
भारत
और
श्रीलंका
के
बीच
कच्छतीवु
द्वीप
को
लेकर
विवाद
बना
हुआ
है.
लोकसभा
चुनाव
से
ठीक
पहले
भारत
और
श्रीलंका
के
बीच
पड़ने
वाले
कच्चातिवु
द्वीप
को
लेकर
एक
बार
फिर
राजनीति
तेज
हो
गई
है.
मामला
तब
गरम
हो
गया
जब
श्रीलंकाई
नौसेना
ने
कच्चातिवु
द्वीप
पर
मछली
पकड़ने
गए
40
से
अधिक
भारतीय
मछुआरों
को
गिरफ्तार
कर
लिया.
इस
गिरफ्तारी
के
विरोध
में
तमिलनाडु
बीजेपी
के
अध्यक्ष
के.
अन्नामलाई
ने
RTI
के
जरिए
कच्चातिवु
द्वीप
इस
तरह
की
कार्रवाई
को
लेकर
सवाल
पूछे
थे.
RTI
के
जवाब
में
पता
चला
कि
1974
में
भारत
की
इंदिरा
गांधी
सरकार
और
श्रीलंका
की
राष्ट्रपति
श्रीमावो
भंडारनायके
में
एक
समझौता
हुआ
था,
जिसके
तहत
भारत
ने
कच्चातिवु
द्वीप
श्रीलंका
को
सौंप
दिया
था.
इस
बात
की
जानकारी
प्रधानमंत्री
नरेंद्र
मोदी
ने
रविवार
को
देते
हुए
सोशल
मीडिया
प्लेटफॉर्म
X
पर
लिखा,
कांग्रेस
ने
जानबूझकर
कच्चातिवु
द्वीप
श्रीलंका
को
दिया
था.
इसे
लेकर
जहां
लोगों
में
गुस्सा
है,
वहीं
ये
भी
सवाल
उठ
रहे
हैं
कि
आखिर
भारतीय
मछुआरे
जान
जोखिम
में
डालकर
श्रीलंका
में
मछली
पकड़ने
क्यों
जाते
हैं
और
वो
कौन
सी
वो
मछली
है,
जिसके
कारण
दो
देशों
की
दोस्ती
में
दरार
पड़ती
दिखाई
पड़
रही
है.
खास
मछली
के
लिए
जान
जोखिम
में
डाल
रहे
मछुआरे
भारतीय
मछुआरों
का
पारंपरिक
काम
मछली
पकड़ना
है
और
उन्हें
बेचकर
पैसे
कमाना
है.
ऐसा
नहीं
है
कि
भारतीय
क्षेत्र
में
मछलियां
नहीं
हैं,
लेकिन
भारतीय
मछुआरों
को
हमेशा
ही
एक
खास
मछली
की
तलाश
रहती
है.
ये
मछली
है
‘झींगा’.
सीफूड
में
झींगा
मछली
को
सबसे
ज्यादा
पसंद
किया
जाता
है.
यही
कारण
है
कि
इसकी
मांग
लगातार
बढ़ती
जा
रही
है.
मांग
ज्यादा
होने
के
कारण
मछुआरे
इसे
अच्छे
दाम
पर
बेच
लेते
हैं.
भारतीय
क्षेत्र
में
इतनी
झींगा
मछली
नहीं
है
जिससे
डिमांड
एंड
सप्लाई
की
चेन
को
पूरा
किया
सके.
ऐसे
में
भारतीय
मछुआरे
जान
जोखिम
में
डालकर
रात
के
अंधेरे
में
समुद्री
बॉर्डर
(आईएमबीएल)
को
पार
करते
हैं.
बता
दें
कि
कच्चातिवु
द्वीप
आईएमबीएल
की
दूसरी
ओर
पड़ता
है.
यहां
से
उन्हें
काफी
मात्रा
में
एक
साथ
मछली
मिल
जाती
है,
जिसे
वो
कंटेनर
में
भरकर
भारत
लाते
हैं.
इसी
जोखिम
में
बीच
कई
बार
श्रीलंकाई
नौसेना
उन्हें
गिरफ्तार
कर
लेती
है.
दोनों
देशों
के
बीच
विवाद
क्या
है?
भारत
और
श्रीलंका
के
बीच
1974
में
एक
समझौता
हुआ
था.
इस
समझौते
के
तहत
ही
दोनों
देशों
ने
समुद्री
सीमा
भी
तय
कर
ली
थी.
हालांकि
इसके
बावजूद
दोनों
देशों
के
बीच
हमेशा
से
कन्फ्यूजन
बना
रहा.
समझौते
के
तहत
आर्टिकल
5
में
कच्चातिवु
द्वीप
पर
भारतीय
मछुआरे
और
तीर्थयात्री
बिना
किसी
ट्रैवल
डॉक्यूमेंट्स
के
आराम
से
आ
जा
सकेंगे.
इसके
साथ
ही
आर्टिकल
6
में
बताया
गया
था
कि
दोनों
देशों
के
जहाज
इस
इलाके
में
बिना
किसी
रोक
टोक
के
आ
जा
सकेंगे.
यही
नहीं
समझौते
में
साफ
कहा
गया
था
भारतीय
मछुआरे
मछली
पकड़ने
के
लिए
अपने
फिशिंग
ग्राउंड
तक
पहुंच
जारी
रखेंगे.
इसी
समझौते
के
तहत
भारतीय
मछुआरे
लंबे
समय
तक
कच्चातिवु
द्वीप
और
उसके
आसपास
मछलियां
पकड़ते
रहे.
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भी
पढ़ें
:-
क्या
है
कच्चातिवु
द्वीप
की
कहानी,
जिसे
इंदिरा
सरकार
ने
श्रीलंका
को
सौंपा
था?
PM
मोदी
ने
कांग्रेस
को
घेरा
मछलियां
बनीं
दो
देशों
के
बीच
की
दरार
इस
समझौते
के
तहत
दो
साल
के
बाद
ही
भारत
को
वाडगे
बैंक
पर
नियंत्रण
मिल
गया.
वाडगे
बैंक
कन्याकुमारी
से
लगभग
50
किलोमीटर
दूर
दक्षिण
में
स्थित
10
हजार
वर्ग
किलोमीटर
में
फैला
इलाका
है.
भारत
और
श्रीलंका
दोनों
ही
देशों
के
मछुआरे
इस
क्षेत्र
में
मछली
पकड़ने
जाया
करते
थे.
दोनों
देशों
के
बीच
मछली
को
लेकर
विवाद
तब
बढ़ने
लगा
जब
भारत
के
समुद्री
हिस्से
में
धीरे-धीरे
मछलियां
लगभग
खत्म
सी
हो
गई
हैं.
भारतीय
मछुआरे
द्वीप
तक
पहुंचने
के
लिए
अंतरराष्ट्रीय
समुद्री
सीमा
रेखा
को
पार
करने
का
जोखिम
उठा
रहे
हैं.
ऐसा
करते
हुए
कई
बार
श्रीलंकाई
नौसेना
भारतीय
मछुआरों
को
गिरफ्तार
कर
ले
रहे
हैं.
यही
वजह
है
कि
दोनों
देशों
के
बीच
विवाद
हर
दिन
बढ़
रहा
है.
बॉटम
ट्रॉलिंग
ने
बढ़ाई
मुश्किल
मछली
पकड़ने
की
एक
प्रथा
है,
जिसे
बॉटम
ट्रॉलिंग
कहा
जाता
है.
भारतीय
मछुआरे
आमतौर
पर
इसी
प्रथा
से
मछली
पकड़ते
हैं.
इसमें
समुद्री
तट
पर
जाल
बिछाया
जाता
है.
यही
प्रथा
अब
दोनों
देशों
के
बीच
विवाद
की
जड़
बन
चुकी
है.
श्रीलंकाई
मछुआरों
का
कहना
है
कि
भारतीय
मछुआरों
की
ओर
से
बिछाए
जाने
वाले
जाल
में
झींगा
तो
आसानी
से
पकड़
में
आ
जाती
है
लेकिन
इसके
साथ
ही
मूंगा
और
शैवाल
जैसे
समुद्री
संसाधन
भी
जाल
में
फंसकर
चले
जाते
हैं,
जिससे
समुद्री
संसाधनों
में
कमी
हो
रही
है.
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:-
साम
दाम
दंड
भेद
क्या
श्रीलंका
से
भारत
वापस
ले
सकता
है
कच्चातिवु
द्वीप?
पिछले
साल
240
मछुआरे
पकड़े
गए
थे
श्रीलंकाई
नौसेना
की
ओर
से
पिछले
कई
सालों
से
भारतीय
मछुआरों
को
पकड़ने
की
खबरें
आती
रही
हैं.
भारत
सरकार
के
आंकड़ों
के
मुताबिक
पिछले
साल
ही
श्रीलंकाई
समुद्री
इलाके
से
240
भारतीय
मछुआरों
को
गिरफ्तार
किया
गया
है
जबकि
35
ट्रॉलर
जब्त
किए
गए
हैं.
साल
2014
में
800
से
ज्यादा
भारतीय
मछुआरों
को
गिरफ्तार
किया
गया
था.
भले
ही
साल
2014
के
बाद
भारतीय
मछुआरों
की
गिरफ्तारी
कम
हुई
हो
लेकिन
मछलियों
को
लेकर
विवाद
अभी
भी
खत्म
नहीं
हुआ
है.
झींगा
मछली
के
एक्सपोर्ट
मामले
में
भारत
है
नंबर-1
झींगा
मछली
के
निर्यात
के
मामले
में
भारत
दुनिया
का
नंबर
वन
निर्यातक
है.
भारत
सरकार
के
आंकड़ों
के
मुताबिक
वित्त
वर्ष
2022-23
में
झींगा
मछली
का
कुल
निर्यात
7,11,099
मीट्रिक
टन
दर्ज
किया
गया
था.
झींगा
मछली
का
आयात
करने
में
अमेरिका
सबसे
ऊपर
है.
अमेरिका
ने
पिछले
वित्त
वर्ष
में
2,75,662
मीट्रिक
टन
झींगा
मछली
भारत
से
आयात
की
है.
संयुक्त
राज्य
अमेरिका,
झींगा
मछली
का
सबसे
बड़ा
बाजार
है.
इसके
बाद
चीन
(1,45,743
मीट्रिक
टन),
यूरोपीय
संघ
(95,377
मीट्रिक
टन),
दक्षिण
पूर्व
एशिया
(65,466
मीट्रिक
टन),
जापान
(40,975
मीट्रिक
टन),
और
मध्य
पूर्व
(31,647
मीट्रिक
टन)
का
स्थान
है.