
फाइल
फोटो.
राजस्थान
में
जयपुर,
भीलवाड़ा
और
राजसमंद
के
बाद
डूंगरपुर-बांसवाड़ा
लोकसभा
सीट
और
बागीदौरा
विधानसभा
सीट
पर
कांग्रेस
पार्टी
में
अंतरकलह
अब
खुलकर
सामने
आ
गई
है.
वागड़
की
दोनों
सीटों
पर
कांग्रेस
पार्टी
ने
पहले
उम्मीदवारों
को
पार्टी
सिंबल
दिया
और
नाम
वापसी
के
एक
दिन
पहले
अचानक
भारत
आदिवासी
पार्टी
को
समर्थन
का
ऐलान
कर
दिया.
जब
राजस्थान
के
नेताओं
ने
नाम
वापसी
के
लिए
इन
नेताओं
से
संपर्क
करना
चाहा
तो
ये
नेता
आउट
ऑफ
रेंज
हो
गए.
ऐसे
में
अब
बांसवाड़ा-डूंगरपुर
सीट
पर
अरविंद
डामोर
चुनावी
मैदान
में
है,
भले
ही
कांग्रेस
उन्हें
6
साल
के
लिए
निष्कासित
कर
चुकी
है.
कुल
मिलाकर
अब
बांसवाड़ा
-डूंगरपुर
लोकसभा
सीट
का
चुनाव
त्रिकोणीय
हो
गया
है.
यहां
बीजेपी
ने
कांग्रेस
से
आए
पूर्व
मंत्री
महेंद्रजीत
मालवीय
को
उम्मीदवार
बनाया
है
वहीं
कांग्रेस
से
डामोर
मैदान
में
है,
जबकि
भारत
आदिवासी
पार्टी
से
विधायक
राजकुमार
रोत
चुनावी
मैदान
में
है.
बांसवाड़ा
डूंगरपुर
लोकसभा
क्षेत्र
से
कांग्रेस
पार्टी
के
निशान
पर
चुनाव
लड़
रहे
और
कांग्रेस
पार्टी
से
निष्कासित
प्रत्याशी
अरविंद
डामोर
ने
स्थानीय
नेताओं
पर
बड़ा
आरोप
लगाया
है.
धोखे
में
रखकर
नामांकन
कराने
का
आरोप
नामांकन
वापस
लेने
के
अंतिम
समय
तक
मोबाइल
स्विच
ऑफ
कर
नामांकन
वापस
नहीं
लेने
वाले
प्रत्याशी
अरविंद
डामोर
ने
आरोप
लगाया
कि
बांसवाड़ा
जिला
कांग्रेस
कमेटी
के
अध्यक्ष
रमेश
पांड्या
और
पूर्व
मंत्री
और
बांसवाड़ा
विधायक
अर्जुन
सिंह
बामनिया
ने
उनको
धोखे
में
रखकर
नामांकन
पत्र
दाखिल
करवाया.
अब
गठबंधन
के
नाम
पर
उन
पर
दबाव
डाल
रहे
थे.
डामोर
बोले-
मैं
चुनाव
से
पीछे
नहीं
हटूंगा
डामोर
का
कहना
है
कि
अब
जबकि
मैं
नामांकन
पत्र
भर
चुका
हूं
और
कांग्रेस
का
चुनाव
चिह्न
मेरे
पास
है
तो
अब
मैं
पूरे
जोर
शोर
से
चुनाव
लड़ूंगा.
हालांकि
कांग्रेस
नेताओं
के
पास
डामोर
के
नामांकन
वापस
न
लेने
का
एहसास
पहले
से
था
इसीलिए
पीसीसी
चीफ
ने
भी
इस
नाटकीय
घटनाक्रम
पर
साफ
साफ
प्रतिक्रिया
नहीं
दी.