चुनावी गारंटी युद्ध के आगे विश्व युद्ध भी फेल, उनकी पटरी पर इनकी रेल

चुनावी गारंटी युद्ध के आगे विश्व युद्ध भी फेल, उनकी पटरी पर इनकी रेल
चुनावी गारंटी युद्ध के आगे विश्व युद्ध भी फेल, उनकी पटरी पर इनकी रेल


चुनाव
में
गारंटी
की
गारंटी
से
लड़ाई!
(मूल
फोटो-Pixabay)

वास्तव
में
हर
गारंटी
गरदा
है.
चुनावी
बेला
में
गारंटी
की
ऐसी
महासेल
लगी
है
कि
आज
शेख
चिल्ली
होते
तो
वह
भी
देख
सुनकर
चारों
खाने
चित्तsss
हो
जाते.
मियांsss,
मार्केट
में
ये
हम
से
बढ़कर
कौन
आया?
कौन
है
जो
फेंक
रहा
है.
कौन
है
जो
लपेट
रहा
है.
गारंटी
लेल्लोsss
शहरों
से
लेकर
गांवों
तक
यही
शोर
है-
मैं
मोहब्बत
का
ऐसा
चांद
बना
दूंगा,
जो
कभी
डूबेगा
नहीं
गारंटी
लेल्लोsss;
मैं
विकास
का
ऐसा
सूरज
खिला
दूंगा
कि
अमावस
कभी
आएगी
ही
नही
गारंटी
लेल्लोsss;
मैं
भरोसे
का
ऐसा
आसमान
खड़ा
कर
दूंगा
कि
किसी
को
छतों
की
जरूरत
ही
नहीं
पड़ेगी
गारंटी
लेल्लोsss;
मैं
एक
ऐसी
धरती
बसा
दूंगा
जहां
से
कोई
स्वर्गवासी
होना
ही
नहीं
चाहेंगे
गारंटी
लेल्लोsss;
मेरी
हर
गारंटी
सिर
पर
बाल
उगाने
की
गारंटी
से
भी
ज्यादा
गारंटेड
है.
चाहो
तो
गारंटी
की
भी
गारंटी
लेल्लोsss.
यहां
हर
गारंटी
के
साथ
एक
गारंटी
फ्री
है.
बाय
वन
गेट
वन
से
लेकर
होम
डिलीवरी
तक
सभी
स्कीम
लागू
है
पूरी
गारंटी
के
साथ.

चुनावी
चकल्लस
में
इन
गारंटियों
की
गर्जना
को
सुन-देख
हरिया
हरक्यूलिस
हैरान
है.
यहां
हर
कोई
चमक
रहा
है-
क्या
हीरा
और
क्या
कोयला-
सबके
सब
फुल
कॉन्फिडेंस
में
दमक
रहे
हैं-
मेरी
कमीज
उनकी
कमीज
से
ज्यादा
उजली
है.
विरोधियों
में
बस
इसी
बात
की
तो
खुजली
है.
गारंटी
का
गारंटी
से
ऐसे
युद्ध
हो
रहा
है
मानों
वादों
का
विश्व
युद्ध
चल
रहा
है.
अबकी
बार
नहीं
तो
सब
बेकार.
कर
लो
जितना
जी
चाहे
प्रहार.
निकालो
सारे
धरे
हथियार.
उठो,
जागो
गारंटी
पर
करो
गारंटी
से
वॉर.

अरे
दीवानों,
चीन
और
नाटो
पहचानो!

हिंदुस्तान
की
धरती
पर
मानो
रूस
और
यूक्रेन
का
वॉर
चल
रहा
है.
यहां
भी
अमेरिका
है,
यहां
भी
नाटो
है
और
यहां
भी
चीन
है-
आंखें
खोल
ठीक
से
पहचानो-
यहां
कौन
है
मोटा
और
कौन
महीन
है.
जी
हां,
ये
चुनावी
वॉर
है.
कइयों
के
लिए
जीने-मरने
की
बारी
है.
कइयों
की
ऐतिहासिक
तैयारी
है.
लिहाजा
यहां
हर
नेता
का
बयान
अब
बारूद
बन
चुका
है.
नेता
अब
भाषण
नहीं
देते-
जुबान
से
चिंगारी
फेंकते
हैं.
कहीं
बेईमानी
की
बौछार,
कहीं
ईमानदारी
की
बमबारी.
बीच
में
जनता
की
अपनी
लाचारी.
सामने
वाले
को
कौन
कितनी
आसानी
से
भस्म
कर
दे
सकता
है,
इसकी
बानगी
देखनी
हो
तो
हिंदुस्तान
की
चुनाव
बेला
से
बढ़कर
दुनिया
में
कहीं
कोई
दूसरा
मौसम
नहीं.

फिजां
चुनावी,
गारंटी
गुलाबी

वास्तव
में
गारंटी
का
बाजार
भी
कम
अनोखा
नहीं
है.
गारंटी
मतलब
क्वालिटी,
गारंटी
मतलब
ऑथेंटिसिटी,
गारंटी
मतलब
रिलायबलिटी,
गारंटी
मतलब
सटिस्फैक्शन,
गारंटी
मतलब
फ्रेश
एंड
प्योर.
अब
इन
राजनीतिक
गारंटी
का
मतलब,
चॉकलेट
की
तरह
खाओ
और
खुद
जान
जाओ.
चुनावी
गारंटियों
की
आंधी
देखकर
फिल्म
कलाकार
महमूद
पर
फिल्माया
गाया
गाना
याद

रहा
है-
खाली
की
गारंटी
दूंगा
भरे
हुए
की
क्या
गारंटी!
वास्तव
में
फिजां
चुनावी
हो
तो
गारंटी
भी
क्यों

गुलाबी
हो!

यों
बाजारवाद
का
अपना
सिद्धांत
है-
कोई
भी
व्यवसायी
अपने
माल
को
कच्चा
और
अधकचरा
बताकर
कभी
नहीं
बेचता.
यहां
हर
प्रोडक्ट
की
गारंटी
का
शोर
मचा
है
लेकिन
यकीन
मानिए
गारंटी
का
ये
प्रचार
छोटे
व्यापारियों
के
भरोसे
और
विश्वास
के
धंधे
पर
बड़े
बिजनेसमैन
का
हथौड़ा
होता
है.
बाजार
में
भरोसे
पर
अब
भला
कौन
विश्वास
करता
है!
कुछ
इसी
तरह
जब
चुनावों
में
भी
वादे
बेकार
हो
जाते
हैं
तो
उसकी
जगह
गारंटी
शब्द
का
जन्म
होता
है.
नेता
अब
वादे
नहीं
करते,
गारंटी
देते
हैं.
मैं
चिंतित
हू्ं
कुछ
सालों
के
बाद
गारंटी
के
बदले
कौन
सा
शब्द
खोजेंगे!
वैसे
आप
तो
जानते
ही
हैं
बाजार
में
चाइनीज
आइटम
बेचने
वाले
भी
गारंटी
देते
हैं-
माल
चोखा
है,
प्लीज
यूज़
एंड
थ्रो!