अवनीश
बुंदेला,
कांग्रेस
नेता
बृजभूषण
नाथ,
राहुल
सिंह
राठौड़
सहित
राजगढ़
से
कई
कार्यकर्ताओं
ने
भी
कहा
कि
वे
नामांकन
दाखिल
करेंगे.
दिग्विजय
सिंह
चुनाव
हार
रहे
हैंः
शिवराज
यानि
की
दिग्विजय
सिंह
अब
बैलेट
पेपर
से
चुनाव
करवाने
की
अपनी
पूरी
तैयारी
कर
रहे
हैं.
पूर्व
मुख्यमंत्री
शिवराज
सिंह
चौहान
से
जब
हमने
इसे
लेकर
सवाल
किया
तो
उन्होंने
कहा
कि
ये
हताशा
और
निराशा
को
बताता
है.
दिग्विजय
सिंह
चुनाव
हार
रहे
हैं,
इसलिए
ईवीएम
पर
ऐसे
सवाल
उठा
रहे
हैं.
दिग्विजय
सिंह
को
देना
होगा
खर्च
का
हिसाब:
पूर्व
मुख्य
चुनाव
आयुक्त
इस
पूरे
मामले
पर
पूर्व
मुख्य
चुनाव
आयुक्त
ओम
प्रकाश
रावत
का
कहना
है
कि
यदि
ऐसा
होता
है
तो
चुनावी
प्रक्रिया
काफी
लंबी
होगी.
बड़ी
से
बुक
बनानी
होगी.
दिग्विजय
सिंह
पहले
ही
ये
ऐलान
कर
चुके
हैं
कि
400
प्रत्याशी
के
नामांकन
वो
दाखिल
करवा
रहे
हैं
तो
फिर
इसके
खर्च
का
जवाब
भी
उन्हें
ही
देना
होगा.
25
हजार
रुपए
एक
व्यक्ति
को
नामांकन
दाखिल
करने
में
लगते
है
तो
एक
करोड़
रु
इसका
खर्च
आता
है.
राजनेताओं
को
भी
ऐसे
फैसले
पर
विचार
करना
चाहिए.
हलाकि
चुनाव
आयोग
तो
अपना
काम
करेगा
ही.
इस
बार
राजगढ़
में
मुकाबला
टक्कर
का
नजर
आ
रहा
है.
दिग्विजय
सिंह
बीजेपी
के
लिए
चुनौती
बने
हुए
हैं
फिलहाल
चुनाव
जीतने
के
लिए
दिग्विजय
मिशन
400
में
लगे
हुए
हैं.