आदिवासी वोटों के लिए मोदी-राहुल में शह मात का खेल, कांग्रेस-बीजेपी में से कौन मारेगा बाजी?

आदिवासी वोटों के लिए मोदी-राहुल में शह मात का खेल, कांग्रेस-बीजेपी में से कौन मारेगा बाजी?
आदिवासी वोटों के लिए मोदी-राहुल में शह मात का खेल, कांग्रेस-बीजेपी में से कौन मारेगा बाजी?


प्रधानमंत्री
नरेंद्र
मोदी
और
कांग्रेस
के
पूर्व
अध्यक्ष
राहुल
गांधी

देश
में
लोकसभा
चुनाव
का
बिगुल
बज
चुका
है.
राजनीतिक
पार्टियां
पूरे
दमखम
के
साथ
मैदान
में
उतर
चुकी
हैं.
एक
तरफ
बीजेपी
की
अगुवाई
वाली
एनडीए
है
तो
दूसरी
ओर
इंडिया
गठबंधन
है.
एक
तरफ
400
पार
का
नारा
है
तो
दूसरी
ओर
मोदी
सरकार
को
हटाने
का
प्रण
है.
400
पार
के
लिए
पीएम
मोदी
ताबड़तोड़
रैली
कर
रहे
हैं.
एक-एक
दिन
में
तीन
राज्यों
का
दौरा
कर
रहे
हैं.
हर
उस
सीट
पर
पहुंचने
की
कोशिश
कर
रहे
हैं
जहां
से
एक
साथ
कई
सीटों
पर
सियासी
समीकरण
साधा
जा
सके.
वहीं,
कांग्रेस
के
पूर्व
अध्यक्ष
राहुल
गांधी
लगातार
दौरा
कर
मोहब्बत
की
दुकान
खोलने
की
बात
कर
रहे
हैं.
इस
बार
के
चुनाव
में
आदिवासी
वोटरों
को
लेकर
भी
बीजेपी
और
कांग्रेस
के
बीच
में
शह
मात
का
खेल
चल
रहा
है.

प्रधानमंत्री
नरेंद्र
मोदी
सोमवार
को
छत्तीसगढ़
के
बस्तर
पहुंचे
हुए
थे.
देश
में
चुनाव
की
घोषणा
होने
के
बाद
पीएम
मोदी
का
यह
पहला
छत्तीसगढ़
दौरा
था.
छत्तीसगढ़
में
रायपुर
के
अलावा
बिलासपुर
समेत
कई
बड़े
शहर
हैं,
लेकिन
पीएम
मोदी
ने
दौरे
की
शुरुआत
बस्तर
से
की.
इसके
पीछे
भी
पीएम
मोदी
का
सियासी
दांव
है.
इसलिए
क्योंकि
छत्तीसगढ़
आदिवासी
बहुल
राज्य
है.
इसमें
भी
बस्तर
जिले
की
गिनती
घोर
आदिवासी
क्षेत्र
के
रूप
में
होती
है.
इसके
आसपास
में
कोंडागांव,
दंतेवाड़ा,
सुकमा,
बीजापुर
जैसे
जिले
हैं.
यहां
भी
अच्छी
खासी
संख्या
में
आदिवासी
वोटर
निवास
करते
हैं.
बस्तर
में
रैली
करने
के
बाद
पीएम
मोदी
महाराष्ट्र
के
चंद्रपुर
पहुंचे.
ये
इलाका
भी
आदिवासी
बहुल
इलाका
है.

मध्य
प्रदेश
की
6
सीटें
आदिवासियों
के
लिए
आरक्षित

वहीं,
कांग्रेस
के
पूर्व
अध्यक्ष
राहुल
गांधी
मध्य
प्रदेश
के
शहडोल
पहुंचे
थे.
शहडोल
में
उन्होंने
एक
जनसभा
को
संबोधित
किया.
इससे
पहले
वो
मंडला
लोकसभा
सीट
के
सिवनी
में
बड़ी
रैली
की.
शहडोल
निर्वाचन
क्षेत्र
अनुसूचित
जनजाति
के
उम्मीदवारों
के
लिए
आरक्षित
है.
इस
सीट
पर
17,12,640
के
आसपास
वोटर
हैं.
इनमें
से
आधे
से
अधिक
आदिवासी
वोटर
हैं.
मध्य
प्रदेश
में
लोकसभा
की
कुल
29
सीटें
हैं.
इनमें
धार,
खरगोन,
रतलाम,
शहडोल,
मंडला
और
बैतूल
लोकसभा
सीटें
अनुसूचित
जनजाति
के
लिए
आरक्षित
हैं.
2019
के
लोकसभा
चुनाव
में
राज्य
की
29
लोकसभा
सीटों
में
से
कांग्रेस
को
महज
एक
सीट
पर
ही
जीत
मिली
थी
जबकि
28
सीटों
में
हार
का
सामना
करना
पड़ा
था.

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भी
पढ़ें

देश
की
47
लोकसभा
सीटें
अनुसूचित
जनजाति
के
लिए
आरक्षित

मध्य
प्रदेश,
छत्तीसगढ़,
राजस्थान,
झारखण्ड,
ओडिशा
समेत
कई
और
ऐसे
राज्य
हैं
जिनकी
गिनती
आदिवासी
बहुसंख्यक
के
रूप
में
होती
है.
मतलब
यहां
आदिवासी
वोटों
की
संख्या
ज्यादा
है.
देशभर
में
लोकसभा
की
543
लोकसभा
सीटों
में
से
47
सीटें
आदिवासियों
यानी
अनुसूचित
जनजाति
के
लिए
आरक्षित
हैं.
छत्तीसगढ़
में
लोकसभा
की
कुल
11
सीटें
हैं.
इनमें
से
4
सीटें
अनुसूचित
जनजाति
के
लिए
आरक्षित
हैं.
इसमें
बस्तर,
कांकेर,
रायगढ़,
सरगुजा
की
सीट
आती
है.
राज्य
की
लगभग
32
फीसदी
आबादी
आदिवासियों
की
है.
छत्तीसगढ़
विधानसभा
की
90
सीटों
में
से
29
सीटें
अनुसूचित
जनजाति
के
लिए
आरक्षित
हैं.
पीएम
मोदी
की
ओर
से
छत्तीसगढ़
में
अपनी
चुनावी
रैली
की
शुरुआत
बस्तर
से
करने
के
पीछे
संदेश
साफ
है
कि
वो
आदिवासी
वोटरों
के
सहारे
छत्तीसगढ़
की
ज्यादा
से
ज्यादा
सीटों
पर
बीजेपी
की
जीत
चाहते
हैं.
पिछले
साल
के
अंत
में
छत्तीसगढ़,
मध्य
प्रदेश
और
राजस्थान
में
विधानसभा
चुनाव
हुए
थे.

विधानसभा
चुनाव
में
आदिवासी
वोटर
निर्णायक
की
भूमिका
में
थे

इस
चुनाव
में
आदिवासी
वोटरों
ने
निर्णायक
भूमिका
निभाई.
छत्तीसगढ़
की
तो
पूरी
राजनीति
ही
आदिवासियों
के
ईद-गिर्द
घूमती
रहती
है.
इस
बार
के
विधानसभा
चुनाव
में
बीजेपी
आदिवासी
वोटरों
को
साधने
में
सफल
रही,
जिसका
नतीजा
ये
हुआ
है
कि
पार्टी
90
में
से
54
सीट
जीतने
में
सफल
रही.
इनमें
17
सीटें
ऐसी
थी
जो
अनुसूचित
जनजाति
के
लिए
आरक्षित
थी.
ऐसे
में
बीजेपी
विधानसभा
चुनाव
की
तरह
लोकसभा
चुनाव
में
भी
आदिवासी
वोटर
को
साधने
में
जुटी
है.
यही
वजह
है
कि
पीएम
मोदी
ने
छत्तीसगढ़
में
अपने
चुनाव
प्रचार
अभियान
की
शुरुआत
के
लिए
बस्तर
को
चुना.

पीएम
बोले
कांग्रेस
ने
आदिवासियों
का
तिरस्कार
किया

बीजेपी
किस
तरह
से
आदिवासी
वोटरों
को
अपनी
तरफ
मोड़ने
में
लगी
इसकी
झलक
पीएम
मोदी
के
भाषण
में
भी
दिख
रही
थी.
बस्तर
में
पीएम
मोदी
ने
कहा
कि
जनजातीय
समाज
हमेशा
बीजेपी
की
प्राथमिकता
रही
है.
उन्होंने
कहा
कि
जिस
आदिवासी
समाज
का
कांग्रेस
ने
हमेशा
तिरस्कार
किया,
उसी
समाज
की
बेटी
आज
देश
की
राष्ट्रपति
हैं.
बीजेपी
ने
ही
छत्तीसगढ़
को
पहला
आदिवासी
मुख्यमंत्री
भी
दिया
है.
बीजेपी
ने
आदिवासियों
के
लिए
अलग
मंत्रालय
और
अलग
बजट
बनाया
है.

मध्य
प्रदेश
में
आदिवासी
बहुल
राज्य
है.
यहां
के
चुनाव
में
आदिवासी
वोटरों
की
भूमिका
काफी
अहम
रहती
है.
यहां
की
21
फीसदी
आदिवासी
निवास
करते
हैं.
पिछले
विधानसभा
चुनाव
में
आदिवासी
वोटरों
की
भूमिका
काफी
अहम
रही.
2023
के
मध्य
प्रदेश
विधानसभा
चुनाव
में
बीजेपी
ने
163
सीटों
पर
रिकॉर्ड
जीत
हासिल
की
थी
और
कांग्रेस
महज
66
सीट
पर
सिमट
गई.
इन
65
सीटों
में
कांग्रेस
के
खाते
में
22
सीटें
ऐसी
आई
थी
जो
कि
आदिवासी
आरक्षित
सीटें
थीं.
जबकि
बीजेपी
24
आदिवासी
आरक्षित
सीटों
पर
जीत
हासिल
की
थी.

राहुल
बोले-
हिंदुस्तान
के
पहले
मालिक
आदिवासी

शहडोल
में
रैली
को
संबोधित
करते
हुए
राहुल
गांधी
ने
कहा
कि
आदिवासियों
को
इस
देश
में
कोई
हक
नहीं
मिलने
वाला
है.
हमारे
लिए
आप
आदिवासी
हो
और
हिंदुस्तान
के
पहले
मालिक
हो.
वनवासी
शब्द
आपके
इतिहास
को
मिटाने
वाला
शब्द
है.
वहीं,
सिवनी
में
जनसभा
को
संबोधित
करते
हुए
राहुल
गांधी
ने
कहा
कि
हिंदुस्तान
में
जहां
भी
आदिवासियों
की
आबादी
50
फीसदी
से
ज्यादा
है,
वहां
हम
छठवीं
अनुसूची
लागू
करेंगे.
आदिवासियों
को
उनका
अधिकार
देने
के
लिए
हम
पेसा
कानून
लाए,
जमीन
अधिग्रहण
और
ट्राइबल
बिल
लाए.
इंदिरा
गांधी
जी
और
कांग्रेस
की
सरकारों
ने
आदिवासियों
को
उनकी
जमीन
वापस
दी
और
उसका
हक
आपको
दिया.

यही
वजह
है
कि
लोकसभा
के
चुनाव
में
बीजेपी
और
कांग्रेस
दोनों
के
बीच
में
आदिवासी
वोटरों
को
साधने
के
लिए
शह
मात
का
खेल
चल
रहा
है.
एक
तरफ
राहुल
गांधी
आदिवासी
क्षेत्रों
में
रैली
पर
रैली
कर
रहे
है
तो
दूसरी
ओर
पीएम
मोदी
उनको
अपना
परिवार
बताने
से
पीछे
नहीं
हट
रहे
हैं.