
किसान
आंदोलन.
(फाइल
फोटो)
चुनाव
लोकसभा
का
हो
या
विधानसभा
का,
अक्सर
ऐसा
देखने
को
मिलता
है
कि
अपने
नेता
से
नाराज
जनता
इसी
मौके
पर
गुस्सा
जाहिर
करती
है.
अब
जैसे-जैसे
लोकसभा
चुनावों
की
तारीखें
नजदीक
आ
रही
हैं,
सियासी
पारा
हाई
होता
जा
रहा
है.
इसी
कड़ी
में
किसान
पंजाब
मोर्चा
ने
बीजेपी
उम्मीदवारों
के
लिए
11
प्रश्न
जारी
किए
हैं.
जानिए
वो
कौन
से
प्रश्न
हैं…
-
किसानों
को
किसानों
के
सामने
क्यों
मारा,
उन्होंने
(पुलिस)
बैरिकेड्स
क्यों
लगाए,
आंसू
गैस
क्यों
छोड़ी
और
गोलियां
क्यों
चलाईं?
क्या
हम
विदेशी
हैं?
किसानों
को
दिल्ली
क्यों
नहीं
जाने
दिया? -
युवा
किसान
शुभकरण
को
गोली
मारकर
क्यों
शहीद
किया
गया?
क्यों
टूटे
किसानों
के
ट्रैक्टर?
400
किसानों
को
जख्मी
क्यों
किया
गया? -
एमएसपी
की
कानूनी
गारंटी
के
वादे
से
मुकरना
क्यों?
स्वामीनाथन
रिपोर्ट
क्यों
लागू
नहीं
हुई?
C-2+50%
फॉर्मूला
लागू
करने
में
क्या
कठिनाई
है? -
लखीमपुर
खीरी
हत्याकांड
में
न्याय
में
देरी
क्यों
हुई?
अजय
मिश्र
टेनी
को
सरकारी
आश्रय
देने
के
लिए
कैबिनेट
में
क्यों
रखा
गया? -
दिल्ली
आंदोलन
के
दौरान
किसानों
पर
दर्ज
सभी
केस
वापस
क्यों
नहीं
लिए
गए? -
कॉरपोरेट
का
कर्ज
माफ
करने
में
दिक्कत
नहीं
तो
किसानों
की
कर्ज
मुक्ति
में
दिक्कत
क्या
है? -
वादा
खिलाफी
बिजली
संशोधन
बिल
2020
संसद
में
क्यों
पेश
किया
गया? -
कृषि
क्षेत्र
को
प्रदूषण
कानून
से
बाहर
क्यों
नहीं
रखा
गया? -
चुनावी
बॉन्ड
से
देश
को
कॉर्पोरेट
घरानों
को
क्यों
बेचा
गया? -
बांध
सुरक्षा
कानून
बनाकर
भाखड़ा
और
पोंग
बांध
पंजाब
से
क्यों
छीने
गए? -
साइलो
के
बहाने
पंजाब
की
मंडियां
क्यों
तोड़
रहे
हो?
दिल्ली
किसान
आंदोलन
संयुक्त
किसान
मोर्चा
और
किसान
मजदूर
मोर्चा
ने
केंद्र
सरकार
के
खिलाफ
आंदोलन
का
ऐलान
किया
था.
किसानों
ने
फैसला
किया
था
कि
13
फरवरी
को
पंजाब-हरियाणा
समेत
अलग-अलग
राज्यों
के
किसान
दिल्ली
की
तरफ
बढ़ेंगे.
केंद्र
सरकार
से
अपनी
मांगें
पूरी
कराने
की
बात
रखेंगे.
अंबाला-शंभू,
खनौरी-जींद
और
डबवाली
सीमाओं
से
दिल्ली
की
ओर
कूच
करने
की
प्लानिंग
थी.
किसानों
ने
अपने
ट्रैक्टर-ट्रॉली
के
साथ
मार्च
शुरू
किया
और
शंभू
सीमा
के
जरिए
दिल्ली
की
ओर
बढ़े.
कुछ
किसान
समूह
खनौरी
सीमा
के
जरिए
दिल्ली
की
ओर
बढ़े.
इस
आंदोलन
में
भारतीय
किसान
यूनियन
और
उनके
नेता
राकेश
टिकैत
शामिल
नहीं
हुए.
ये
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पढ़ें
इस
दिल्ली
चलो
मार्च
के
पीछे
किसानों
की
सबसे
बड़ी
मांग
फसलों
के
लिए
न्यूनतम
समर्थन
मूल्य
(एमएसपी)
की
कानूनी
गारंटी
रही.
दिल्ली
की
तरफ
से
बढ़ने
से
पहले
किसानों
की
बैठक
केंद्र
सरकार
से
हुई
लेकिन
उसका
कोई
नतीजा
नहीं
निकला
था.