
बढ़ती
गर्मी
तोड़ेगी
बिजली
खपत
के
सारे
रिकॉर्ड
दिल्ली
में
इस
बार
माना
जा
रहा
है
कि
बिजली
खपत
के
सारे
पुराने
रिकॉर्ड
टूट
जायेंगे.
इस
बार
देश
की
राजधानी
में
बिजली
की
डिमांड
8000
मेगावाट
पहुंच
सकती
है.
पिछले
साल
की
बात
करें
तो
शहर
में
पीक
डिमांड
7438
मेगावाट
रही
थी.
2022
में
दिल्ली
में
यहां
बिजली
की
मांग
7695
मेगावाट
दर्ज
की
गई
थी.
बीआरपीएल
क्षेत्र
में
पिछले
साल
बिजली
की
पीक
डिमांड
3250
मेगावॉट
थी,
जबकि
2022
में
ये
3389
मेगावाट
थी.
इस
साल
2024
बीआरपीएल
में
बिजली
की
मांग
3679
मेगावाट
पहुंचने
की
संभावना
है.
वहीं
अगर
बीवाईपीएल
की
बात
करें,
तो
पिछले
साल
इस
क्षेत्र
में
बिजली
की
पीक
डिमांड
1670
मेगावॉट
पहुंची
थी,
जबकि
2022
में
यह
1752
मेगावॉट
दर्ज
की
गई
थी.
इस
साल
यानी
2024
में
बीवाईपीएल
में
बिजली
की
मांग
1857
मेगावॉट
के
आंकड़े
को
छू
सकती
है.
रूफटॉप
सोलर
पैनलों
से
भी
ली
जा
रही
बिजली
उपभोक्ताओं
को
बेहतर
बिजली
आपूर्ति
उपलब्ध
कराने
के
लिए
बीएसईएस
ने
लंबी
अवधि
के
समझौतों
के
तहत
बिजली
की
पर्याप्त
व्यवस्था
कर
ली
है.
पारंपरिक
पावर
प्लांटों
से
मिल
रही
बिजली
के
अलावा,
बीएसईएस
को
लगभग
2100
मेगावाट
अक्षय
ऊर्जा
मिलेगी.
सौर
ऊर्जा
के
प्लांटों
से
बीएसईएस
को
888
मेगावाट
सौर
ऊर्जा
मिलेगी.
हाइड्रो
प्लांट
से
515
मेगावॉट
बिजली
मिलेगी
और
500
मेगावाट
विंड
पावर
से
मिलेगी.
इसके
साथ
ही
कचरे
से
बनने
वाली
40
मेगावाट
बिजली
भी
बीएसईएस
को
उपलब्ध
होगी.
बीएसईएस
क्षेत्र
में
उपभोक्ताओं
के
घरों
की
छतों
पर
लगे
रूफटॉप
सोलर
पैनलों
से
भी
163
मेगावॉट
बिजली
बीएसईएस
को
मिलेगी.
ये
भी
पढ़ें
बीएसईएस
को
दी
जायेगी
670
मेगावाट
की
बिजली
जानकारी
के
लिए
आपको
बता
दे
पावर
बैंकिंग
के
माध्यम
से
भी
बीएसईएस
को
670
मेगावॉट
बिजली
दी
जायेगी.
बिजली
की
मांग
का
लगभग
सटीक
अनुमान
लगाने
के
लिए
बीएसईएस
अत्याधुनिक
तकनीकों
का
भी
इस्तेमाल
कर
रही
है.
इसमें
मौसम
का
अनुमान
लगाने
वाली
तकनीक
भी
शामिल
हैं.
लोड
का
लगभग
सटीक
अनुमान
लगाने
में
तापमान,
बारिश,
बादल,
हवा
की
गति,
हवा
की
दिशा
और
उमस
इन
सबकी
महत्वपूर्ण
भूमिका
होती
है.
आर्टिफिशियल
इंटेलिजेंस
की
मदद
बिजली
की
मांग
को
बेहतर
अनुमान
लगा
पाने
की
क्षमता
उपभोक्ताओं
को
विश्वसनीय
बिजली
आपूर्ति
में
काफी
मददगार
साबित
होती
है.
बिजली
की
बढ़ती
जरूरतों
को
देखते
हुए
बीएसईएस
ने
अपने
नेटवर्क
को
भी
अपग्रेड
किया
है.
अत्याधुनिक
तकनीकों
की
बदौलत
बीएसईएस
अब
बिजली
की
मांग
का
लगभग
सटीक
अनुमान
लगा
सकती
है.
बिजली
की
मांग
का
सटीक
अनुमान
लगाने
के
लिए
बीएसईएस
आर्टिफिशियल
इंटेलिजेंस
और
मशीन
लर्निंग
की
भी
मदद
ले
रही
है.