
मध्य
प्रदेश
के
झाबुआ जिले
के
थांदला
गांव
में
एक
महिला
डेढ़
साल
बाद
गांव
लौटी
तो
हैरान
रह
गई।
उसे
पता
चला
कि
उनकी
हत्या
के
आरोप
में
पांच
लोग
जेल
में
है,
जबकि
महिला
मजदूरी
के
लिए
घर
से
बाहर
थी।
मामला
सामने
आने
के
बाद
आरोपियों
के
वकील
ने
कोर्ट
के
सामने
पक्ष
रखा।
इसके
बाद
आरोपी
जेल
से
रिहा
हुए।
कोर्ट
ने
पुलिस
की
कार्यप्रणाली
पर
भी
सवाल
उठाए
है।
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थांदला
की
नदी
में
वर्ष
2024
को
एक
महिला
का
शव
नदी
में
मिला
था।
शव
क्षत-विक्षत
था।
चेहरा
भी
पहचान
में
नहीं
आ रहा
था।
मृत
महिला
की
पहचान
हुलिए
और पहनावे
के
आधार
पर
ललिता
के
रिश्तेदार
व
परिजनों
की।
इसके
बाद
शव
का
उन्होंने
अंतिम
संस्कार
कर
दिया।
पुलिस
ने
भी
शिनाख्त
बगैर
डीएनए
टेस्ट
के
कर
ली।
बाद
में
पुलिस
ने
जांच
शुरू
की।
जांच
में
पता
चला
कि
ललिता
की
दोस्ती
शाहरुख
नामक
युवक
के
साथ
थी।
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पुलिस
ने
उसे
हिरासत
में
लिया।
इसके
बाद
यह
कहानी
बनाई
कि
पांच
सौ
रुपये
के
विवाद
में
शाहरुख
ने
अपने
साथ
इमरान,
एजाज,
सोनू
और अजीम
के
साथ
लाठी-डंडों
से
पीट
कर
ललिता
को
मार
डाला।
पुलिस
ने
पांचों
को
गिरफ्तार
किया।
इसके
बाद
उन्हें
जेल
भेज
दिया
गया।
पुलिस
ने
इस
केस
की
चार्ज
शीट
भी
तैयार
कर
कोर्ट
में
प्रस्तुत
कर
दी
थी।
डेढ़
साल
बाद
मार्च
माह
में
युवती
थाने
पहुंची
और
कहा
कि
वह
जिंदा
है।
मजदूरी
के
लिए
डेढ़
साल
से
बाहर
थी।
पुलिस
ने
महिला
की
डीएनए
टेस्ट
कराया
और तय
हुआ कि
नदी
में
मिला
शव
ललिता
का
नहीं
था।
इसके
बाद
कोर्ट
में
मामला
पहुंचा।
वकील
मनीष
यादव
ने
हाईकोर्ट
में
जमानत
याचिका
दायर
की।
कोर्ट
को
बताया
गया
कि
जिसकी
हत्या
के
आरोप
में
पांच
आरोपी
जेल
में
बंद
है।
वह
जीवित
है।
इसके
बाद
आरोपियों
की
रिहाई
को
लेकर
फैसला
सुनाया
गया।