
केंद्र
सरकार
के
निर्देश
पर
इंदौर
में
सात
मई
को
माॅकड्रिल
और
ब्लैक
आउट
हुआ,
लेकिन
शहर
में
उसका
सिस्टम
लंबे
समय
के
लिए
स्थाई
रुप
से
कायम
रहेगा,
ताकि
भविष्य
में
ब्लैक
आउट
के
हालतों
के
दौरान
वह
एक्टिव
रह
सके।
इंदौर
में
आपदा
प्रबंधन
के
कामों
के
कामों
की
अफसरों
ने
समीक्षा
की
है।
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देश
के
सीमावर्ती
क्षेत्रों
में
युद्ध
जैसे
हालता
है।
इंदौर
देश
के
मध्य
हिस्से
में
है।
इंदौर
के
समीप
सैन्य
छावनी
महू
और
केट
जैसे
संस्थान
है।
इस
कारण
यहां
भी
सुरक्षा
का
पूरा
ध्यान
रखा
जा
रहा
है।
इंदौर
में
फिलहाल
12
स्थानों
पर
सायरन
की
व्यवस्था
की
गई
है।
इसके
दायरा
बढ़ाया
जा
सकता
है,क्योकि
7
मई
को
शहर
के
कई
स्थानों
पर
सायरन
की
आवाज
सुनाई
नहीं
दी
थी।
विज्ञापन
कलेक्टर
आशीष
सिंह
कह
चुके
है
सात
मई
को
जो
ब्लैक
आउट
किया
गया
था।
उसकी
समीक्षा
भी
की
गई
है।
वैसे
तो
शहर
के
ज्यादातर
हिस्सों
में
माॅकड्रिल
के
प्रोटोकाल
का
पालन
किया
गया,
लेकिन
जिन
क्षेत्रों
में
रोशनी
नजर
आई।
वहां
अगली
माॅकड्रिल
में
बिजली
गुल
की
जाएगी।
पहली
माॅकड्रिल
में
स्वेच्छा
से
शहरवासियों
को
लाइट
बंद
करने
के
लिए
कहा
गया
था।
उधर
नगर
निगम
भी
इंदौर
में
आपदा
सेल
गठित
करने
की
तैयारी
कर
चुका
है।
वार्ड
स्तर
पर
रहवासियों
को
आपदा
प्रबंधन
की
ट्रैनिंग
दी
जाएगी।